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आम आदमी पार्टी आम नहीं?

04/03/2020

आम आदमी पार्टी आम नहीं?

सौरव राय

किसी ने ठीक ही कहा है लोग पहले राजनीतिक क्षेत्र में सुविधाओं का उपभोग करते हैं। तत्पश्चात उनकी प्रवृत्ति हो जाती है। यह कहावत सभी पार्टियों के ऊपर सटीक बैठती है। दिल्ली चुनाव में एक बार फिर आम आदमी पार्टी की सत्ता में वापसी हुई। बीजेपी को 8 सीट और आप को 62 सीटों पर जीत हासिल हुई। इस तरह केजरीवाल ने तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। यह वही केजरीवाल हैं, जिन्होंने अपने राजनैतिक महत्वकांक्षा की शुरूआत एक सामाजिक कार्यकर्ता, आंदोलनकर्ता, के रूप में की और फिर राजनेता बने। आप ने व्यवस्था परिवर्तन जैसे बड़े बड़े सपने दिखाये। ईमानदारी की दावे और वादे किये गए। लेकिन ये दावे न केवल खोखले साबित हुए हैं बल्कि झूठे भी हैं। इसका प्रमाण है दिल्ली चुनाव बाद जारी एडीआर की रिपोर्ट। रिपोर्ट में उम्मीदवारों द्वारा दिये गये हलफनामें से स्पष्ट हो जाता है कि आम आंदमी पार्टी ने झाड़ू से अपने ऊपर आपराधिक रिकॉर्ड और धन संपदा का ढेर लगा लिया है।

हर बार चुनाव में राजनीतिक पार्टियां शुचिता और ईमानदारी कीबड़ी-बड़ी बातें करती हैं। लेकिन चुनाव बाद नेताओं के हलफनामों का विश्लेषण करने पर स्पष्ट हो जाता है कि ये बातें केवल जनताज नार्दन को बरगलाने के लिए हैं, क्रियान्वयन के लिए नहीं।

आपराधिक पृष्ठभूमि

एडीआर रिपोर्ट से स्पष्ट है कि दिल्ली चुनाव मे हर पार्टी ने चुनाव जीतने वाले प्रत्याशियों को ही टिकट दिया। यह ट्रेंड हर पार्टी में दिखा। जमकर दागियों को टिकट दिया गया। रिपोर्ट मे यह साफ देखा जा सकता है कि पिछली बार कि तुलना में इस बार ज्यादा आपराधिक छवि वाले विधायक दिल्ली विधानसभा मे चुन के आए हैं। विधायकों द्वारा ही घोषित दस्तावेजों के मुताबिक दिल्ली विधानसभा चुनाव में कुल 70 में से 43 विधायकों पर आपराधिक मामला है। यह आंकड़ा दिल्ली विधानसभा चुनाव 2015 से अधिक है। क्योंकि वर्ष 2015 में विधायकों द्वारा घोषित आपराधिक मामलों की संख्या 24 थी। वहीं 14 विधायकों पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे। जबकि 2020 में कुल 37 विधायकों पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। जो पूरी संख्या का 53 प्रतिशत है। वहीं यह 2015 के चुनाव में मात्र 20 प्रतिशत था। बता दें कि गंभीर आपराधिक मामलों में बलात्कार,महिलाओं के ऊपर अत्याचार, हत्या का प्रयास जैसे मामले शामिल हैं। 9 विधायकों ने अपने ऊपर दोष सिद्ध मामले घोषित किये हैं।वहीं एक विधायक पर तो हत्या जैसा मामला भी घोषित है। 13 विधायकों पर महिलाओं के ऊपर अत्याचार और 1 विधायक के ऊपर बलात्कार जैसे गंभीर आरोप हैं।

वित्तीय पृष्ठभूमि

आंकड़े गवाह हैं कि पार्टी का नाम आम आदमी पार्टी है उसके नेता नहीं। धनाढ्य विधायकों की बात करें तो इस बार आम आदमी पार्टी के 62 विधायकों की औसत सम्पति 14.96 करोंड़ है। वहीं बीजेपी के कुल विधायकों की औसत संपत्ति 9.10 करोड़ है। संख्या की दृष्टि से देखा जाए तो आप पार्टी के कुल 62 विधायको में से 45 विधायक करोड़पति हैं। जबकि बीजेपी के 8 में से 7 विधायक करोड़पति हैं। 2015 की तुलना में इस बार के चुनाव में करोड़पतिओं की संख्या में इजाफा हुआ है। 2015 में जहां कुल 70 में से 44 विधायक करोड़पति थे वहीं इस बार 70 में से कुल 52 विधायक करोड़पति हैं। यानी इनकी घोषित संपत्ति एक करोड़ रुपये से अधिक है। सबसे अधिक संपत्ति वाले तीनों विधायक आप के ही हैं। इनमें धर्मपाल लाकड़ा, (विधायक मुंडका) (कुल संपत्ति 292 करोड़ रुपये), प्रमिला टोकस, (विधायक आर के पुरम) (कुल संपत्ति 80 करोड़ रुपये) और राजकुमार, (विधायक पटेल नगर) (कुल संपत्ति 78 करोड़ रुपए) है। वहीं आयकार विवरण में सबसे अधिक कर देने वाले विधायकों मे से करतार सिंह तवंर, (छतरपुर विधायक) राज कुमार आनंद (पटेल नगर विधायक) और कैलाश गहलोत (नजफगड़ विधायक) हैं। सबसे कम संपत्ति वाले तीनों विधायक भी आप के ही हैं। इनमें राखी बिड़ला, (विधायक मंगोलपुरी) (कुल संपत्ति 76 हजार रुपये), संजीव झा, (विधायक बुराड़ी) (कुल संपत्ति 10 लाख रुपये) और सोमदत्त (विधायक सदर बाजार) (कुल संपत्ति 11 लाख रुपये) हैं। वहीं देनदारी कि अगर बात कि जाए तो अधिकतम देनदारी वाले विधायकों की संख्या 19 है। इन्होंने अपनी देनदारी 50 लाख रुपये से अधिक घोषित की है।

शिक्षा, आयु का प्रतिनिधित्व

वैसे राजनीति में जनप्रतिनिधियों को लेकर शिक्षा का कोई मानदंड नहीं है। परंतु यह आम धारणा है कि उम्मीदवार शिक्षित होने चाहिए। भारतीय संविधान शिक्षित एवं अशिक्षित को चुनाव लड़ने का बराबर का हक देता है। एडीआर की रिपोर्ट मुताबिक राजनैतिक पार्टियों के लिए शिक्षित उम्मीदवार ज्यादा मायने नहीं रखते। इस बार चुने गए 23 विधायकों की शैक्षिक योग्यता कक्षा पांच से कक्षा आठ के बीच है। जबकि 42 विधायकों की योग्यता स्नातक या इससे अधिक है। वहीं पांच विधायकों की शैक्षिक योग्यता डिप्लोमा धारी की है। इस बार निर्वाचित विधायकों में से 39 की आयु 25 से 50 वर्ष के बीच है। 31 विधायकों की घोषित आयु 51 से 80 वर्ष के बीच है। इस बार दिल्ली विधानसभा में 70 में से आठ महिला विधायकों ने बाजी मारी हैं। नवनिर्वाचित विधायकों में 45 विधायक फिर निर्वाचित हुए हैं। जबकि 2015 मे यह आंकड़ा 70 मे 6 महिलाओं का था। हर चुनाव मे राजनैतिक पार्टियां कुछ अलग और कुछ खास दिखने का दावा करती हैं। सबका अपना-अपना एजेंडा होता है। शुचिता, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार मुक्त राजनीति की बात तो दशकों से होती आ रही हैं। लेकिन हर बार चुनाव बाद इन दावों का पोस्ट मार्टम ही सब कुछ बयां करने के लिए पर्याप्त है। हर बार की तरह इस बार भी एडीआर की रिपोर्ट के विश्लेषण से स्पष्ट है कि प्रत्येक पार्टियां केवल वोट के लिए बातें करती हैं। जबकि उनकी मंशा कुछ और ही होती है।


 
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