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योगी सरकार ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक पवन कुमार को हटाया

07/11/2019

- तीस माह में 200 से ज्यादा अफसर-कर्मचारियों को दी गई अनिवार्य सेवानिवृत्ति 

संजय सिंह 
लखनऊ, 07 नवम्बर (हि.स.)। प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने गुरुवार को भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में बड़ी कार्रवाई करते हुए सात प्रांंतीय पुलिस सेवा के अफसरों को अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त किए जाने के बाद प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) पवन कुमार को पद से हटा दिया है। उन पर सोनभद्र में सरकारी जमीन को एक निजी कंपनी को गलत तरीके से देने के आरोप हैं।

भारतीय वन सेवा के अधिकारी पवन कुमार को उनके पद से हटाकर प्रतीक्षा में रखा गया है। सरकार के इस कदम के बाद वन महकमे में खलबली मची हुई है। पूर्व आईएफएस अधिकारी एके जैन ने 2017 में आगरा के मुख्य वन संरक्षक रहते हुए पवन कुमार पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने इस सम्बन्ध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर शिकायत भी की थी। पत्र में आरोप लगाये गये थे कि अखिलेश सरकार में प्रमुख सचिव संजीव सरन और आईएफएस अधिकारी पवन कुमार ने एक निजी कंपनी को सोनभद्र में वन महकमे की 4721 करोड़ की जमीन दी थी, जिसमें बड़े पैमाने पर हेराफेरी की गई थी।

सात पीपीएस अधिकारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति से हुई कार्रवाई की शुरूआत
इससे पहले आज मुख्यमंत्री के निर्देश पर आज के दिन की शुरुआत बड़ी कार्रवाई से हुई और सात पीपीएस अधिकारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति  दे दी गई। अपर मुख्य सचिव, गृह अवनीश कुमार अवस्थी ने बताया कि स्क्रीनिंग कमेटी की संस्तुति पर शासन ने यह फैसला किया। इसमें प्रान्तीय पुलिस सेवा संवर्ग के 50 वर्ष या उससे अधिक आयु के 07 पुलिस उपाधीक्षकों, सहायक सेनानायकों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति प्रदान कर दी गई है।

इनमें अरुण कुमार, सहायक सेनानायक, 15वीं वाहिनी पीएसी जनपद आगरा,विनोद कुमार राना, पुलिस उपाधीक्षक, जनपद अयोध्या, नरेन्द्र सिंह राना, पुलिस उपाधीक्षक जनपद आगरा,रतन कुमार यादव, सहायक सेनानायक, 33वीं वाहिनी पीएसी, झांसी, तेजवीर सिंह यादव, सहायक सेनानायक, 27वीं वाहिनी पीएसी, सीतापुर, संतोष कुमार सिंह, मण्डलाधिकारी मुरादाबाद तथा तनवीर अहमद खां, सहायक सेनानायक, 30वीं वाहिनी पीएसी, गोण्डा को अनिवार्य सेवानिवृत्ति प्रदान की गयी है।

​भविष्य निधि मामले में तीन बड़े अफसर हो चुके हैं गिरफ्तार
इससे पहले बिजली विभाग में भविष्य निधि की धनराशि को लेकर धांधली मामले में यूपीपीएसल के महाप्रबंधक व ट्रस्ट के सचिव पीके गुप्ता और वित्त निदेशक सुधांशु द्विवेदी को गिरफ्तार किया जा चुका है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन के पूर्व एमडी अयोध्या प्रसाद मिश्रा भी सलाखों के पीछे हैं। तीन अफसरों को तीन-तीन दिन की रिमांड पर पुलिस को सौंपा गया है। 

 400 से ज्यादा अफसरों, कर्मचारियों का निलंबन और पदावनति
पिछले 30 माह में योगी सरकार अलग-अलग विभागों के 200 से ज्यादा अफसरों और कर्मचारियों को जबरन सेवानिवृत्ति  कर चुकी है। इन दो वर्षों में योगी सरकार ने 400 से ज्यादा अफसरों, कर्मचारियों को निलंबन और डिमोशन जैसे दंड भी दिए हैं। योगी सरकार ऊर्जा विभाग में 169 अधिकारियों, गृह विभाग के 51 अधिकारियों, ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के 37 अधिकारियों, राजस्व विभाग के 36 अधिकारियों, बेसिक शिक्षा के 26 अधिकारियों, पंचायतीराज के 25 अधिकारियों, पीडब्ल्यूडी के 18 अधिकारियों, लेबर डिपार्टमेंट के 16 अधिकारियों, संस्थागत वित्त विभाग के 16 अधिकारियों, कामर्शियल टैक्स के 16 अधिकारियों, इंटरटेनमेंट टैक्स डिपार्टमेंट के 16 अधिकारियों, ग्राम्य विकास के 15 अधिकारियों व वन विभाग के 11 अधिकारियों पर कार्रवाई कर चुकी है।

अबकी बार भ्रष्टाचार की जड़ पर प्रहार: मनीष शुक्ला
प्रदेश भाजपा प्रवक्ता मनीष शुक्ला का कहना है कि अबकी बार भ्रष्टाचार की जड़ पर प्रहार के मूलमंत्र से योगी सरकार काम कर रही है। इसीलिए इस तरह के कदम उठाये गये हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार जीरो टालरेंस पर काम कर रही है। शुक्ला ने कहा कि भ्रष्टाचार को समूल रूप से खत्म करने के लिए सरकार ने प्रदेश की आम जनता को शामिल करने के लिए एंटी करप्शन पोर्टल लाॅच किया है। पोर्टल पर कोई भी व्यक्ति अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। पोर्टल पर दर्ज शिकायतों पर कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही है। विभिन्न विभागों के कई अन्य अधिकारी भी रडार पर है।

हिन्दुस्थान समाचार


 
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