युगवार्ता

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सेवा, सियासत और बयानों का दौर

22/10/2019

सेवा, सियासत और बयानों का दौर

रवि अटल

भाजपा के राज्यसभा सांसद आर के सिन्हा और पप्पू यादव ने पीड़ितों की ओर मदद का हाथ बढ़ाकर सच्चे जनप्रतिनिधि होने का प्रमाण पेश किया है।

पटना में हुई तीन दिनों की बारिश ने न केवल प्रशासन की कलई खोलकर रख दी बल्कि जेडीयू और भाजपा के बीच तल्खी भी पैदा कर दी है। दोनों ही दलों की ओर से एक-दूसरे के खिलाफ जमकर तू-तू मैं-मैं हो रही है। इसकी शुरुआत की फायरब्रांड नेता के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले गिरिराज सिंह ने। तीन दिनों में 340 मिमी. बारिश के बाद पटना में उत्पन्न हुई जलप्रलय की स्थिति के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जिम्मेदार ठहराते हुए गिरिराज सिंह ने कहा कि तारीफ राजा को मिलती है तो गाली भी राजा को ही मिलनी चाहिए। गिरिराज के बाद तो मानो भाजपा नेताओं में बयान देने की होड़ ही मच गई।
बिहार प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सांसद संजय जायसवाल से लेकर अन्य नेताओं ने मुख्यमंत्री की घेरेबंदी शुरू कर दी। हालांकि बारिश व उसके बाद की परिस्थितियों के लिए नीतीश सरकार पर हमलावर नेता संभवत: यह भूल रहे हैं कि सरकार अकेले नीतीश की नहीं, उसमें भाजपा भी शरीक है। पटना की मेयर सीता साहू व नगर विकास मंत्री सुरेश शर्मा दोनों भाजपा के हैं। दोनों सांसद कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद व रामकृपाल यादव के अलावा पटना के चारों विधायक भी भाजपा के ही हैं।
बावजूद इसके नीतीश के खिलाफ बयानों के तीर चलते देख जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता संजय सिंह ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि गिरिराज सिंह नीतीश कुमार के पैर की धूल के बराबर भी नहीं हैं। नीतीश सरकार में भवन मंत्री व कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रहे अशोक चौधरी ने भी यह कहते हुए गिरिराज सिंह को आईना दिखाने की कोशिश की कि नीतीश कुमार से जब काम था तो रोते-रोते चार बार फोन करते थे। नेताओं की बयानबाजी से नाखुश भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा को आखिरकार अपने नेताओं को गठबंधन धर्म का पालन करने की सलाह देनी पड़ी। बहरहाल, बयानवीरों से खुद को अलग करते हुए भाजपा के ही राज्यसभा सांसद आरके सिन्हा ने साफ कहा कि जलजमाव के लिए मुख्यमंत्री नहीं बल्कि नौकरशाह और सिस्टम जिम्मेदार है।
इसी के साथ सिन्हा ने अपनी संस्था एसआईएस के सैकड़ों जवानों और भाजपा कार्यकर्ताओं को साथ लेकर जरूरतमंदों के बीच तीन ट्रक चूड़ा, गुड़, माचिस और मोमबत्ती समेत दैनिक जरूरत की ढेर सारी सामग्रियां बंटवाई। राज्यसभा सांसद आरके सिन्हा की ही तरह पप्पू यादव ने भी लोगों की सहायता कर सच्चा जनप्रतिनिधि होने का सबूत पेश किया। पटना में जलकμर्यू के शिकार पीड़ितों की मदद करती उनकी तस्वीरों ने मीडिया के साथ ही उन्हें जनता का भी हीरो बना दिया। वहीं, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव एक बार फिर चूक गये।
उन्होंने पीड़ितों की तरफ मदद का हाथ बढ़ाने के बजाय केवल खोखला बयान देना ज्यादा श्रेयस्कर समझा। खैर, भाजपा व जदयू के बीच की तल्खी दशहरा के दिन भी दृष्टिगोचर हुई। गांधी मैदान में रावण दहन के कार्यक्रम से भाजपा ने दूरी बना ली। दोनों दलों के बीच आई इस खटास की एक वजह विधानसभा के उप चुनाव भी हैं। 21 अक्टूबर को राज्य की पांच विधानसभा सीटों किशनगंज, दोरंदा, नाथनगर, सिमरी भक्तियारपुर और बेलहर में मतदान है। भाजपा की परेशानी सिवान की दोरंदा सीट से उम्मीदवार बनाये गये अजय सिंह को लेकर है। बाहुबली की छवि रखने वाले अजय सिंह सिवान से जदयू सांसद कविता सिंह के पति हैं।
यह सीट कविता सिंह के इस्तीफे के बाद खाली हुई है। अजय सिंह को प्रत्याशी बनाये जाने के साथ ही भाजपा के पूर्व सांसद ओमप्रकाश यादव ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया। इससे इतर, जदयू और भाजपा के बीच जारी शीत युद्ध के बीच एक सवाल न केवल विपक्ष बल्कि जनता भी पूछ रही है कि महज 340 मिमी. बारिश से बेहाल हुए पटना की इस दुर्दशा का कसूरवार आखिर कौन है? वर्षों से पटना के सांसद, विधायक और मेयर भाजपा के हैं। क्यों नहीं बारिश के पहले नहर, नाले की सफाई कराई गई? आरोप है कि जल निकासी व्यवस्था के नाम पर अरबों नही खरबों रुपये की जमकर लूट हुई है। सबसे बड़ा सवाल है कि क्या इस बंदरबांट का पदार्फाश कर दोषियों को सजा दिलाई जाएगी?


 
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