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अफवाहों के बीच जागरुकता जरूरी

25/03/2020

लालजी जायसवाल

कोविड-19 को लेकर अफवाहों के मैसेज सोशल मीडिया पर धड़ल्ले से पोस्ट किए जा रहे हैं। कोरोना वायरस पूरी मानवती के लिए भयावह खतरा बन चुका है। डर की स्थिति में लोगों के मन में इसे लेकर कई तरह के भ्रम भी पैदा हो गए हैं। जिसका पूरा दारोमदार सोशल मीडिया को जाता है क्योंकि सोशल साइट अफवाहों का गढ़ बनकर उभरा है। कोरोना वायरस के मजाक और अफवाह के बढ़ते चलन के कारण सोशल मीडिया पुनः अपना चरित्र धूमिल करता दिख रहा है। कोविड-19 का वैक्सीन तैयार नहीं किया जा सका है, वास्तविकता यही है कि यह एक समय साध्य प्रक्रिया है। लेकिन जरूरत इस बात की है कि हम कितना स्वयं से बचाव कर पा रहे हैं। इस वायरस का इलाज "बचाव ही उपचार" जैसा ही है। लोगों से जितना कम मेल-मिलाप करेंगे, इसका संकट उतना कम होता जायेगा और एकदिन ऐसा आयेगा जब यह वायरस निस्तेज हो चुका होगा लेकिन तबतक हमें दिशा-निर्देशों और अपने मौलिक कर्तव्यों का पालन करना ही होगा। स्वयं के साथ-साथ दूसरों को भी अफवाहों का शिकार होने से बचाना होगा।

आज देशभर में लगभग 116 करोड़ हैंडसेट उपलब्ध है। भारत की 1.30 अरब की जनसंख्या में लगभग 70 करोड़ लोगों के पास स्मार्टफोन है, जिनमें से आधी जनसंख्या सोशल मीडिया पर सक्रिय है। इनमें से कुछ तो जन जागरण में लगे हैं तो ऐसा भी वर्ग है जो इसका गलत उपयोग कर दुष्प्रचार करते नजर आ रहे हैं। लोगों में भय का माहौल बनाने के बाबत झूठे मैसेज तैयार कर उन्हे वायरल करना हो या वीडियो बनाकर कोरोना का फर्जी उपचार बताना हो, जनमानस में गलत संदेश को प्रतिबिंबित करते हों पूर्णरूपेण अपराध की श्रेणी में आते हैं क्योंकि अगर किसी को जागरूक न किया जाए तो उन्हे अफवाहों का शिकार बनाने का कार्य भी नहीं किया जाना चाहिए। आज कोविड-19 को लेकर अनेक व्हाट्सएप मैसेज फार्वर्ड किए जा रहे हैं, जैसे मैसेज फार्वर्ड करना हमारा मूल कर्तव्य-सा बन गया हो, भले ही वो मैसेज लोगों के लिए भयकारी साबित हो रहा हो। साथ ही वायरस के उपचार के बाबत तमाम लोग डॉक्टर और वैद्य की भूमिका भी निभाने से नहीं चूक रहे हैं। वे अनर्गल उपायों का दुष्प्रचार सोशल साइट पर कर लोगों को भ्रमित करने का कार्य बखूबी कर रहे हैं।

बहरहाल, सोशल मीडिया पर ऐसे कई मैसेज घूम रहे हैं, जिनमें दावा किया जाता है कि एंटीबायोटिक से कोरोना का इलाज संभव है। दरअसल किसी भी प्रकार का एंटीबायोटिक कोरोना के लिए असरदार नहीं होता है। एंटीबायोटिक केवल बैक्टेरिया के खिलाफ काम करता है इसलिए कोरोना वायरस पर प्रभावी नहीं है। कोरोना वायरस भले ही घातक है, मगर इसके बचाव और सावधानियां बरतने से इसके संक्रमण से बचा जा सकता है। सोशल मीडिया पर यह भी दावा किया गया है कि बकरे के मीट में कोरोना वायरस पाया गया है। अंडा, चिकन और मछली खाने से तथा मच्छरों के काटने से भी कोरोना वायरस फैलता है- ऐसे सभी दावे पूर्णतः गलत हैं। सोशल साइट पर दावा किया जा रहा है कि गाय का गोबर या गोमूत्र के सेवन से कोरोना वायरस ठीक हो जाता है जबकि यह बात पूरी तरह गलत है क्योंकि अभीतक इस जानलेवा वायरस की दवा नहीं है। साथ में ऐसे मैसेज भी भारी संख्या मे भेजे जा रहे हैं, जिनमें कहा जा रहा है कि लहसुन का सेवन करने से कोरोना वायरस के इंफेक्शन से बचा जा सकता है लेकिन ये बात भी पूरी तरह से गलत है। लहसुन में एंटीमाइक्रोबियल गुण तो होते हैं, लेकिन कोरोना वायरस के लिए यह असरदार नहीं है।

सोशल साइट पर प्रचारित किया जा रहा है कि निमोनिया की वैक्सीन कोरोना वायरस से बचाने में मदद करती है। हाल ही में WHO की रिपोर्ट के अनुसार निमोनिया के लिए दी जाने वाली न्यूमोकॉकल वैक्सीन इस नए और बेहद खतरनाक कोरोना वायरस के खिलाफ सुरक्षा प्रदान नहीं करती है। इस नए वायरस के लिए अनुसंधानकर्ता नई वैक्सीन बनाने की कोशिश में लगे हुए हैं। यह भी दावा किया जा रहा है कि पालतू जानवरों से भी कोरोना वायरस फैल सकता है लेकिन इस बात को जान लेना सबसे जरूरी होगा क्योंकि वायरस के नाम पर जानवरों पर हिंसा करना कानूनन अपराध है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य बनता है कि वो अपने आसपास मौजूद लोगों को इसकी जानकारी दे कि पालतू जानवर जैसे कुत्ते या बिल्ली इस खतरनाक कोरोना वायरस से संक्रमित नहीं होते क्योंकि अभीतक पालतू जानवरों से इंसानों में कोरोना फैलने का कोई मामला सामने नहीं आया है। इस प्रकार सभी को सतर्कता के साथ सभी फर्जी सूचनाओं की पड़ताल करके लोगों को सच से वाकिफ कराना जरूरी है। यह प्रत्येक जागरूक नागरिक का कर्तव्य है कि लोगों को अफवाहों से बचाए और हकीकत से परिचित कराए।

सोशल मीडिया प्लेटफार्मों को चाहिए कि वे अपने यूजर्स को बताएं कि कोरोना वायरस को लेकर किसी प्रकार की गलत जानकारी या फेक न्‍यूज को न तो अपलोड करें और न ही उन्हें शेयर करें। साथ में सरकार को चाहिए कि सोशल मीडिया प्लेटफार्मों से कहे कि वे ऐसे लोगों के अकाउंट को तत्‍काल प्रभाव से हटा दें या डिलीट कर दें जो कोरोना वायरस को लेकर भ्रामक और गलत जानकारियां साझा कर रहे हैं। साथ ही एक और महत्वपूर्ण कार्य सोशल मीडिया प्लेटफार्मों को करना चाहिए कि वे केवल उन्‍हीं जानकारियों को प्रोमोट करें जो पुख्‍ता और सत्‍य हों। सरकार को चाहिए कि कोरोना वायरस को लेकर आम लोगों की सभी शंकाओं का समाधान करने और फेक न्‍यूज के प्रसार को रोकने के लिए कई स्‍तरों पर त्वरित कार्य करे। नागरिकों का का भी कर्तव्य बनता है कि सरकार के प्रयासों को सफल बनाने के लिए सभी को वैसे कार्य नहीं करने चाहिए जिससे देश में अफवाह फैले और लोग पैनिक हों।

(लेखक रिसर्चर हैं।)


 
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