युगवार्ता

Blog single photo

क्या ‘उजड़ा चमन’ की नकल है ‘बाला’?

28/10/2019

क्या ‘उजड़ा चमन’ की नकल है ‘बाला’?

प्रकाश के रे

नकल कर बनायी गयी हर फिल्म ‘शोले’ नहीं हो जाती तथा किसी अन्य भाषा की सफल फिल्म जरूरी नहीं कि हिंदी दर्शकों को भी आकर्षित करे।

दुनिया में सबसे ज्यादा फिल्में बनाने के लिए विख्यात मुंबई फिल्म उद्योग कहानी और कथानक की चोरी करने के लिए भी कुख्यात है। हॉलीवुड समेत अन्य देशों की फिल्मों की नकल करना एक तरह से चलन ही बन गया है। अक्सर ऐसी बातें सुनने में आती हैं कि हमारी फिल्मी दुनिया में ऐसे निर्माता-निर्देशक हैं, जो लेखकों को एक या अनेक फिल्मों की डीवीडी देकर स्क्रिप्ट तैयार करने को कहते हैं। ऐसे भी मामले आते रहते हैं कि किसी लेखक द्वारा सुनायी गयी कोई कहानी कुछ समय बाद बिना उसकी जानकारी के परदे पर आ जाती है। दृश्यों की चोरी और पोस्टर की नकल तो इतनी आम बात है कि अब इन पर चर्चा भी नहीं होती।
बहरहाल, नवंबर के पहले ह़μते में आनेवाली दो फिल्मों के विवाद से कहानी या कहानी के बुनियादी आइडिया और स्क्रिप्ट के कॉपीराइट और नकल के मुद्दे पर बहस छिड़ी है। ‘उजड़ा चमन’ फिल्म से निर्देशन में अपने करियर की शुरूआत कर रहे अभिषेक पाठक ने आरोप लगाया है कि अमर कौशिक द्वारा निर्देशित ‘बाला’ की कहानी और स्क्रिप्ट उनकी फिल्म की नकल है। पाठक की फिल्म आठ नवम्बर को प्रदर्शित होगी। ‘बाला’ के रिलीज की तारीख 22 नवम्बर से बदलकर पहले 15 नवम्बर की गयी और अब उसे सात नवम्बर को प्रदर्शित किया जाएगा। दोनों फिल्मों के ट्रेलर जारी हो चुके हैं और उन्हें देखकर कोई भी कह सकता है कि इनमें बड़े पैमाने पर समानता है। दोनों फिल्में एक ऐसे युवा की कहानी कहती हैं, जिसके सिर के बाल तेजी से गिर रहे हैं और वह गंजा होता जाता है।
गंजेपन को लेकर सामाजिक पूर्वाग्रहों को दर्शाती फिल्में अपने अपने किरदार की बेचैनी और परेशानी का बयान करती हैं। ‘बाला’ में गंजे युवक की भूमिका आयुष्मान खुराना ने और ‘उजड़ा चमन’ में सन्नी सिंह ने निभायी है। अभिषेक पाठक का कहना है कि उनकी फिल्म 2017 की कन्नड़ फिल्म ‘ओंदू मोत्तेया काथे’ का आधिकारिक रीमेक है और इसकी अनुमति पिछले साल ले ली गयी थी। वे इस मामले को अदालत में ले जाने का मन बना चुके हैं। दूसरी तरफ ‘बाला’ के निर्माता दिनेश विजान ने दावा किया है कि वे लोग ‘उजड़ा चमन’ से पहले से इस कहानी पर काम कर रहे हैं और उनकी कहानी मौलिक है। ‘बाला’ फिल्म के ऊपर पहले भी दो शिकायतें की जा चुकी हैं।
शादी में जरूर आना’ के सहायक निर्देशक कमल कांत ने आरोप लगाया है कि ‘विग’ नामक उनकी फिल्म के स्क्रिप्ट से उड़ाकर ‘बाला’ की कहानी बनायी गयी है। निर्देशक प्रवीण मोचाले ने भी इस फिल्म के लेखक नीरेन भट्ट और निमार्ता पर उनके स्क्रिप्ट से कहानी चुराने का आरोप लगाया है। मोचाले की 2017 की फिल्म ‘वाकिंग विथ द विंड’ को तीन राष्ट्रीय पुरस्कार मिले थे। अब देखना है कि रिलीज से पहले दोनों फिल्मों के निर्माता और निर्देशक अदालत में क्या कहते हैं और अदालत क्या फैसला देती है। अक्सर ऐसे मामलों का निपटारा अदालत से बाहर आपसी समझदारी और वित्तीय लेन-देन से हो जाता है, लेकिन यहां दो तैयार फिल्मों का मसला है। यदि कोई फिल्म रूकती है, तो निर्माताओं को भारी घाटा हो सकता है। यह भी एक एक दिलचस्प बात है कि ऐसे विवाद जब भी आते हैं, तो हमारी फिल्म इंडस्ट्री चुप्पी साध लेती है। कुछ ही विवादों का निपटारा व्यावसाय से जुड़ी संस्थाएं कर पाती हैं।
नकल और कॉपीराइट के उल्लंघन के सवाल पर हमारे निर्देशकों और लेखकों को अधिक मुखर होना चाहिए। एक अफसोसनाक पहलू यह भी है कि अमेरिका और यूरोप की तुलना में हमारे यहां इस मुद्दे से जुड़े कानून बहुत स्पष्ट नहीं हैं। किसी कहानी के आइडिया से नया कुछ निकालना, किसी फिल्म से प्रेरणा लेना तथा किसी दृश्य को नए ढंग से फिल्माना आदि ऐसे आयाम हैं, जिनके ऊपर अदालतों और फिल्मकारों को ध्यान देना चाहिए। नकल कर बनायी गयी हर फिल्म ‘शोले’ नहीं हो जाती तथा किसी अन्य भाषा की सफल फिल्म जरूरी नहीं कि हिंदी दर्शकों को भी आकर्षित करे। कहा जाता है कि नकल के लिए भी अक़्ल की जरूरत होती है। यदि हमारे फिल्म उद्योग में अक़्ल है, तो फिर नकल क्या करना, रचनात्मकता का प्रदर्शन किया जाना चाहिए। अनुमति लेकर और उचित भुगतान कर भी दृश्यों या कहानी के हिस्सों का इस्तेमाल हो सकता है।


 
Top