राष्ट्रीय

Blog single photo

संतों, राजनेताओं ने दी ब्रह्मलीन स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि को श्रद्धांजलि

10/07/2019

-राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, अनेक राज्यपाल, सैकड़ों संगठनों व देश भर के संतों ने दी श्रद्धांजलि

रजनीकांत शुक्ल
हरिद्वार, 10 जुलाई (हि.स.)। देश के प्रमुख राजनेताओं, कई राज्यों के राज्यपाल व तमाम प्रमुख संतों ने भारत माता मंदिर के संस्थापक ब्रह्मलीन स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महाराज को श्रद्धासुमन अर्पित कर उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प व्यक्त किया। 

जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वरस्वामी अवधेशानन्द गिरि महाराज की अध्यक्षता में आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लिखित संदेश भेजकर ब्रह्मलीन स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महाराज को श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर विजयवाड़ा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अति महत्वपूर्ण बैठक बीच में छोड़कर संघ प्रमुख मोहन भागवत भी हरिद्वार आए। उन्होंने कहा कि हिंदू हितों का संरक्षण करने वाले ब्रह्मलीन स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि ने रामजन्म भूमि जैसे मुद्दों पर हमेशा ही सरकार को चेताने का काम किया। उन्होंने राम मंदिर निर्माण को लेकर देश भर में हिंदू समाज को जागृत करने का काम किया। उनके पदचिह्नों पर चलकर राष्ट्र निर्माण में सच्चे सिपाही के रूप में सभी को कार्य करना चाहिए। उन्होंने उन्हें दिव्य महापुरुष बताया। 

उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि एक दिव्य महापुरुष थे। उनके विचारों को आत्मसात करने की आवश्यकता है। उनके अधूरे कार्यों को भारत माता मंदिर के तत्वावधान में निर्विघ्न संचालित रखना चाहिए। संतों की कृपा दृष्टि से ही समाज का उत्थान होता है।

गोवा की राज्यपाल मृदुला सिन्हा ने कहा कि दलित, पीड़ित व उपेक्षितों की सेवा में अपना जीवन समर्पित करने वाले ब्रह्मलीन स्वामी सत्यमित्रानंद महाराज सदैव याद रखे जाएंगे। सभी को उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लेना चाहिए। 

शांतिकुंज प्रमुख डॉ. प्रणव पण्डया ने कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी सत्यमित्रानंद समाज के मार्गदर्शक थे। अपने सेवा कार्यों से उन्होंने देश की आध्यात्मिक राजधानी हरिद्वार का गौरव बढ़ाया। 

झारखण्ड की राज्यपाल द्रौपदी मुर्मु ने झारखण्ड वासियों की तरफ से श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि केवल आध्यात्मिक गुरु ही नहीं, समाज सुधारक भी थे।

बिहार के राज्यपाल लालजी टण्डन ने कहा कि भारत मंदिर हमेशा धर्म व राष्ट्र का चिंतन करने वाले ब्रह्मलीन स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि का संदेश प्रसारित करता रहेगा। वे जन जन के प्रेरणा स्रोत थे। सिक्किम के राज्यपाल गंगा प्रसाद ने कहा कि स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि ने अपना पूरा जीवन सेवा को समर्पित किया। उनके बताए मार्ग पर चलना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी। समारोह में मेघालय के राज्यपाल तथागत राय भी स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि के कृतित्व को नमन करते हुए उन्हें महान विभूति बताया। 

शिया धर्मगुरू कोकब मुस्तफा ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि हमेशा भारत माता, गौ माता व गंगा माता की सेवा करने वाले ब्रह्मलीन स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महान संत थे। उनके दिखाए मार्गो का अनुसरण प्रत्येक समाज के नागरिक को करना चाहिए। 

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि संतों के प्रेरणास्रोत थे। उनके चले जाने से हुई अपूरणीय क्षति को कभी पूरा नहीं किया जा सकता है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरिगिरि महाराज ने कहा कि दिव्य महापुरुषों की आत्मा अजर-अमर होती है। वह समाज को हमेशा ही अपना आशीर्वाद प्रदान करती है। सनातन परंपराओं का निर्वहन देश दुनिया में ब्रह्मलीन स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महाराज द्वारा किया गया।

योग गुरू बाबा रामेदव, आचार्य स्वामी बालकानंद गिरि महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी सत्यमित्रानंद महाराज ने हमेशा ही राष्ट्रोत्थान में अपना योगदान दिया। सनातन परंपराओं का प्रचार देश दुनिया में उनके द्वारा किया गया। उन्होंने समाज के उत्थान में समर्पित भावना से काम किया। गरीब, असहाय, निर्धन परिवारों के उत्थान में उनका योगदान हमेशा ही समाज को प्रेरणा देता रहेगा। समारोह के अवसर पर समन्वय सेवा ट्रस्ट की ओर से शब्दोउपासना मेघदूतम पुस्तक का विमोचन भी किया गया। 

राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, गृह मंत्री अमित शाह, भारत रत्न लता मंगेशकर ने अपने पत्र के माध्यम से श्रद्धांजलि अर्पित की। श्रद्धांजलि समारोह में उत्तराखण्ड की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य, मनोहर लाल खट्टर (मुख्यमंत्री हरियाणा), राज्य के शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान,  ब्रहमस्वरूप ब्रहमचारी आचार्य बालकृष्ण, कथा वाचक रमेश भाई ओझा, मुस्लिम, सिक्ख समुदाय के धर्मगुरू तथा भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। 

हिन्दुस्थान समाचार


 
Top