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सफल रहा मल्टी लेयर फार्मिंग प्रशिक्षण शिविर

07/03/2020

सफल रहा मल्टी लेयर फार्मिंग प्रशिक्षण शिविर


द्या आॅर्गेनिक एंड मिल्क प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा नोएडा के सेक्टर 167 स्थित आद्या आॅर्गेनिक फॉर्महाउस में 14 से 16 फरवरी के बीच तीन दिवसीय मल्टी लेयर फार्मिंग प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ केंद्रीय पंचायती राज, कृषि और किसान कल्याण राज्यमंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने किया। इस शिविर में देश भर से आये सैकड़ों किसानों एवं कृषि शोधार्थियों ने कम जमीन में अधिक उपज करने का तरीका सीखा। शिविर के पहले दिन पुरुषोत्तम रूपाला ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि देश के सभी महानगरों के बीच में काउ हॉस्टल बनाने की आवश्यकता है, ताकि महानगर में भी गाय पालना आसान हो सके और देशी गाय से जैविक खेती की जा सके। दिल्ली नोएडा जैसे शहर में भी लोग इतने गंभीर है यह जानकर अच्छा लगता है। दुनिया में ट्रेंड के आधार पर ही वस्तुओं की मांग होती है। विश्व में फैले कोरॉना वायरस की वजह से लोग खाने में और भी चूजी हो गए हैं। एक जमाना था जब सब पंगत में जबरदस्ती मिठाई खिलाते थे और न खाने पर लोग गुस्सा होते थे। अब इसका ठीक उल्टा हो गया है।

किसानों की आय बढ़ाने के लिए हमें ऐसा मॉडल बनाने की आवश् यकता है जिस से किसानों की परेशानी कम हो। साथ ही गोवंश और पशुधन के नामकरण के पचड़े से बचना होगा।

गिरिराज सिंह, पशुपालन, डेयरी और मत्स्यपालन मंत्री

अब खाने में सोचने वालों की तारीफ होती है। रूपाला ने कहा कि भारत में पहले से ही जैविक खेती होती थी। बस किसानों को समझाने की आवश्यकता है। हम सब को किसान की आय दोगुनी कैसी हो इसके बारे में सोचना चाहिए। इसके लिए एक संगठन खड़ा करने की आवश्यकता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि गुजरात के सूरत में हमने 200 लोगों को इकठ्ठा किया और उनको जरूरत के हिसाब से आॅनलाइन सब्जी इत्यादि उनके घर तक पहुंचाते थे। हमें मार्केट के साथ चलने की जरूरत है।

10 हजार है और ब्राजील में 70 लाख। यह बहुत बड़ी विडम्बना है कि हमने उसके महत्व को नहीं समझा।

आर के सिन्हा, राज्यसभा सांसद

भाजपा सभी महानगरों के बीच में ‘काउ हॉस्टल’ बनाने की आवश्यकता है, ताकि महानगर में भी गाय पालना आसान हो सके और देशी गाय से जैविक खेती की जा सके।

पुरुषोत्तम रुपाला केंद्रीय पंचायती राज, कृषि और किसान कल्याण राज्यमंत्री

शिविर के दूसरे दिन भारत सरकार के पशुपालन, डेयरी और मत्स्यपालन मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा किसानों की आय बढ़ाने के लिए हमें ऐसा मॉडल बनाने की आवश्यकता है जिस से किसानों की परेशानी कम हो। गिरिराज सिंह ने कहा कि भारत में हमने किसान को फटेहाली में ही देखा है। किसानो की आय को बढ़ाना है तो गोवंश और पशुधन के नामकरण के पचड़े में न पड़ कर हमें कार्य करने की आवश्यकता है। सच्चाई यह है कि देशी गाय या विदेशी गाय यह सब किसानों के हाथ है। हमें वैज्ञानिक विधि से जमीन को ध्यान में रख कर फसल को भी चुनना होगा। उन्होंने कहा कि सच्चाई तो यह है कि किसान के हाथ में पैसा चाहिए चाहे वह कोई भी गाय से मिले। इसलिए देशी और विदेशी गाय के पचड़े में हमें नहीं पड़ना चाहिए। पशुपालन, डेयरी और मत्स्यपालन मंत्री के अनुसार विश्व के 180 देश आॅर्गेनिक खेती करते हैं, जिस में भारत का हिस्सा 30 प्रतिशत है। भारत में इस मामले में जागरूकता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कहने के बाद आई। गिरिराज सिंह ने राज्यसभा सांसद आरके सिन्हा को धन्यवाद कहते हुए कहा कि देश में किसानों के लिए वह कुछ कर रहे हैं। सब कहते हैं कि देश गांव में बसता है लेकिन गांव काला होता गया है और शहर लाल। गांव से पलायन कर लोग शहरों में आ रहे हैं।

गिरिराज सिंह ने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को याद करते हुए कहा कि 1960 के दशक में अमेरिका से जो गेहूं भारत आता था वह वहां सूअर और जानवर खाते थे। यह देखकर स्वाभिमानी प्रधानमन्त्री लाल बहादुर शास्त्री ने भारत आते ही भारतीय वैज्ञानिक एम.एस स्वामीनाथन से पूछा कि आप गेंहू की गुणवत्ता कितने दिन में बढ़ा सकते हैं? जवाब मिला एक साल। शास्त्री ने तुरंत रेडियो पर घोषणा की और देश को संबोधित करते हुए अन्न बचाने की अपील की। उनकी अपील को लोगों का भरपूर साथ मिला और एक साल के भीतर गेहूं का उत्पादन बढ़ा। हालांकि यह हमारा दुर्भाग्य रहा कि उस वक्त हॉर्टिकल्चर पर काम होता तो और अच्छा होता। वहीं पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की नीतियों की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में जर्सी और एचएफ (हॉल्स्टीन फिसियन) जैसी गाय भारत में आई। उस वक्त अगर भारतीय गाय की ब्रीड पर शोध कार्य होता तो हम अभी समस्या नहीं झेल रहे होते।

उन्होंने कहा कि नेहरू की नीतियों के कारण विज्ञान हमारे लायक नहीं हम विज्ञान के लायक बनते गए। राज्य सभा सांसद आरके सिन्हा ने कहा कि देश में लोग बीमार हो रहे हैं इसको रोकने के लिए जैविक खेती की तरफ जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि गिर गाय जो कि भारत के गुजरात का नस्ल है उसकी गुजरात में कीमत 10 हजार है और ब्राजील में 70 लाख। यह बहुत बड़ी विडम्बना है कि हमने उसके महत्व को नहीं समझा। केमिकल युक्त अन्न एवं सब्जी खाकर हमारी पीढ़ी कैंसर और नपुंसकता जैसी कई गम्भीर बीमारियों की शिकार हो रही है यह बात जैविक खेती के एक्सपर्ट दीपक नरवेडे ने बताया। उन्होंने कहा कि हमारी अगली पीढ़ी जब हमसे पूछेगी की हम कैंसर से पीड़ित क्यों हैं? हमें सांस लेने में समस्या क्यों होती है? तो हम क्या कहेंगे? हमारी पीढ़ी विषयुक्त भोजन ग्रहण कर रही है। हमें उन्हें स्वस्थ बनाना है तो खेती के जैविक विधि को अपनाना होगा। देशी गाय को अपनाने की जरूरत है। देशी गाय का दूध बीमारी से रहित होता है। वहीं, मल्टी लेयर फार्मिंग एक्सपर्ट आकाश चौरसिया ने बताया कि भारत में इतनी गाय नहीं बची है जो जैविक खाद के लिए पूर्ण हो। इसके लिए गोबर की क्वालिटी एवं क्वांटिटी बढ़ाने के साथ हमें मल्टी लेयर फार्मिंग की तरफ जाना होगा। इस से हम 5 लाख से 6 लाख रुपए प्रति एकड़ कमा सकते है वो भी कम लागत में। गलगोटिया यूनिवर्सिटी के बीएससी एग्रीकल्चर द्वितीय वर्ष के छात्र राजकुमार पांडेय ने बताया कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में इस तरह का शिविर हम जैसे छात्रों के लिए बहुत फायदेमंद है। शहरों में खेती से जुड़ी चीजें देखने को नहीं मिलती।

राज कुमार के मुताबिक दो दिन में उन्होंने बहुत कुछ सीखा है। हमारे देश में कम भूमि वाले किसानों की संख्या अधिक है, उनके लिए यह विधि आमदनी बढ़ाने के लिए बहुत उपयोगी है। मल्टी लेयर फार्मिंग का वर्कशॉप हमने पहली बार देखा है। वहीं, मध्य प्रदेश की छात्रा स्नेह सिंह का कहना है कि खेती में पौधे और फसल को हवा और पानी प्राप्त करने के लिए कितना जगह होना चाहिए। हम जैसे छात्रों ने दो दिनों में इसको प्रेक्टिकली सीखा है। स्नेह सिंह के मुताबिक भविष्य में सबको भोजन प्राप्त हो सके इसके लिए हमें मल्टी लेयर फार्मिंग जैसी विधि को अपनाना होगा। मूलत: बिहार के सीवान के रहने वाले छात्र अनूप सिंह ने बताया कि हमारे देश के किसानों में पेस्टीसाइड को लेकर जागरूकता नहीं है। कितना खाद और पेस्टीसाइड खेतों में डालना चाहिए और कितने समय पर डालना चाहिए इसकी जानकारी किसानों में नहीं है। जब किसान खाद दुकानदार से खरीदते हैं तो दुकानदार अपने हिसाब से उनको मात्रा बताता है जो अवैज्ञानिक होता है। इसलिए सरकार को किसानों के लिए जागरूकता अभियान चलाना चाहिए। अनूप ने देश में अनाज भंडारण की भी उचित व्यवस्था पर जोर दिया क्योंकि इसके अभाव में लाखों टन अनाज और धन बर्बाद हो जाता है।


 
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