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जेठमलानी से बड़ा उनका नाम

14/10/2019

जेठमलानी से बड़ा उनका नाम


क्सर सुर्खियों में रहने वाले राम जेठमलानी सिर्फ बड़े और नामी वकील ही नहीं थे, बल्कि एक सक्रिय राजनीतिक नेता भी थे। भाजपा जब बनी तो वे उसके उन नेताओं में से थे,जो अगली कतार में देखे जाते थे। भाजपा के नेता द्वय अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी से उनका गहरा और लंबा नाता था। वे मिजाज से भाजपा के करीब थे लेकिन राजनीतिक परिस्थितियों के वश होकर अपने अस्तित्व के लिए उन्होंने आखिरी दिनों में राजद से नाता जोड़ लिया था। उसके ही वे राज्यसभा में सांसद थे। वकालत के पेशे में वे बहुत पहले आ गये थे। उनका जन्म 14 सितंबर 1923 को हुआ था। जहां वे जन्मे थे,वह सिंध का शिकारपुर अब पाकिस्तान में है। वहीं उनकी पढ़ाई हुई थी। 17 साल की उम्र में ही उन्होंने करांची के साहनी लॉ कॉलेज से एलएलबी की डिग्री प्राप्त कर ली।

वकालत के लिए तब इक्कीस साल की उम्र जरूरी थी। इस बाधा को उन्होंने कैसे पार किया, इसकी एक कहानी है। उन्हें विशेष अनुमति मिली। इस तरह वकालत शुरू की। साथ-साथ करांची के एससी साहनी लॉ कॉलेज से ही एएलएम की डिग्री प्राप्त की। उन्होंने दो शादियां की थी। उन दोनों पत्नियों से उन्हें चार बच्चे हुए. रानी, शोभा, महेश और जनक। रानी जेठमलानी का बहुत दिनों पहले निधन हो गया था। बेटे महेश जेठमलानी मुंबई में वकालत करते हैं। वकालत के साथ-साथ राम जेठमलानी ने सिंध में अध्यापन का भी दायित्व निभाया। उन्होंने अपने मित्र एके ब्रोही के साथ एक लॉ फर्म बनाई थी। भारत विभाजन के दौर में वे करांची से मुंबई आए, जहां उन्होंने गवर्नमेंट लॉ कॉलेज में अध्यापन कार्य किया। अमेरिका के डेटरॉयट स्थित वायनी स्टेट यूनिवर्सिटी में भी कुछ दिनों तक पढ़ाया। सन 1959 का साल वकील राम जेठमलानी के लिए कुछ खास रहा।

नानावती बनाम महाराष्ट्र सरकार के मुकदमे में उन्हें के एम नानावती को सजा दिलाने में सफलता मिली। इससे वे नाम कमा सके। उन दिनों नानावती केस बहुत चर्चित था। नवसेना के अधिकारी के एम नानावती पर अपनी पत्नी के प्रेमी की हत्या का आरोप था,जो साबित हुआ। उस मुकदमे में राम जेठमलानी ने दलीलें तैयार करने में बड़ी भूमिका निभाई। उसी से क्रिमिनल वकील के बतौर उनका नाम हुआ। उसके बाद तो उन्हें हर बार ऐसे मुकदमे मिले जो बहुत चर्चित रहे। इंदिरा गांधी के एक हत्यारे का केस उन्होंने लड़ा। तस्कर हाजी मस्तान और घोटालेबाज हर्षद मेहता के वकील भी वही बने। राम जेठमलानी ने लंबी जिंदगी पाई। इसमें करीब आठ दशक तक वे बड़े वकील के रूप में चर्चित रहे। जेसिका लाल हत्याकांड, राजीव गांधी हत्याकांड, चारा घोटाला और टूजी मामले में वकील बने। ये कुछ ऐसे मुकदमें है,जिनसे राम जेठमलानी की एक खास पहचान बन गई।

कुछ मामले ऐसे भी हैं, जिन्हें उन्होंने शुरू में अपने हाथ में लिया, लेकिन जब देखा कि उनके कई मित्र इसमें नप जाएंगे तो उस मुकदमे से हाथ खींच लिया। ऐसा ही एक मामला 1993 का है। उसे हवाला कांड के रूप में जाना जाता है। जनसत्ता अखबार में खबर छपने के बाद राम जेठमलानी ने उसे अपने हाथ में लिया और सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर करने की सूचना मीडिया को दी। फिर अचानक वे विदेश चले गए। कुछ दिनों बाद उस मामले से उन्होंने किनारा कर लिया। राजनीतिक सक्रियता का दूसरा नाम राम जेठमलानी था। बोफोर्स सौदे में रिश्वत लेने के आरोप में जब राजीव गांधी फंसे तो उस अभियान में जो लोग बढ़ चढ़कर राजीव गांधी को घेर रहे थे,उनमें राम जेठमलानी खासे चर्चित थे। रोज एक सवाल पूछकर उन्होंने राजीव गांधी की नींद हराम कर दी थी। विश्वनाथ प्रताप सिंह को कानूनी मदद पहुंचाने के लिए उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस में अपना एक दμतर खोला था।

जनता दल के सांसदों को विश्वनाथ प्रताप सिंह के लिए समझाने में उनकी भूमिका थी। उसी क्रम में लालू प्रसाद से उनका संबंध बना और चारा घोटाले में वे उनके वकील भी बने। जनता दल के विभाजन के समय राम जेठमलानी ने चंद्रशेखर के निवास पर धरना दिया। चंद्रशेखर समर्थकों ने उन्हें वहां से हटाना चाहा तो जो तकरार हुई, उसमें वे घायल भी हुए। राजनीतिक अस्थिरता के दौर में राम जेठमलानी हर चुनाव में एक राजनीतिक दल बनाते थे। हालांकि उस दल को कभी कोई सफलता नहीं मिली। जनता पार्टी ने उन्हें 1977 और 1980 में लोकसभा में पहुंचाया था। उसके बाद वे विभिन्न दलों से राज्यसभा में पहुंचते रहे। भारत के कानून मंत्री बनने का उनका सपना अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में पूरा हुआ लेकिन उस दौर में उन्हें मंत्रिमंडल छोड़ना पड़ा। उसकी प्रतिक्रिया में वे वाजपेयी के खिलाफ लखनऊ लोकसभा क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार बने। राम जेठमलानी वकील, राजनेता के रूप में और अपने मुखर बयानों के लिए याद किये जाते रहेंगे।


 
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