राम जन्मभूमि

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मुख्यमंत्री योगी ने प्रधानमंत्री को भेंट की उत्कृष्ट नक्काशी वाली कोदण्ड राम की प्रतिमा

05/08/2020

अयोध्या, 05 अगस्त (हि.स.)। राममन्दिर भूमिपूजन के लिए आए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोदण्ड राम की प्रतिमा भेंट की। ये प्रतिमा बेहद खास है। 

कोदण्ड राम की 3 फीट की प्रतिमा बंगलुरु के एम राममूर्ति एवं एम भूपति ने बनाई है, जिन्हें 7 फीट की कोदण्ड राम प्रतिमा के लिए वर्ष 2016 में राष्ट्रपति द्वारा पुरस्कृत किया जा चुका है। यह प्रतिमा छह महीने में बनाई गई है, जिसमें एक ही लकड़ी का इस्तेमाल किया गया है। इस प्रतिमा के सामने के साथ पृष्ठ भाग में भी उत्कृष्ट नक्काशी की गई है। 

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक एक समय भगवान विश्वकर्मा ने दो धनुष बनाए थे। एक धनुष शिवजी को प्रदान किया गया, जिसका नाम पिनाक है। सती के पिता दक्ष के यहां अपमान होने पर उसी पिनाक धनुष से भगवान शिव सारी सृष्टि का विनाश करना चाहते थे। तब देवताओं के अनुरोध पर जब उनका क्रोध शांत हुआ तब इस धनुष को मिथिला के राजा निमि के वंशज जनक को देकर इसे सुरक्षित किया गया 

सीता स्वयंवर के समय भगवान राम ने इसी पिनाक धनुष को तोड़ा था और उनके साथ सीता जी का विवाह संपन्न हुआ। इसी धनुष भंग के अवसर पर भगवान परशुराम ने राम को जो धनुष प्रदान किया था, वह विष्णु द्वारा परशुराम को दिया गया सारंग या कोदण्ड धनुष था

कोदण्ड धनुष ऋचीक ऋषि को भगवान विष्णु ने प्रदान किया था। ऋचीक ऋषि के नाती ऋषि जमदग्नि हुए। जमदग्नि ऋषि के पुत्र परशुराम हैं। परशुराम को अपने पैतृक परंपरा में यह धनुष प्राप्त हुआ था। इस धनुष की विशेषता है कि इसमें चलाया हुआ तीर लक्ष्य को भेजने के बाद वापस आ जाता है, जो इंद्र के बेटे जयंत द्वारा कौवे के प्रकरण में प्रयोग किया गया था। 

दक्षिण भारत की परंपरा में राम को कोदण्ड राम के रूप में ही पूजित किया जाता है। दक्षिण के सभी राज्यों में विशाल कोदण्ड मंदिर हैं, जिसमें तिरुपति से 70 किलोमीटर दूर कडप्पा जिले में कोदंड स्वामी मंदिर आंध्र प्रदेश का मुख्य सरकारी मंदिर बन रहा है। चिकमंगलूर जिले में भी विशाल कोदण्ड रामास्वामी मंदिर है। तेलंगाना की गोदावरी के तट भद्राचलम पर भी अत्यंत विशाल मंदिर है, जो कोदण्ड राम मंदिर है। यहीं से सीता हरण का प्रश्न भी हुआ था।
 
कोदण्ड राम की प्रतिमा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा प्रधानमंत्री को इस अवसर पर भेंट करने से इसका एक विशेष महत्व भी है कि यह हस्तशिल्प की परंपरा का अनूठा उदाहरण है। उत्तर भारत के राम दक्षिण भारत की हस्तशिल्प कला में भी अत्यंत लोकप्रिय है, जिसमें अनेक लोगों को रोजगार प्राप्त होता है। अयोध्या में हस्तशिल्प की इसी परम्परा का विकास किया जाएगा, जिससे स्थानीय युवकों को रोजगार प्राप्त होगा और अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को उत्कृष्ट सोविनयर भी प्राप्त हो सकेंगे।

हिन्दुस्थान समाचार/संजय


 
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