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देश को समृद्धि की ओर ले जाने वाला संकल्प पत्र

06/08/2019

देश को समृद्धि की ओर ले जाने वाला संकल्प पत्र


जट देश का आर्थिक उत्सव है और यह उसकी दिशा तथा दशा तय करता है। आम चुनाव में प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी की शानदार विजय के बाद यह लाजिमी था कि उनकी सरकार एक समावेशी और विकासोन्मुख बजट पेश करे। भारत की पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यह काम बखूबी पूरा किया। उन्होंने अपने पहले बजट भाषण में सभी बिन्दुओं पर प्रकाश डाला और भारत को 5 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के पीएम मोदी के वादे को पूरा करने के लिए बड़े कदमों की घोषणा भी की। उन्होंने कहा भी कि गांव, गरीब और किसान हमारी योजनाओं के केन्द्र में हैं। यह बात प्रासंगिक भी है क्योंकि आज भी इस देश की 70 प्रतिशत जनता गांवों में रहती है और किसान देश का पेट भरते हैं।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का सवा दो घंटे का बजट भाषण ऐतिहासिक तो नहीं कहा जा सकता लेकिन काफी आश्वस्त करने वाला था और इसकी प्रशंसा भी हुई।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का सवा दो घंटे का यह बजट भाषण ऐतिहासिक तो नहीं कहा जा सकता लेकिन काफी आश्वस्त करने वाला था और इसकी प्रशंसा भी हुई। इस समय अर्थव्यवस्था को गति दिलाने के लिए जरूरी है कि बाजार में धन का निवेश हो और यह काम सरकार तथा निजी क्षेत्र के मिले-जुले प्रयासों से ही हो सकता है। इसी का ध्यान करते हुए उन्होंने इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास पर जोर दिया है। देश में सवा लाख किलोमीटर सड़कें या तो बनाई जाएंगी या फिर उन्हें परिष्कृत किया जाएगा। इसी तरह राजमार्गों, रेलवे, क्षेत्रीय हवाई अड्डों के विकास के लिए 5000 करोड़ रुपये अतिरिक्त राशि दी गई है। इस बार जलमार्गों के विकास पर भी काफी जोर है और उसे माल ढुलाई तथा परिवहन का वैकल्पिक माध्यम बनाया जा रहा है। यह काफी किफायती तथा सुगम होगा जिससे राजमार्गों पर ट्रैफिक कम करने में मदद मिलेगी। इन सभी के लिए पीपीपी मॉडल को तरजीह दी गई है। सरकार और निजी क्षेत्र की भागीदारी से ही देश में प्रगति होगी, यह बात आईने की तरह साफ है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि देश में निजी निवेश की भारी जरूरत है क्योंकि इससे ही बाजार में तरलता आएगी और रोजगार का सृजन होगा।

गांव, गरीब और किसान वाली अपनी बात को पुख्ता करने के लिए वित्त मंत्री ने 2022 तक गांव-गांव में रसोई गैस कनेक्शन, गरीबों को पक्के मकान, सभी को शौचालय, पेय जल की सुविधा और बिजली की अबाध आपूर्ति की बात की। 10,000 सदस्यता वाले एक किसान उपभोक्ता संगठनों को बनाने की भी बात कही गई है ताकि किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो। इसी तरह ग्रामीण उद्योगों को बढ़ावा देने का भी प्रावधान किया गया है। गांवों की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करके सरकार किसानों तथा ग्रामीणों की स्थिति सुधारना चाहती है। सभी किसानों को सालाना 6,000 रुपये देने की बात पर मोदी सरकार अडिग रही और उसकी विधिवत घोषणा भी की। किसानों को नकद सहायता देने से ही इस बार चुनाव में पार्टी को अभूतपूर्व सफलता मिली है। स्टार्ट अप नरेन्द्र मोदी का सपना है। उनका मानना है कि देश में लाखों स्टार्ट अप शुरू करके न केवल अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान की जा सकती है बल्कि करोड़ों लोगों को रोजगार दिया जा सकता है। पीएम मोदी का मानना है कि रोजगार के सृजन में इसका बहुत बड़ा योगदान रहा है। इसलिए इस बजट में उनके लिए कई प्रोत्साहनों की घोषणा की गई है। एक स्टार्ट अप चैनल की भी घोषणा की गई है, जो इन उद्यमियों को मार्ग दिखाएगा और उनकी सहायता करेगा। इतना ही नहीं, स्टार्ट अप को आय कर सहित किसी तरह की सरकारी जांच से मुक्त रखा गया है। उनके लिए ई.वेरिफिकेशन की व्यवस्था भी की गई है।

बैंकों की सेहत को मजबूत करने के लिए वित्तमंत्री ने कई उपायों की घोषणा की और उन्हें सशक्त होने का जनता को भरोसा दिलाया। बजट में बैंकिंग और फाइनेंस सेक्टर को मजबूती प्रदान करने के लिए कई बड़े कदमों की घोषणा की गई है। वित्त मंत्री ने कहा कि बैंकिंग सेक्टर पर छाये बादल छंट रहे हैं। बैंकों ने अपनी फंसी हुई रकम में से 4 लाख करोड़ रुपये की वसूली पिछले साल कर ली है। इससे बैंकों का एनपीए एक लाख करोड़ रुपये घट गया है। सरकार ने सरकारी बैंकों के पुनर्गठन का काम सफलता पूर्वक किया है। उनके पुनर्पूंजीकरण के लिए 70 हजार करोड़ रुपये दिए गए हैं। वित्त मंत्री ने गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) की प्रशंसा की और उनके लिए भी कुछ कदमों की घोषणा की। उनके लिए अब धन उगाहना आसान हो जाएगा क्योंकि कुछ कानूनी अड़चनों को हटा दिया गया है। वित्तीय सेक्टर को मजबूत करके सरकार अर्थव्यवस्था को मजूबती प्रदान करेगी। बजट में विदेशी निवेश यानी एफडीआई को बढ़ावा देने की बात कही गई। भारत ने इज आॅफ डूइंग बिजनेस में अब अपनी स्थिति बेहतर बना ली है। उसका स्थान दुनिया में 77वां हो गया है। पीएम मोदी का प्रयास है कि इसे 50 के नीचे लाया जाए ताकि ज्यादा से ज्यादा विदेशी निवेश हो सके। इस समय कई विदेशी कंपनियां चीन से दूर हो रही हैं।

यह भारत के लिए अच्छा मौका है। एफडीआई को बढ़ावा देने के लिए वित्त मंत्री ने सिविल एविएशन और मीडिया के क्षेत्र में उन्हें अधिक भागीदारी की छूट दी है। इससे एयर इंडिया के विनिवेश की संभावना बढ़ेगी। जहां तक विनिवेश की बात है, वित्त मंत्री ने इसका लक्ष्य 1,05,000 करोड़ रुपये का रखा है। इससे बजट के घाटे को पूरा किया जा सकेगा। इसके अलावा सरकार 50 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सेदारी निजी निवेशकों को देने के लिए तैयार हो गई है। एफडीआई को बढ़ावा देने के लिए ही वित्त मंत्री ने ढेर सारे श्रम कानूनों को चार कोड में बांधने की घोषणा की है। विदेशी कंपनियां भारत के श्रम कानूनों से बहुत ही घबराती हैं और उन्हें परेशानी होती है। हमारे श्रम कानून बहुत पुराने हैं और उनमें बदलाव की जरूरत भी है। निर्मला सीतारमण ने राजस्व घाटे को पूरा करने के लिए विदेशी बांड का सहारा लेने की भी बात कही है। इसके अलावा उन्होंने राजस्व घाटे को 3.3 प्रतिशत तक रखने की भी बात की है। यह इसलिए जरूरी है कि अगर यहां लक्ष्मण रेखा लांघी गई तो मुद्रास्फीति का खतरा मंडराने लगेगा।

भारत विदेशों से 10 अरब डॉलर उधार लेने की योजना बना रहा है जिससे धन का प्रवाह बढ़ेगा और सरकरा पर दबाव कम होगा। मोदी सरकार-2 के इस बजट से लोगों में संतोष दिखा लेकिन पेट्रोल-डीजल के दामों में लगभग ढ़ाई रुपये की बढ़ोतरी से नाराजगी बढ़ी। यह कदम पहले की सरकारें उठाया करती थीं, जब उन्हें राजस्व उगाहने के लिए कोई और रास्ता नहीं दिखाई देता था। इसका सबसे बड़ा दुष्परिणाम ट्रांसपोर्ट सेक्टर को भुगतना पड़ेगा। भारत में माल ढुलाई की दरें बहुत ज्यादा हैं और इनसे सामान महंगे हो जाते हैं। पुरातनवादी अर्थव्यवस्था की तरह ही इस बजट में भी धनी लोगों पर और टैक्स लगाया गया है जिसे सरचार्ज का नाम दिया गया है। यह आर्थिक कम राजनीतिक कदम ज्यादा लगता है। इसके तहत साल में दो करोड़ रुपये से ज्यादा कमाने वाले लोगों को कुल टैक्स योग्य आय का 3 प्रतिशत और 5 करोड़ रुपये से ज्यादा कमाने वालों को 7 प्रतिशत सरचार्ज देना होगा। लेकिन वित्त मंत्री ने सोने तथा अन्य कीमती धातुओं पर कस्ट्म ड्यूटी बढ़ाकर अनजाने में सोने की तस्करी को बढ़ावा देने का काम किया है।

भारत में सोने के प्रति लोगों में बेहद आकर्षण है और इसलिए यह दुनिया में सबसे ज्यादा सोना इम्पोर्ट करने वाला देश है। यहां सोना महंगा होने से जाहिर है इसकी तस्करी बढ़ेगी। अभी इस पर 10 प्रतिशत टैक्स है और यह बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत किया गया है। जीएसटी लगाने के बाद यह 15 प्रतिशत तक जा पहुंचा है। इससे सोना वाकई महंगा हो गया है और आभूषण निर्माताओं तथा कारोबारियों को कठिनाई का सामना करना पड़ेगा। इस समय देश में थाईलैंड, दुबई, नेपाल वगैरह देशों से सोने की तस्करी हो रही है लेकिन भारत और उन देशों की दरों में काफी अंतर हो गया है। इस बारे में वित्त मंत्री को फिर से विचार करना चाहिए। एक और प्रावधान जो बिल्डरों और रियल एस्टेट निर्माताओं को अखरेगा वह है कि देश को डिजिटल बनाने की दिशा में ले जाने के लिए बैंकों से निकाले जाने वाली नकदी पर टैक्स लगाया जाना। अब साल भर में एक करोड़ रुपये की निकासी करने पर दो प्रतिशत का टैक्स लगेगा। ऐसा देश में नकदी के लेन-देन को हतोत्साहित करने के लिए किया जा रहा है। लेकिन इससे बिल्डरों तथा रियल एस्टेट के खिलाड़यिों को चोट पहुंचेगी क्योंकि वह ऐसा व्यवसाय है जिसमें नकदी लेन-देन आम बात है।

बहुत से आलोचकों ने कहा कि इस बजट में आंकड़े नहीं बताए गए हैं। लेकिन वित्त मंत्री ने बजट के दस्तावेज में वे सभी आंकड़े मुहैया कराएं हैं, जो जरूरी हैं। बजट वैसे भी आंकड़ों का खेल मात्र नहीं है बल्कि एक व्याख्या है, अर्थव्यवस्था को आगे ले जाने के लिए। अपने लंबे भाषण में यह वित्त मंत्री ने अर्थव्यवस्था के सभी पहलुओं को छूने की कोशिश की है जो प्रासंगिक हैं। बजट है तो जाहिर है कि आलोचक कुछ न कुछ कहेंगे जरूर। वित्त मंत्री का यह बजट संभावनाओं से भरपूर है लेकिन इसे कैसे कार्यान्वित किया जाएगा, इस बारे में कोई प्रकाश नहीं डाला गया है। यानी कई विषयों का कोई रोडमैप नहीं है। इसमें रोजगार बढ़ाने के ठोस उपायों की चर्चा भी नहीं है। यह सरकार के लिए बहुत बड़ा सिरदर्द होने जा रहा है। शेयर बाजारों के लिए इस बजट में कुछ नहीं था, सो वो गिर गए। लेकिन सच यह भी है कि अभी सूचकांक कुछ ज्यादा ही ऊपर चल रहा है। अब कंपनियों के परिणाम आने तथा बाजार में मांग बढ़ने पर ही इसमें तेजी आयेगी।


 
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