युगवार्ता

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भारी बारिश ने मचाई तबाही

09/10/2019

भारी बारिश ने मचाई तबाही

प्रदेश के हाड़ौती संभाग में पिछले एक महीने की बारिश ने तबाही ला दी है। इस बारिश से न केवल सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त हुआ है, बल्कि खेती को भी भारी नुकसान पहुंचा है।

हाड़ौती संभाग में 25 अगस्त से 15 सितम्बर के बीच जबरदस्त बारिश ऐसी प्रलयकारी बाढ़ ले आई, जिसने पिछले चालीस साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। इसमें 75 से ज्यादा लोग मारे गए और 27 हजार से ज्यादा लोग बेघर हो गए। हाड़ौती में इस बार मानसून ने 15 दिन विलंब से दस्तक दी। लेकिन बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में एक साथ चक्रवात बनने से राजस्थान के दक्षिणी-पूर्वी हिस्से के हाड़ौती संभाग में जमकर बारिश हुई। इस दौर में औसत बारिश 3,208 मिलीमीटर के मुकाबले 5,205.33 एमएम बारिश दर्ज की गई।
इस मूसलाधार बारिश से संभाग के गांधीसागर, राणा प्रताप सागर, जवाहर सागर और कोटा बैराज पानी से लबालब भर गए। नतीजतन उनके गेट खोलने पड़े। कोटा, बारां, बूंदी और झालावाड़ समेत चार जिलों के हाड़ौती संभाग में 20,000 हेक्टेयर से ज्यादा खेत डूब गए और 15 हजार घर बुरी तरह नष्ट हो गए। संभाग के इतिहास में यह पहला मौका है जब शहर और निचली बस्तियां बुरी तरह बाढ़ की चपेट में आ गईं। बाढ़ की चपेट में आने से कोटा का कोई इलाका बचा तो वो नया कोटा था। ‘डायवर्जन चैनल’ की वजह से पानी इसकी सरहदों तक भी नहीं पहुंच सका। पूरे 20 दिनों तक संभाग साहसिक ढंग से चलाए गए राहत और बचाव अभियान का गवाह बना, तो कहीं अधूरे राहत अभियान का दर्द भी भोगा। जिला प्रशासन, सेना और पुलिस ने बाढ़ से घिरे लोगों को निकाला।
अब पानी बाढ़ से घिरे इलाके से नीचे उतरने लगा है। हालात भी सामान्य होने लगे हैं। अब संभाग को नए सिरे से खड़ा करने की मशक्कत की जा रही है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल और आपदा राहत मंत्री ने बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का हवाई सर्वे किया। मुख्यमंत्री गहलोत का मानना है कि इस बबार्दी से उबरने में वक्त लगेगा, लेकिन सब ठीक कर दिया जाएगा। चंबल की तटवर्ती कॉलोनियों में बसे लोगों का कहना है कि चंबल का ऐसा रौद्र रूप पहले नहीं देखा गया। चंबल का उफान इतना भयावह था कि करीब सौ फीट की ऊंचाई लांघ गया। अब जबकि लोग घरों की तरफ लौटने लगे हैं, तो प्रशासन की अव्वल प्राथमिकताओं में है महामारियों की मुस्तैद रोकथाम। जिला कलक्टर मुक्तानंद अग्रवाल मानते हैं कि बाढ़ के साथ आमतौर पर संक्रामक रोगों का फूट पड़ना स्वाभाविक है। इसलिए सभी क्षेत्रों में विशेष मेडिकल सहायता नियंत्रण कक्ष खोल दिए गए हैं।
ऐसे ही अभियान बूंदी, बारां और झालावाड़ जिलों में भी चलाए जा रहे हैं। चिकित्सा दल लोगों के घरों तक भी पहुंच रहे हैं। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शहर-गांव में घूम-घूमकर लोगों का दर्द साझा किया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा राज्यपाल भी कर चुके हैं। उधर, कोटा में अभी भी रह-रहकर बारिश हो रही है। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि गर्म और आर्द्रता वाली हवाओं के संगम के कारण बारिश की गति बनी हुई है। बाढ़ की विभीषिका ने कोटा संभाग के 400 गावों और बस्तियों को अपनी चपेट में लिया है।
अब तक के सर्वेक्षण के अनुसार 50 करोड़ से ज्यादा सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान हो चुका है। इसके अलावा 29 करोड़ की निजी संपत्ति भी जल प्रलय की भेंट चढ़ गई। खेती के मामले में भी प्रदेश में अव्वल गिने जाने वाले कोटा संभाग में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। खरीफ की फसल चौपट हो गई। किसानों ने 12 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन, धान, उड़द और मूंग की बुआई की थी। लेकिन पानी ने सब निगल लिया। दुधारू पशुओं की मौत भी इसमें शामिल है। ग्रामीण अर्थव्यस्था के लिए यह संकट की घड़ी है।


 
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