युगवार्ता

Blog single photo

जुर्म से जेल तक की अनंतकथा

06/09/2019

जुर्म से जेल तक की अनंतकथा

चंदा सिंह

मोकामा के निर्दलीय बाहुबली विधायक अनंत सिंह पर क्या इस बार प्रशासन का शिंकजा लंबे समय तक कसा रहेगा। या पहले की तरह इस केस का परिणाम भी ढाक के तीन पात साबित होंगे।

कहते हैं सब दिन होत न एक समान; कुछ ऐसी ही दशा है अपराध की दुनिया से उठकर राजनीति में अपने पैर पसारने वाले बिहार के बाहुबली विधायक और छोटे सरकार के नाम से प्रसिद्ध अनंत सिंह की। 24 घंटे आंखों पर काला चश्मा, माथे पर लाल टीका, हाथ में भारी भरकम कड़ा और गले में सोने की मोटी चेन पहनने वाले की अब खुद की चैन छिन गयी है। कानून के मंदिर से बेउर जेल पहुंचने पर दिखा तो सिर्फ उनका सफेद कुरता-पजामा और छीटदार गमछा, जिससे वह बार-बार अपने माथे की शिकन को पोछ रहे थे।
चेहरे की रंगत के साथ उनकी मूंछे भी उनकी व्यथा जाहिर कर रही थीं। कल तक छोटे सरकार के नाम से मशहूर अनंत की पहचान अब कैदी नंबर 13617 की है। मोकामा वैसे तो बाहुबलियों का ही गढ़ रहा है जहां अपराध की दुनिया से निकल कर ललन सिंह, संजय सिंह और सूरजभान सिंह जैसे कई नेताओं ने राजनीति में अपनी अलग पहचान बनायी। लेकिन छोटे सरकार के नाम से फेमस अनंत सिंह ने अपनी अलग पहचान और साम्रज्य कायम किया। राजद से विधायक रहे अनंत के बड़े भाई दिलीप सिंह की हत्या के बाद अपराध की दुनिया में इन्होंने अपना पहला कदम रखा। उस समय उनके ऊपर हत्या का बदला लेने का जुनून कितना था कि खबर मिलते ही वह गंगा में नाव न मिलने पर तैर कर मोकामा पहुंच गये। अनंत उस समय 12 वर्ष के थे जब अपराध जगत में उनका पदार्पण हुआ।
उस समय उन्होंने हत्या की पहली घटना को अंजाम दिया था। इसके बाद साल 2015 में एक ऐसी घटना घटी जिससे अनंत अपराध की दुनिया में सुखियों में आ गये। मोकामा के बाढ़ बाजार में चार लड़कों ने एक लड़की के साथ छेड़छाड़ कर दी। अनंत के गुर्गों ने लड़कों को संरक्षण देते हुए उनके महलनुमा घर में छुपा दिया। जनता की मांग के दबाव में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उनके घर की तलाशी ली। तब तक अनंत के गुर्गों ने तीन लड़कों की हत्या कर दी थी। तीनों लड़कों का शव पास के जंगल से बरामद किया गया था। इस घटना से अनंत की अपराध की दुनिया में खास जगह बन गयी क्योंकि इस घटना की गूंज मोकामा सहित पूरे बिहार सुनाई दी थी।
प्रशासनिक जानकारों के अनुसार पुलिस के पास अनंत के खिलाफ पूरा साक्ष्य था लेकिन राजनीतिक दबाव के कारण वह बच गये, क्योंकि नाटकीय ढंग से तत्कालीन एसएसपी जितेंद्र राणा का तबादला कर दिया गया लेकिन एसएसपी ने अपनी चालाकी दिखायी और अपने तबादले की भनक पड़ते ही एक दिन पूर्व उन्होंने सभी साक्ष्य को सार्वजनिक कर दिया। इसका लाभ उनकी जगह आये नये एसएसपी विकास वैभव को मिला। जिसका नुकसान अनंत सिंह को झेलना पड़ा। विकास वैभव ने पद संभालते ही अनंत के घर पर सर्च वारंट लेकर कई जगहों पर एक साथ छापेमारी की और अनंत को गिऱμतार करते हुए रातों रात मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया।
अनंत को पहली बार 14 दिनों के न्यायिक हिरासत में बेउर जेल भेजा गया। इससे पूर्व अनंत सिंह पर 2007 में एक महिला से बलात्कार और उसकी हत्या का आरोप लगा। 2013 में पटना के पाटलिपुत्रा कॉलोनी में जबरन कब्जा। 2015 में पूर्व सीएम जीतन राम मांझी की ओर से अनंत पर हत्या के साजिश का आरोप, एनटीपीसी में मैन पावर की आपूर्ति के ठेके में घोटाले सहित दो दर्जन मामले दर्ज हो चुके थे। साल 2015 तक अनंत सिंह के नाम 30 मामले दर्ज हो गए। इसमे हत्या के 5, हत्या को कोशिश पर 6, डकैती के 2 और अपहरण के 2 मामले दर्ज हुए। ऐसा माना जा रहा है कि 2020 के विधानसभा चुनाव आते-आते उनके सफेद कुरते पर एक-दो दाग और लग सकते हैं। क्योंकि यदि एके 47 का मामला सही पाया गया तो यूएपीए के तहत वह आतंकी साबित हो जायेंगे। अनंत सिंह 3 बार मोकामा के विधायक रहे हैं। उनके राजनीतिक करियर की शुरुआत सीएम नीतीश कुमार के साथ हुई।
2005 में नीतीश कुमार के संपर्क में आते ही मोकामा से जदयू के टिकट पर चुनाव जीत गये। इसके बाद जदयू से ही उन्होंने 2010 में भी मोकामा की विधायकी जीती। लेकिन 2015 में नीतीश ने राजद से गठबंधन कर लिया और सियासी लाभ के लिए अनंत का टिकट काट दिया लेकिन अनंत निर्दलीय चुनाव लड़े और जीत भी गये। 2004 के लोकसभा चुनाव के समय जब नीतीश कुमार बाढ़ संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते थे तो उन्हें इस बात का अंदाजा हो गया था कि मोकामा से निर्दलिय विधायक सूरजभान सिंह के लोजपा में शामिल हो जाने से उन्हें बलिया से राजद-लोजपा का संयुक्त उम्मीदवार बनाया जायेगा और वह वहां अनंत सिंह के बगैर चुनाव नहीं जीत सकते।

अनंत सिंह के राजनीतिक करियर की शुरुआत सीएम नीतीश कुमार के साथ हुई। 2005 में नीतीश कुमार के संपर्क में आते ही मोकामा से जदयू के टिकट पर चुनाव जीत गये।

इसलिए नीतीश के करीबी और बाहुबलियो को पटाने में माहिर रहे ललन सिंह ने अनंत सिंह को नीतीश का साथ देने के लिए राजी किया। इसका लाभ नीतीश कुमार को मिला। उस समय एक जनसभा में अनंत ने नीतीश को चांदी के सिक्कों से तौल दिया था। यह बात काफी चर्चा में रही थी। इसके बाद से ही अनंत सिंह नीतीश के करीबी बन गये और पूरे राज्य में उनकी तूती बोलने लगी। जिसे लेकर अभी तक नीतीश की किरकिरी होती रहती है। एक सच्चाई यह भी है कि नीतीश कुमार के सत्ता में आते ही अनंत के पैर जमीन पर नहीं टीके और उन्होंने आपराधिक घटनाओं के साथ जमीन पर कब्जा सहित अन्य अवैध कामों को अंजाम दिया। कई बार मामला कोर्ट तक गया लेकिन ललन सिंह और सरकार का संरक्षण पाकर वह हर बार बच निकले।


 
Top