युगवार्ता

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भाजपा बम बम, विपक्ष बेदम

05/10/2019

भाजपा बम बम, विपक्ष बेदम

सुधीर जोशी

कांग्रेस, राकांपा छोड़कर भाजपा, शिवसेना में शामिल हुए नेताओं की संख्या तथा कमजोर विपक्ष के मद्देनजर यह लग रहा है कि इस बार भी मुख्यमंत्री के रूप में देवेंद्र फडणवीस ही शपथ लेंगे।

लोकसभा चुनाव में बड़ी सफलता पाने के बाद भाजपा ने महाराष्ट्र में फिर से सत्ता प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है। वैसे तो सभी राजनीतिक दल अपनी अपनी जीत का दावा कर रहे हैं, लेकिन कांग्रेस, राकांपा छोड़कर भाजपा, शिवसेना में शामिल हुए नेताओं की संख्या तथा कमजोर विपक्ष के मद्देनजर यह लग रहा है कि इस बार भी भाजपा ही सबसे बड़े दल के रूप में सामने आएगी और मुख्यमंत्री के रूप में देवेंद्र फडणवीस एक बार फिर शपथ लेंगे। सीटों के बंटवारे को लेकर आपसी खींचतान के बाद आखिरकार अंदरखाने की खबरों के मुताबिक भाजपा 144 और शिवसेना 126 सीटों पर लड़ने पर सहमत हो गई है। बाकी की 18 सीटों पर सहयोगी दल चुनाव लड़ेंगे।
2014 का विधानसभा चुनाव अपने बूते पर लड़ने वाली शिवसेना इस बार भाजपा के साथ मिलकर लड़ रही है क्योंकि कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद भाजपा के जनाधार में जबर्दस्त वृद्धि हुई है। हालांकि राकांपा तथा कांग्रेस के कुछ दिग्गजों के शिवसेना में प्रवेश के कारण शिवसेना की ताकत बढ़ी है। साथ ही आदित्य ठाकरे की जनाशीर्वाद यात्रा के कारण भी उसकी राजनीतिक ताकत में इजाफा हुआ है। बावजूद इसके अकेले दम पर वह सौ सीटें भी नहीं जीत सकती है। भले ही भाजपा पर दबाव डालने के लिए शिवसेना नेता जो भी बयान देते रहे हों लेकिन जमीनी हकीकत से वह भी पूरी तरह से वाकिफ है।
बहरहाल, महाराष्ट्र का चुनावी रण अन्य राज्यों से अलग नहीं है। यहां भी जातिवादी समीकरण कम नहीं है। यहां की राजनीति में मराठा समाज का वर्चस्व रहा है। इसके बावजूद ब्राह्मण देवेंद्र फडणवीस ने न केवल पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा किया बल्कि भाजपा को सेठ जी भट्टजी की छवि से बाहर निकालकर सभी समाज के लोगों की पार्टी का दर्जा प्रदान किया। 38 प्रतिशत मराठी भाषा भाषी लोगों वाली मुंबई नगरी में विधानसभा के 36 निर्वाचन क्षेत्र आते हैं, जबकि उसके पड़ोसी ठाणे तथा पालघर के अंतर्गत आने वाले 24 निर्वाचन क्षेत्रों को मिला दें तो 60 निर्वाचन क्षेत्र हो जाते हैं। मुंबई तथा ठाणे इन दोनों जिलों में रहने वाले लोगों में राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, बिहार और बंगाल से नौकरी तथा व्यवसाय की दृष्टि से आए लोगों की संख्या भी अच्छी खासी है।
मुंबई में भाजपा के प्रति ज्यादा झुकाव का कारण यहां उत्तर भारतीयों की बढ़ती संख्या है। पूर्व कांग्रेसी नेता कृपाशंकर सिंह के भाजपा में प्रवेश करने तथा मंगलप्रताप लोढ़ा के मुंबई भाजपा अध्यक्ष बनाए जाने से उत्तर भारतीयों के साथ साथ राजस्थानी समाज के लोग भी भाजपा के प्रति विशेष आकर्षित हुए हैं। इस चुनावी घमासान में भाजपा, शिवसेना, कांग्रेस, राकांपा, मनसे, एमआईएम, वंचित बहुजन आघाड़ी समेत कुछ अन्य छोटे दल अपने अपने उम्मीदवारों के साथ उतरेंगे। हालांकि भाजपा सबसे ज्यादा मजबूत स्थिति में है। भाजपा ने पिछले विधानसभा चुनाव में 122 सीटें जीती थीं, जो बहुमत से सिर्फ 23 सीटें कम थी। ज्यादातर लोग यही मानकर चल रहे हैं कि पिछली बार की तरह इस बार भी राज्य में भाजपा शिवसेना गठबंधन तथा देवेद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार बनेगी। राज ठाकरे की पार्टी मनसे ने भी 122 सीटों पर उम्मीदवार उतारने का निर्णय लिया है।
भाजपा शिवसेना गठबंधन को चुनौती देने के लिए कांग्रेस तथा राकांपा ने 125-125 सीटों का बंटवारा किया है, जबकि मित्र पक्षों के लिए 38 सीटें रखी हैं। इस सबसे इतर मिस्टर क्लीन की छवि रखने वाले देवेंद्र फडणवीस ने पांच वर्ष राज्य में सफलतापूर्वक सरकार चलायी। हालांकि उन्हें सरकार में शामिल शिवसेना के भयंकर विरोध का सामना करना पड़ा है। इसके अलावा फडणवीस को मराठा समाज, किसानों, आंगनवाड़ी सेविकाओं, शिक्षकों, प्रशिक्षु डॉक्टरों, सरकारी कर्मचारियों के भी विरोध का सामना करना पड़ा है।
सर्वोत्तम कामगिरी, महाराष्ट्र मानकरी के जरिए पांच साल में किए गए विकास कार्यों का उल्लेख करके लोगों के बीच अपने कार्यों की जानकारी देने वाली फडणवीस सरकार के किये गये कामों की सूची भले ही बहुत बड़ी हो लेकिन उनके कार्यकाल में किसानों की आत्महत्या, बेरोजगारी, विकास पर ब्रेक, जल समस्या, अकाल जैसी समस्याओं का सामना भी लोगों को करना पड़ा है।


 
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