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ग्लोबल इन्वेस्टर मीट से बहुरेंगे दिन.....

28/10/2019

ग्लोबल इन्वेस्टर मीट से बहुरेंगे दिन

 मुनीष बन्याल

शीतकालीन राजधानी धर्मशाला में सात व आठ नवबंर को राज्य में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए मेगा इवेंट का आयोजन होने जा रहा है। धर्मशाला मेगा ग्लोबल इन्वेस्टर मीट से 85,000 करोड़ की एकमुश्त राशि निवेश की संभावना को तलाशा जाएगा।

देश के अन्य राज्यों के मुकाबले आद्यौगिकीकरण के मामले में अब तक पिछड़े रहे पहाड़ी राज्य हिमाचल के दिन जल्द ही बदलने वाले हैं। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने राज्य में अब तक के सबसे बड़े 85,000 करोड़ रुपये के एकमुश्त निवेश को रिझाने के लिए एक फुलप्रूफ खाका तैयार किया है। इस मेगा इवेंट का आयोजन हिमाचल प्रदेश की शीतकालीन राजधानी धर्मशाला में सात व आठ नवबंर को होगा। गौरतलब है कि जयराम सरकार इस मेगा इवेंट के सफल आयोजन के लिए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के दिशा निर्देशन में पिछले कई दिनों से तैयारी कर रही है।
इस कार्यक्रम के आयोजन की भव्यता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस इन्वेस्टर मीट का शुभांरभ 7 नंवबर को खुद करेंगे। जबकि गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय रेलमंत्री पीयूष गोयल, केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर और कई दूसरी जानी मानी हस्तियां भी शिरकत करेंगी। निवेशकों की सुविधा के लिए राज्य सरकार ने एक आनलाइन पोर्टल हिम प्रगति तैयार किया है जिसके माध्यम से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। हिमाचल सरकार ने इस आनलाईन पोर्टल से प्राप्त हुए सुझावों के आधार पर भी अभी तक सरकार ने अपनी कई व्यवस्थाओं और खामियों को दूर करने की पहल आरंभ कर दी है।

विपक्षी कांग्रेस ने उठाए सवाल
राज्य में आयोजित होने वाली इन्वेस्टर मीट को लेकर विपक्षी दल कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कई सवालिया निशान लगाए हैं। नेता विपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने कहा है कि इन्वेस्टर मीट के नाम पर भाजपा सरकार हिमाचल को बेचने का प्रयास कर रही है। सरकार ने इन्वेस्टर मीट के जरिये ‘हिमाचल ओन सेल’ कर दिया है जिसे बचाने के लिए कांग्रेस ने ‘सेव हिमाचल’ कैंपेन शुरू किया है। कांग्रेस ने कहा कि धारा 118 से कोई छेड़छाड़ नहीं होने दी जाएगी। भाजपा सरकार ने कई कंपनियों और इन्वेस्टरों के साथ एमओयू भी किये हंै। जिसे कांग्रेस स्टडी कर रही है। अग्निहोत्री ने आरोप लगाया है कि पहले से मौजूद निवेशक धर्मशाला, बद्दी-बरोटीवाला से इंडस्ट्रियल छोड़कर जा रहे हैं। इनके बारे में सरकार कुछ नहीं सोच रही है। उधर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप राठौर ने कहा कि इन्वेस्टर मीट के नाम पर प्रदेश की आर्थिक स्थिति खराब करने की कोशिशें की जा रही हैं। निवेशकों को सरकारी खर्च पर यहां लाने की व्यवस्था सरकार कर रही है। सरकार को चाहिए कि जो उद्योग यहां पहले से चल रहे हैं उन्हें मजबूत किया जाए ताकि वे पलायन न करें।

इसके तहत निजी टावरों को लगाने के लिए पंचायतों से एनओसी लेने की अनिवार्यता को खत्म किया गया है, जबकि शहरी विकास विभाग को भी लैंड डेवलपमेंट के लिए एनओसी लेने की शर्त को भी हटाने के लिए कहा गया है। इसी तरह राज्य में भूमि खरीदने के लिए विवादित धारा 118 के तहत अनुमति प्रिप्त के लिए आनलाईन आवेदन करने का प्रावधान किया गया है। हिमाचल की जयराम सरकार इस बड़े निवेश को रिझाने के लिए अभी तक देश के कई बड़े शहरों के अतिरिक्त विदेशी सरजमीं जर्मनी, नीदरलैंड और दुबई में भी रोड शो का आयोजन कर चुकी है। उल्लेखनीय है कि अभी तक हिमाचल प्रदेश में सत्तासीन रहीं सरकारें कोई बड़े निवेश को रिझाने में नाकाम रही हैं।
जयराम ठाकुर ने खुद दुबई में रोड शो निकाल कर निवेशकों को धर्मशाला में आयोजित होने वाली इन्वेस्टर मीट में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। अभी तक हिमाचल में आद्यौगिक निवेश केवल कुछ क्षेत्रों तक ही सीमित रहा है जिसमें से नालागढ़, बददी और पांवटा साहिब जैसे क्षेत्र मुख्य औद्योगिक क्षेत्र बनकर उभरे हैं। सोलन जिले के नालागढ़ और बददी औद्योगिक क्षेत्र ने फार्मा क्षेत्र में अपनी एक पहचान बनाई है। नालागढ़ क्षेत्र देश का दूसरा सबसे बड़ा फार्मा हब है। इस अकेले क्षेत्र का सालाना टर्न ओवर लगभग 50,000 करोड़ है।
धर्मशाला में आयोजित होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर मीट में जयराम सरकार ने बड़े उद्योगों की बजाय छोटे और मझोले उद्योगों को लुभाने पर ध्यान केंद्रित किया है। जिसका कारण यह है कि राज्य सरकार के पास बड़े उद्योगों को स्थापित करने के लिए अधिक भूमि उपलब्ध कराने की चुनौती है। इस चुनौती को पार पाना राज्य सरकार के वश में नहीं है। इसी कारण छोटे उद्योगों को स्थापित करने के लिए अधिक ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। जयराम सरकार अगर इस निवेश को रिझाने में कामयाब रहती है, तो कर्ज के बोझ के तले दबी हिमाचल सरकार को राहत तो मिलेगी ही, वहीं राज्य के हजारों बेरोजगार युवाओं के लिए भी नौकरी के अवसर उपलब्ध होंगे।

कार्यक्रम की रूपरेखा
मुख्य सचिव श्रीकांत बाल्दी के अनुसार इस समिट के लिए 1,600 से अधिक आमंत्रण पत्र भेजे गए हैं और विभिन्न देशों के 20 से 25 राजदूतों के आने की संभावना है। इसके अलावा, केन्द्रीय मंत्री और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री को भी आमंत्रित किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकारी अतिथि गृहों के अतिरिक्त अति विशिष्ट तथा अन्य गणमान्य व्यक्तियों के लिए धर्मशाला, पालमपुर तथा कांगड़ा में कमरे आरक्षित किए जाएंगे। उनके अनुसार इस इवेंट के सफल आयोजन के लिए 9 समितियां गठित की गई हैं। इसमें कुल आठ सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें मंत्री, सचिव तथा अन्य व्यक्ति अपने अनुभव सांझा करेंगे। समिट के प्रथम दिन रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया जाएगा। मुख्य सचिव ने इस ग्लोबल इन्वेस्टर मीट की सफलता के लिए हर संभव प्रयास करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने निवेशकों व अन्य अतिथियों की परिवहन व्यवस्था के लिए किसी पार्टनर को जिम्मा सौंपने के भी निर्देश दिए। इस समारोह के लिए हेल्पलाइन नम्बर भी स्थापित किया जाएगा, जिसमें ठहरने, परिवहन तथा समारोह से संबंधित अन्य जानकारी के लिए सम्पर्क किया जा सकेगा।

देवभूमि में उद्योगों की अनुपस्थिति के कारण हिमाचल के बेरोजगार युवाओं को दूसरे राज्यों की तरफ पलायन करना पड़ता है। देवभूमि की बात करें तो कई ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें निवेश की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। हिमाचल की प्राकृतिक सुंदरता पर्यटन में निवेश के लिए उपयुक्त है। राज्य सरकार इस अवसर को भुनाने के मेगा इन्वेस्टर मीट के माध्यम से भरसक प्रयत्न कर रही है। इन्वेस्टर की सहूलियत के लिए जयराम सरकार ने प्रदेश के तीन जिलों कांगड़ा, ऊना और सोलन में एक लैंड बैंक भी तैयार कर दिया है। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश ने बागवानी के क्षेत्र में भी काफी तरक्की की है। कच्चा माल प्रदेश में ही उपलब्ध होने के कारण फूड प्रोसेसिंग उद्योग लाभांवित होगा। प्रदेश के किसानों को अपने उत्पादों को बेचने के लिए राज्य में ही मार्केट मिलेगी।

पूंजीपतियों के लिए औद्योगिक क्षेत्रों में भी प्लॉट उपलब्ध कराए जाएंगे। यही नहीं निजी क्षेत्र की भूमि भी आॅनलाइन पोर्टल में उपलब्ध है और इसके लिए पूंजीपति आनलाईन आवेदन कर सकेंगे।

सरकार ने नए बड़े फार्मा उद्योगों, आॅटोमोबाइल सेक्टर, पर्यटन क्षेत्र, बिजली उत्पादन क्षेत्र में निवेशकों को आकर्षित करने का खाका तैयार किया है। आधिकारिक सूत्रों की मानें तो सरकार की यह योजना निश्चिततौर पर रंग दिखाएगी। इस दिशा में हुई प्रगति की बात करें, तो अभी तक सरकार 45,000 करोड़ का निवेश धरातल पर लाने के लिए निवेशकों के साथ एमओयू साईन कर चुकी है। राज्य में पर्यटन के क्षेत्र में निवेश को लेकर भी निवेशकों ने काफी रुचि दिखाई है। उद्योग, श्रम एवं रोजगार तथा तकनीकी शिक्षा मंत्री विक्रम ठाकुर ने दावा किया कि इस आयोजन से जहां प्रदेश की आर्थिकी सुदृढ़ होगी वहीं लोगों को रोजगार व स्वरोजगार के बेहतर अवसर भी घर-द्वार के नजदीक उपलब्ध होंगे। जानकारों के अनुसार सरकार की तरफ से धर्मशाला में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट के लिए 324 लग्जरी गाड़ियों का इंतजाम किया जाएगा।
इसके साथ ही सरकारी खर्चे पर ही चार्टर्ड प्लेन और हेलीकॉप्टर से चंडीगढ़ और गगल एयरपोर्ट पहुंचने वाले मेहमान निवेशकों को इन लग्जरी वाहनों से धर्मशाला पहुंचाया जाएगा। इसके अतिरिक्त सरकार मर्सडीज, बीएमडब्ल्यू, फॉर्च्यूनर के अलावा इटिओस, डिजायर, इनोवा जैसे 310 वाहनों के अलावा 45 सीटों वाले 4 वोल्वो कोच और 16 सीट वाली 10 टोयोटा कोस्टर को सरकार दो दिन के लिए किराये पर लेगी। इन सभी लक्जरी वाहनों को चंडीगढ़ और गगल एयरपोर्ट पर तैनात किया जाएगा, जहां से ये महमानों को सीधे कार्यक्रम स्थल पहुंचाएंगी।


 
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