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शाकाहार क्रांति का अर्थ है कोरोना से मुक्ति

04/05/2020

शाकाहार क्रांति का अर्थ है कोरोना से मुक्ति

आचार्य डॉ.लोकेशमुनि

ज विश्व के हर कौने से वैज्ञानिक व डाक्टर यह चेतावनी दे रहे हैं कि मांसाहार कैंसर आदि असाध्य रोगों को देकर आयु को क्षीण करता है। इसके विपरीत शाकाहार अधिक पौष्टिकता व रोगों से लड़ने की क्षमता प्रदान करता है। विशेषत: कोरोना संकट ने तो यह स्पष्ट ही कर दिया कि एक स्वस्थ शरीर एवं रोगों से लड़ने के लिये शाकाहार ही सबसे उपयुक्त है। अमेरिका में सलाद बार अत्यधिक लोकप्रिय हो रहे हैं। पश्चिमी देशों में शाकाहार के लिये वहां लोगों का रुझान अनेक रूपों में देखने को मिल रहा है। अनेक शोध इस बात को लेकर भी सामने आए हैं कि मांसाहार से सबसे बड़ा खतरा ग्लोबल वॉर्मिंग का है। यह बात थोड़ी अटपटी लग सकती है पर दोनों में गहरा संबंध है। खाने की थाली में सजा लजीज मांसाहार हमारे स्वास्थ्य पर चाहे जो प्रभाव डाल रहा हो लेकिन पर्यावरण पर तो इसका बहुत बुरा असर हो रहा है। आखिर निरीह जीवों की हत्या और आह से सना भोजन कैसे स्वास्थ्य एवं सौभाग्यवर्द्धक हो सकता है? पूरी दुनिया में नॉन वेज (मांसाहार) की संस्कृति के पनपने के अनेक कारण हैं लेकिन आर्थिक विकास और औद्योगीकरण ने मांसाहार को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन देशों में जैसे-जैसे आर्थिक विकास हुआ है, वैसे-वैसे मांस व पशुपालन उद्योग फला- फूला है।

कोरोना वायरस के महासंकट ने जीवन में व्याप्त विसंगतियों एवं विषमताओं पर गहराई से सोचने एवं जीवनशैली को एक नया एवं स्वस्थ आकार देने का वातावरण निर्मित किया है। इस जीवनशैली को विकसित करते हुए जिन महत्वपूर्ण तथ्यों पर हमें ध्यान देना है, उनमें प्रमुख है शाकाहार।

लेकिन इस तथाकथित विकास की पोल जल्दी ही खुल गयी। मांसाहार के बढ़ते प्रचलन से जहां प्राकृतिक अंसतुलन का खतरा है, वहीं इसने मैड काऊ, बर्ड μलू व स्वाइन μलू जैसी नई महामारियां पहले ही मानवता को अनेक खतरे दे चुकी हैं। अब कोरोना वायरस ने तो मानव इतिहास की सबसे बड़ी महामारी एवं त्रासदी के रूप में जीवन-अस्तित्व पर प्रश्न खड़े कर दिये हैं। मांस उत्पादन में खाद्य पदार्थों की बड़े पैमाने पर बर्बादी भी होती है। एक किलो मांस पैदा करने में 7 किलो अनाज या सोयाबीन की जरूरत पड़ती है। एक किलो सब्जी पैदा करने में जहां मात्र 500 लीटर पानी की खपत होती है, वहीं इतने ही मांस के लिए 10,000 लीटर पानी की जरूरत पड़ती है। स्पष्ट है कि आधुनिक औद्योगिक पशुपालन के तरीके से भोजन तैयार करने के लिए काफी जमीन और संसाधनों की जरूरत होती है। व्यक्ति को वही चीजें खानी चाहिए जो प्राकृतिक हैं। श्रीमद्भागवतगीता में भोजन की तीन श्रेणियां बतायी हैं। तामसिक आहार- जो हमारे भीतर तमस को पैदा करें, आक्रामकता पैदा करें, तामसिक व हिंसक मनोवृत्ति को बढ़ाएं मांसाहार आदि। राजसी आहार- जो हमारी इन्द्रियों को प्रदीप्त करें, उत्तेजित करें चंचलता बढ़ाए। प्रचुर मात्रा में घी, तेल, मक्खन आदि।

सात्विक आहार- जो शरीर निर्वाह के साथ सात्विक प्रवृत्तियों को बढ़ाए, साधना में बाधक न बनें – फल सब्जियों अनाज आदि। मांसाहार दुगुर्णों को जन्म देने वाला है, जिसके द्वारा क्रूर भाव उत्पन्न होते हैं और ऐसी ही क्रूर मानसिकता वाले राष्ट्र कोरोना जैसी महामारियां फैलाकर मानव जीवन को संकट में डालते हैं। नए शोध के अनुसार, शाकाहारी होना हमारे शरीर के लिए बहुत फायदेमंद हैं। जो लोग सब्जियों से अधिक प्रोटीन प्राप्त करते हैं, उनका रक्तचाप सामान्य रहता है जबकि मांस का अधिक सेवन करने वाले ज्यादातर लोग हाई ब्लड प्रेशर के शिकार होते हैं। लंदन में हुए शोध के अनुसार उन लोगों में हाई ब्लड प्रेशर ज्यादा पाया गया, जो मांस से अधिक प्रोटीन प्राप्त करते थे।

अनुसंधान के अनुसार, शाकाहारी प्रोटीन में एमीनो एसिड पाया जाता है। यह शरीर में जाकर ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है। मांसाहार मनुष्य में तामसी वृतियां पैदा कर उसे क्रूर और हिंसक बनाता है, उसके शरीर की रोग-निरोधक क्षमता को कम कर उसे रक्तचाप तथा हृदय रोग जैसी दुसाध्य बीमारी लगाता है, उसके श्वास और पसीने को दुर्गुण युक्त बनाता है। उसके मन में काम, क्रोध और प्रमोद जैसे दुर्गुण उत्पन्न करता है। महात्मा गांधी कहते थे कि स्वाद पदार्थ में नहीं, अपितु मनुष्य की अपनी जिह्वा में होता है। नीम की चटनी से जीभ के स्वाद पर नियंत्रण कर लेने वाले गांधी के देश में आज मांसाहार का विरोध तो दूर, उल्टे टी.वी. और रेडियो जैसे संचार माध्यमों द्वारा अंडों के आकर्षक विज्ञापन प्रसारित किया जाना विडम्बनापूर्ण हैं। यह चिन्तनीय है, अहिंसा के उपासक देश के लिए लज्जास्पद भी। इसका विरोध करना अहिंसा के पक्षधर प्रत्येक प्रबुद्ध नागरिक का नैतिक दायित्व है तथा मुख सुख के लिए निरीह प्राणियों और अजन्में अंकुरों की निर्मम हत्या के विरुद्ध जनमानस तैयार करना सबका प्रथम कर्तव्य है।


 
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