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स्वतंत्र भारत की एकता के सूत्रधार-लौह पुरुष "सरदार वल्लभ भाई पटेल"

31/10/2019

स्वतंत्र भारत की एकता के सूत्रधार-लौह पुरुष "सरदार वल्लभ भाई पटेल"


दरभंगा, 31 अक्टूबर (हि.स.)। स्वतंत्र भारत की एकता के सूत्रधार माने जाने वाले और भारत के 'लौह-पुरुष' सरदार वल्लभभाई पटेल की आज जयंती है। ये सरदार पटेल ही थे, जिन्होंने 1947 से 1950 के बीच सैकड़ों राजाओं और नवाबों की रियासतों का भारत में विलय कर एक विशाल राष्ट्र का निर्माण किया। बहरहाल, भारत सरकार ने देश की एकता और अखंडता के क्षेत्र में अविस्मरणीय योगदान के लिए सरदार पटेल के नाम पर एक नागरिक सम्मान शुरू करने का निर्णय लिया है जिसमें एक पदक और एक प्रशस्ति पत्र होगा। यह सम्मान विशेष स्थिति और अत्यधिक सुयोग्य मामलों को छोड़कर मरणोपरांत प्रदान नहीं किया जाएगा। साथ ही इस पुरस्कार के साथ कोई भी मौद्रिक राशि या नकद पुरस्कार संबद्ध नहीं होगा। इस पुरस्कार की घोषणा राष्ट्रीय एकता दिवस यानी सरदार पटेल की जयंती 31 अक्टूबर को की जाएगी। 

31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नाडियाद में एक किसान परिवार में जन्मे सरदार वल्लभ भाई पटेल एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी तथा आजाद भारत के पहले गृहमंत्री थे। स्वतंत्रता की लड़ाई में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिसके कारण उन्हें भारत का लौह पुरुष भी कहा जाता है।  सरदार पटेल की प्रारंभिक शिक्षा का प्रमुख श्रोत स्वाध्याय रहा। बाद में उन्होंने लंदन से बैरिस्टर की पढ़ाई की और उसके बाद पुन: भारत वापस लौटकर अहमदाबाद में वकालत शुरू की। इसी दौरान सरदार पटेल ने महात्मा गांधी से प्रेरित होकर स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया। सरदार पटेल को सरदार नाम बारडोली सत्याग्रह के दौरान मिला।

 उन्होंने आज़ादी के बाद उपप्रधानमंत्री और ग्रहमंत्री का पदभार संभाला। जिसके बाद उनकी पहली प्राथमिकता देसी रियासतों का विलय भारत में करना रहा। इस कार्य को उन्होंने बगैर किसी बड़े लड़ाई-झगड़े के बाखूबी अंजाम दिया। 15 अगस्त, 1947 तक हैदराबाद, कश्मीर और जूनागढ़ को छोड़कर शेष भारतीय रियासतें भारत संघ में सम्मिलित हो चुकी थीं। जोकि भारतीय राजनीतिक इतिहास की एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।

 जूनागढ़ के नवाब के विरुद्ध जब वहां की प्रजा ने विद्रोह कर दिया तो वह भागकर पाकिस्तान चला गया और इस प्रकार जूनागढ़ को भी भारत में मिला लिया गया। फिर जब हैदराबाद के निजाम ने भारत में विलय का प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया तो सरदार पटेल ने वहां सेना भेजकर निजाम का आत्मसमर्पण करा लिया।  

हिन्दुस्थान समाचार/मनोज/रोहित/सुभाष  





 
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