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वट सावित्री अमावस्याः दो गज की दूरी पर महिलाओं ने की वट की पूजा

22/05/2020

-लॉक डाउन के बीच महिलाओं ने पढ़ी वट सावित्री की कथा

पंकज मिश्रा
हमीरपुर, 22 मई (हि.स.)। लॉक डाउन के बीच शुक्रवार को भोर होने से पहले ही महिलाओं ने वट सावित्री अमावस्या पर वट वृक्ष (बरगद) की पूजा विधि विधान से की। पूजा के दौरान महिलाओं ने शारीरिक दूरी का विशेष ध्यान रखते हुये वट वृक्ष के फेरे लिये। ऐतिहासिक चौरादेवी मंदिर समेत अन्य तमाम स्थानों पर भी वट सावित्री की पूजा की धूम मची रही। 

वट वृक्ष की पूजा के बारे में यह कथा काफी पौराणिक है जब भद्र देश के राजा अश्वपति की पुत्री सावित्री की शादी सत्यवान के साथ हुयी थी। सत्यवान की उम्र जब 28 वर्ष की हो गयी तो उन्हें लेने स्वयं यमराज आये थे। उस समय सावित्री बरगद के वृक्ष के नीचे अपने पति के पास बैठी थी। यमराज जब सत्यवान के प्राण लेकर चल दिये तो सावित्री भी उनके पीछे-पीछे चल पड़ी।

यमराज के बार-बार कहने के बावजूद सावित्री उनके पीछे-पीछे चलने की जिद पर अड़ी रही। यमराज ने सावित्री की पतिव्रता को देखते हुये तीन बर मांगने को कहा तो उसने अपने अंधी सास और ससुर को रोशनी देने, खोया राजपाट वापस लौटाने तथा सौभाग्यशाली होने का बर मांगा। जिसे यमराज ने दे दिया। बाद में यमराज ने पति की भक्ति देख सावित्री के पति के प्राण लौटा दिये थे।

इसी कथानक से वट वृक्ष की पूजा होने लगी। इस व्रत का दूरा वैज्ञानिक पहलू यह भी है कि बरगद के पेड़ से मानव को आक्सीजन ज्यादा मात्रा में मिलती है और इससे पर्यावरण भी स्वस्थ रहता है। इस बार लाँक डाउन के कारण वट वृक्ष की पूजा महिलाओं ने विशेष प्रकार से की है। 

लॉक डाउन के देखते हुये पूजा में कोई व्यवधान न पड़े इसलिये भोर होने से पहले ही महिलायें घर से निकल पड़ी और बरगद के वृक्ष के नीचे सामाजिक दूरी की ध्यान रखती हुयी वट वृक्ष की विधि विधान से पूजा अर्चना की। तमाम महिलायें पूजा के दौरान मास्क भी लगाये थी वहीं कई महिलायें ऐसी भी थी कि कोरोना महामारी से बचाव के लिये अपनी साड़ी से मुंह बांधे थी। 

शहर के पतालेश्वर मंदिर, चौरादेवी मंदिर, रहुनियां धर्मशाला, बीएसएनएल, कम्पनी बाग, रमेड़ी, हाथी दरवाजा सहित अन्य स्थानों पर वट वृक्ष की पूजा के लिये महिलाओं की भीड़ एकत्र हुयी लेकिन सभी महिलाओं ने सामाजिक दूरी का पालन पूजा समाप्ति होने तक किया। पूजा के दौरान महिलाओं ने वट वृक्ष के फेरे लिये और अपने पति के दीर्घायु होने की कामना की। बरगद के पेड़ की पूजा करने वाली महिलाओं ने खरबूजा फल चढ़ाये और पकवान चढ़ाकर वट वृक्ष के नीचे वट सावित्री की कथा भी पढ़ी। बुजुर्ग ज्ञानवती और गुड्डों ने वट सावित्री अमावस्या पर महिलाओं को पूजा के दौरान इस व्रत की कथा भी सुनाई। 

कोरोना पॉजिटिव गांव में घरों के अंदर हुयी वट सावित्री की पूजा
सुमेरपुर क्षेत्र के सिमनौड़ी गांव में महिलाओं ने मजबूरी में अपने घरों के अंदर ही वट सावित्री की पूजा की। इस गांव में गुरुवार को कोरोना वायरस के दो पॉजिटिव मरीज जांच में मिले हैं, जिससे पूरा गांव कंटेनमेंट जोन घोषित है। 

पूरे गांव में हर गली और रास्ते सील कर पुलिस का पहरा बैठाया गया है। ग्रामीणों को घर से बाहर निकलने पर भी पाबंदी है। इसलिये गांव में महिलाओं ने घर के अंदर ही वट सावित्री की पूजा की। गांव के सरपंच अरुण कुमार ने बताया कि पूरे गांव में पुलिस बल भ्रमण कर रहा है। जिसके कारण महिलायें घरों के अंदर इस पौराणिक व्रत की पूजा कर रही है। 

उन्होंने बताया कि गांव में एक दो घरों के दरवाजे पर बरगद के पेड़ लगे हैं, जहां सामाजिक दूरी का पालन करते हुये महिलाओं ने पूजा की है लेकिन गांव के अन्य हिस्सों में ये पूजा घर की चहारदीवारी के अंदर ही हो रही है। सरपंच ने बताया कि कोरोना वायरस के तीन मरीज इस गांव में मिले हैं जिसके कारण लोग दहशत में भी है। और दहशत के बीच ये पूजा जारी है।

50 रु. किलो में खुलेआम बिकते रहे खरबूजे
वट सावित्री अमावस्या पर बरगद की पूजा के लिये सुहागिन महिलाओं को खरबूजा के लाले पड़े गये। 20 रुपये किलो में बिकने वाले खरबूजे के भाव आज 50 रुपये किलो हो जाने से गरीब लोगों ने पसीना छोड़ दिया। गौरतलब है कि आज के दिन पूजा में खरबूजा का भोग बरगद के सात फेरे लगाने के बाद सुहागिन महिलायें करती है जिसके लिये कल से ही बाजारों में खरबूजे के भाव आसमान छूने लगे।

हिन्दुस्थान समाचार


 
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