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क्यों हुआ एवरेस्ट पर ट्रैफिक जाम

02/07/2019

क्यों हुआ एवरेस्ट पर ट्रैफिक जाम


एवरेस्ट की चोटियों पर पर्वतारोही लगातार जान गंवा रहे हैं। भीड़ इतनी बढ़ गई है कि एवरेस्ट की चढ़ाई करने वाले रास्ते में लोग फंस गए हैं। महानगरों और मेट्रो सिटी में गाड़ियों के लंबे जाम की खबरे पुरानी हो चुकी हैं। अब एवरेस्ट पर लंबे जाम की तस्वीरे साझा होना शुरु हो गईं। स्थिति यह है कि हिमालय का पारिस्थितिकी तंत्र भी बिगड़ने लगा है। जिससे कई पर्यावरणविद और पर्वतारोही चिंतित हैं। चार बार एवरेस्ट पर चढ़ने वाली भारतीय पर्वतारोही अनिता कुंडू कहती हैं, ‘हिमालय पर लगी लाईनों की जो फोटो वायरल हो रही है वो 22 मई 2019 की है। मैं 21 तारीख को चढ़ाई करने निकली थी। बेस कैंप में भारी भीड़ थी। बड़ी संख्या में लोग जमा थे। भीड़ का एक बड़ा कारण पेशेवर पर्वतारोहियों की संख्या का कम होना है। ये जो भीड़ दिखती है उसमें ज्यादातर पहाड़ के रोमांच से अभिभूत होकर यहां तक खिंचे चले आते हैं। इनको पहाड़ की उस उंचाई और उससे आने वाली समस्याओं का अंदाजा भी नहीं होता। ऐसे कुछ लोग आगे जाने में असमर्थ हो जाते हैं।

एवरेस्ट पर चढ़ाई के दौरान होने वाली मौतों की वजह न तो पर्वतारोहियों की संख्या और न ही बिगड़ता मौसम है। इसके दो बड़े कारण हैं। पहला, ट्रैवल कंपनियां ऐसे पर्वतारोहियों को भेज रही हैं जो ट्रैकिंग के लिए पूरी तरह से प्रशिक्षित नहीं हैं। दूसरा, पर्वतारोहियों की संख्या नियंत्रित करने के लिए नेपाल सरकार ने कोई नीति नहीं बनाई है।

कुछ की मौत भी हो जाती है। इसी वजह से ट्रैक पूरी तरह से जाम हो जाता है। क्योंकि ऊपर जाने का रास्ता एक ही है।’ सोशल मीडिया के दौर में जब सभी तरह की खबरे हम तक आसानी से पहुंचने लगी हैं तो लगता है कि ऐसा पहली बार हुआ है। जबकि सच्चाई ये है कि ये कोई पहली घटना नहीं है। एवरेस्ट पर चढ़ाई के दौरान पिछली एक सदी में दो सौ से भी ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। इन सभी लाशों को पहाड़ अपने आप में यूं ही समेटे हुए है। साल 1996 का था । इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस, के तीन जवान विश्व की सबसे उंची चोटी फतह करने निकले थे। शायद वो ऐसा कर भी चुके थे। इसके पहले कि वो दुनिया के सामने आकर अपनी जीत की कहानी बता पाते वो दुर्घटना के शिकार हो गये। ये तीनों जवान हमेशा-हमेशा के लिए माउंट एवरेस्ट पहाड़ियों के होकर रह गये । आज भी उनके अवशेष वहीं मौजूद हैं। इन तीनों में से एक थे सेवांग पलजोर। जिनकी कहानी अमेरिकी पर्वतारोही और लेखक जॉन क्रॉकर ने अपनी किताब ‘इनटू थिन एयर’ के जÞरिए मशहूर कर दी। लेकिन न जाने कितने सेवांग पलजोर आज भी इन्ही पहाड़ों में दμन हैं जो एक नया इतिहास रचने के उद्देश्य से यहां पहुंचे थे।

नेहरू पर्वातारोहण संस्थान के पूर्व प्रिंसिपल (नीम) कर्नल अजय कोठियाल कहते हैं, ‘आज बड़ी संख्या में लोग सिर्फ अपना नाम करने के लिए पहाड़ पर जा रहे हैं। लोगों को बस वहां पहुंचना है। यहां जाने के लिए बड़े पैमाने पर पैसों की भी जरूरत होती है। जिसकी व्यवस्था लोग अपनी जमीन बेचकर और प्लाट बेचकर कर रहे हैं। यही वजह है कि पर्वतारोहियों की संख्या में अचानक बढ़ोत्तरी आ गई है। इस भीड़ का एक और कारण है। कम समय के लिए यहां चढ़ाई के लिए रास्ते खुलते हैं । जबकि पहाड़ पर चढ़ने वालों की संख्या ज्यादा होती है। ऐसे में भीड़ जुटना स्वाभाविक है।’ एक रिपोर्ट के मुताबिक, एवरेस्ट पर चढ़ाई के दौरान होने वाली मौतों की वजह न तो पर्वतारोहियों की संख्या और न ही बिगड़ता मौसम है। इसके दो बड़े कारण हैं। पहला, ट्रैवल कंपनियां ऐसे पर्वतारोहियों को भेज रही हैं जो ट्रैकिंग के लिए पूरी तरह से प्रशिक्षित नहीं हैं। दूसरा, पर्वतारोहियों की संख्या नियंत्रित करने के लिए नेपाल सरकार ने कोई नीति नहीं बनाई है। सरकारी नीतियां न होने के कारण और गैर-अनुभवी लोगों की भीड़ पहाड़ों पर अफरा-तफरी का माहौल बना रही है।

एवरेस्ट की चोटी से निकला 11 टन कचरा

नेपाल सरकार ने 27 मई को माउंट एवरेस्ट पर सफाई अभियान पूरा कर लिया। जिसमें उसने लगभग 11 टन कचरा साफ किया है। जो दशकों से चोटी पर पड़ा हुआ था। यह सफाई अभियान अप्रैल में शुरू किया गया था। इसमें ऊंची चढ़ाई में माहिर 12 शेरपाओं की एक विशिष्ट टीम शामिल थी। इस टीम ने एक महीने से अधिक समय में पूरे कचरे को हटाया। नेपाल के पर्यटन विभाग के महानिदेशक डांडू राज घिमिरे ने कहा, ‘कचरे के अलावा उन्होंने माउंट एवरेस्ट के ऊंचाई पर बने कैंप से चार शव भी बरामद किए, जिन्हें पिछले सप्ताह काठमांडू लाया गया।’ घिमिरे के मुताबिक, सफाई अभियान में लगभग 2.30 करोड़ रुपए की लागत आई है। उन्होंने कहा कि चीन ने भी दुनिया के सबसे ऊंची चोटी के उत्तरी हिस्से की सफाई के लिए इसी तरह का अभियान लांच किया है।

काठमांडू से लौटेने के बाद चिली के पर्वतारोही जुआन पाब्लो मोहर ने लिखा, ‘जिन लोगों को पर्वतारोहण के बारे में कोई जानकारी नहीं है, जो कभी पहाड़ पर नहीं चढ़े, वह लोग आ रहे हैं और एवरेस्ट की चोटी पर चढ़ने की कोशिश कर रहे हैं।’ अनीता कुंडू गैर-अनुभवी पर्वतारोहियों को इस मामले में सबसे बड़ी समस्या मानती हैं। वह कहती हैं, ‘पहाड़ का अपना कानून और सीमाएं हैं। नये और नौसिखिये लोग इस कानून से पूरी तरह अपरिचित हैं। पहाड़ पर चढ़ते समय अपनी भावनाओं को किनारे रखकर, निर्देशों पर ध्यान देना होता है। घटनाएं वहीं घटती हैं जहां जिद होती है। पहाड़ कहीं नहीं जाने वाले वो आज और कल वहीं रहेगें। इसलिए जरूरी है कि पहले अपने जीवन को बचाया जाये। उन निर्देशों को संजीदगी से माना जाए जो विशेषज्ञों की तरफ से निर्धारित किये गये हैं।’ एवरेस्ट पर बढ़ती भीड़ का एक कारण लालच भी बताया जा रहा है। नेपाल सरकार ने इस मौसम में रिकॉर्ड 381 परमिट जारी किए हैं। एक परमिट के लिए सरकार 11 हजार डॉलर लेती है।

भारतीय रुपये के हिसाब से देखा जाए तो प्रति व्यक्ति लगभग सात लाख रूपये उसे मिलते हैं। यह सरकार के राजस्व का बड़ा स्त्रोत है। वहीं चीन की बात की जाए तो यहां नियम बेहद कड़े हैं। परमिट शुल्क भी ज्यादा देनी होती है। जानकारी के मुताबिक चीन अपने यहां अधिकतम सौ से डेढ़ सौ तक परमिट देता है। इस वजह से ज्यादातर लोग नेपाल की तरफ से चढ़ाई करना पसंद करते हैं। जिसके कई खतरे हैं। सरलता से परमिट मिलने की वजह से बड़े पैमाने पर गैर-अनुभवी लोग पहाड़ पर पहुंच रहे हैं। इन लोगों को सावधानियों के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होती है। पर्वतारोही रॉबिन हानेस ने इंस्टाग्राम पर पहाड़ पर बढ़ती भीड़ का जिक्र किया था। हांलाकि इस पोस्ट के साझा होने के कुछ दिन बाद ही रॉबिन हानेस की मौत हो गई। रॉबिन की मौत 25 मई को 8600 मीटर पर एल्टीट्यूड सिकनेस के कारण हुई थी। रॉबिन ने पोस्ट में लिखा था कि ‘कैसे एक भारतीय और आइरिश पर्वतारोही की मौत हुई थी।

700 लोग चोटी पर पहुंचने की राह देख रहे हैं। पोस्ट के मुताबिक, एक ही रूट होने के कारण लोगों को कतार में इंतजार करना पड़ रहा था।’ आठ जून को मानसून केरल तट पहुंच चुका है। अब वह धीरे-धीरे पूरे भारत में फैल जाएगा। मानसून का जिक्र यहां इसलिए क्योंकि मानसून सीजन शुरू होते ही एवरेस्ट आरोहण का मुख्य सीजन समाप्त होता है। मानसून खत्म होने के बाद दुनिया के पर्वतारोही संसार की इस सबसे ऊंची चोटी पर विजय की कोशिशों में फिर से जुट जाएंगे। नेपाल सरकार ने 27 मई को एवरेस्ट की सफाई में कुल 11 टन कचरा साफ किया है। जो हाल के दिनों में सर्वाधिक है। इस सफाई के दौरान कई शव भी मिले हैं। ये स्थिति एवरेस्ट के भयावह भविष्य की छोटी सी फुटेज मात्र है अगर समय रहते नहीं चेते तो ये फुटेज एक बड़ी फिल्म में तब्दील हो सकती है।



 
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