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स्टैच्यू ऑफ यूनिटी:राष्ट्रीय गौरव एवं एकता का प्रतीक

30/10/2019

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी: राष्ट्रीय गौरव एवं एकता का प्रतीक
-इंजीनियरिंग का अद्भुत नमूना है ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’

योगेश कुमार गोयल
वर्ष 2014 से लौहपुरूष सरदार पटेल की जयंती 31 अक्टूबर को ‘राष्ट्रीय एकता दिवस’ के रूप में मनाया जा रहा है। पिछले वर्ष इस विशेष अवसर को और भी विशिष्ट बनाया, उसी दिन राष्ट्र को समर्पित किए गए ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ (एकता की मूर्ति) ने, जो वास्तव में करीब साढ़े पांच फुट ऊंचे रहे सरदार वल्लभ भाई पटेल की उनकी ऊंचाई से सौ गुना से भी ज्यादा ऊंची लौह से निर्मित दुनिया की सबसे ऊंची गगनचुंबी प्रतिमा है, यह भारतीय इंजीनियरिंग कौशल का एक अद्भुत नमूना है। स्टैच्यू आफ यूनिटी को राष्ट्रीय गौरव एवं एकता का प्रतीक माना गया है, साथ ही इसे भारत के इंजीनियरिंग कौशल तथा परियोजना प्रबंधन क्षमताओं का सम्मान भी बताया गया है। गुजरात के नर्मदा जिले के केवडि़या में साधु आईलैंड में स्थित 182 मीटर ऊंची सरदार पटेल की यह विशाल और अद्भुत प्रतिमा विश्वभर में इस तरह की सबसे ऊंची प्रतिमा है। मूर्ति सरदार सरोवर बांध से 3.2 किलोमीटर दूर साधु बेट नामक स्थान पर स्थापित की गई है, जो नर्मदा नदी का एक टापू है। गुजरात के मुख्यमंत्री रहते नरेन्द्र मोदी ने सरदार वल्लभ भाई पटेल की 138वीं जयंती के अवसर पर 31 अक्टूबर 2013 को नर्मदा जिले के साधु आईलैंड में सरदार वल्लभ भाई पटेल के इस नए स्मारक का शिलान्यास किया था, जिसे 31 अक्टूबर 2018 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ही देश को समर्पित किया।
‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ बनाने में करीब 44 महीनों का समय लगा। इस प्रतिमा ने दुनियाभर की तमाम ऊंची और आलीशान मूर्तियों को पीछे छोड़ दिया है। यह अमेरिका के विश्वविख्यात ‘स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी’ से करीब दो गुना ऊंची है। बता दें कि ‘स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी’ की ऊंचाई 93 मीटर है। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की कुल ऊंचाई आधार सहित 240 मीटर है, जिसमें 58 मीटर का आधार और 182 मीटर की मूर्ति है। 182 मीटर (लगभग 597 फुट) ऊंची इस मूर्ति की विशेषता यह है कि इसे सात किलोमीटर की दूरी से भी देखा जा सकता है। इस आलीशान, विशालकाय और भव्य प्रतिमा के निर्माण पर करीब तीन हजार करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। मुख्य संरचना पर 1345 करोड़ रुपये की लागत आई, जो इस परियोजना के लिए आवंटित कुल 2979 करोड़ रुपये का एक बड़ा हिस्सा है। इसके अलावा प्रदर्शनी हॉल तथा कन्वेंशन सेंटर के निर्माण पर 235 करोड़ रुपये, स्मारक को मुख्य भूमि से जोड़ने के लिए पुल पर 83 करोड़ रुपये खर्च किए गए तथा आगामी 15 वर्षों तक संरचना को बनाए रखने के लिए 657 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ के बाद विश्व की दूसरी सबसे ऊंची मूर्ति है चीन में ‘स्प्रिंग टैम्पल बुद्धा’, जिसकी आधार सहित कुल ऊंचाई है 208 मीटर अर्थात् लगभग 682 फुट। ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ का आधार त्रिस्तरीय है, जिसमें प्रदर्शनी फ्लोर, छज्जा और छत शामिल हैं। छत पर स्मारक उपवन, विशाल संग्रहालय तथा प्रदर्शनी हॉल है, जिसमें सरदार पटेल के जीवन तथा उनके योगदान को दर्शाया गया है। नदी से 500 फुट ऊंचे ऐसे ऑब्जर्वर डेक का निर्माण भी किया गया है, जिसमें एक ही समय में करीब दो सौ लोग ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ का निरीक्षण कर सकते हैं। नाव के द्वारा सिर्फ पांच मिनट में मूर्ति तक पहुंचा जा सकता है। एक ऐसा आधुनिक पब्लिक प्लाजा भी बनाया गया है, जिसमें खान-पान के स्टॉल, उपहार की दुकानें, रिटेल और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं और यहां से नर्मदा नदी तथा मूर्ति भी देखी जा सकती हैं। ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ कम्पोजिट प्रकार का ऐसा स्ट्रक्चर है, जिसमें वर्षों तक जंग नहीं लगेगा। सरदार वल्लभ भाई पटेल की इस विशालकाय मूर्ति में चार धातुओं का उपयोग किया गया है। इस स्टैच्यू में करीब 85 फीसदी तांबे का इस्तेमाल किया गया है। इस मूर्ति के निर्माण में 5,700 मीट्रिक टन स्टील संरचना तथा 18,500 मीट्रिक टन रीइनफोर्समेंट बार्स (स्टील की छड़) का इस्तेमाल किया गया। मूर्ति के निर्माण में सबसे बड़ी चुनौती थी इसका भूकम्प तथा अन्य आपदाओं से बचाव करना और इंजीनियर इसे इस रूप में तैयार करने में सफल रहे कि यह स्टैच्यू 180 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चलने वाली हवा में भी स्थिर खड़ा रहेगा और यह 6.5 तीव्रता के भूकम्प को भी आसानी से सह सकता है। स्टैच्यू आफ यूनिटी परियोजना करीब 22 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में फैली हुई है।
सरदार पटेल की यह भव्य प्रतिमा दिखने में जितनी विशेषता समेटे हुए है, इसकी बनावट भी उतनी ही विशेष है। मूर्ति के नीचे के हिस्से को ऊपरी हिस्से की तुलना में थोड़ा पतला किया गया है। इस मूर्ति के निर्माण का कार्य केन्द्र में मोदी सरकार के सत्तारूढ़ होने के बाद अक्टूबर 2014 में ‘लार्सन एंड टूब्रो’ कंपनी को सौंपा गया था, जिसने 44 महीनों में इसे दुनिया के सबसे ऊंचे और भव्य स्टैच्यू के रूप में तैयार कर भारत का नाम दुनियाभर में रोशन किया। यह दुनिया में सबसे कम समय में तैयार होने वाली प्रतिमाओं में से एक है। इस प्रतिमा के निर्माण में भारतीय मजदूरों के साथ 200 चीनी कर्मचारियों ने भी योगदान दिया। मूर्ति बनाने के लिए तीन हजार से भी ज्यादा लोगों और करीब ढ़ाई सौ इंजीनियरों ने कड़ी मेहनत की। इंजीनियरों की टीम ने सरदार पटेल की भव्य प्रतिमा के निर्माण कार्य को मॉक-अप, 3-डी, स्कैनिंग तकनीक तथा कम्प्यूटर न्यूमैरिकल कंट्रोल प्रोडक्शन तकनीक, इन चार चरणों में पूरा किया। लौहपुरूष सरदार पटेल की इस मूर्ति के निर्माण में लाखों टन लोहा और तांबा लगा है। इसके निर्माण के लिए करीब 135 मीट्रिक टन लोहा लोगों से एकत्रित किया गया। मूर्ति को बनाने के लिए लोहा देशभर के करीब सात लाख गांवों के किसानों से खेती के कार्य इस्तेमाल होने वाले पुराने और बेकार हो चुके औजारों का संग्रह करके जुटाया गया। यह स्टैच्यू बनाने में करीब 22,500 मीट्रिक टन सीमेंट का इस्तेमाल किया गया और इस प्रोजेक्ट में एक लाख 70 हजार क्यूबिक मीटर कंक्रीट तथा दो हजार मीट्रिक टन कांसे का भी इस्तेमाल हुआ। मूर्ति बनाने में 1,700 टन तथा मूर्ति की बाहरी संरचना बनाने में 1,850 टन कांसे का इस्तेमाल हुआ है। सरदार पटेल की मूर्ति के ऊपर कांसे की क्लीयरिंग है।
सरदार वल्लभ भाई पटेल की इस मूर्ति में दो तेज गति वाली लिफ्ट लगाई गई हैं, जिनके जरिये सरदार पटेल के स्टैच्यू की छाती तक आसानी से पहुंचा जा सकता है, जहां से खूबसूरत वादियों के मनोहारी दृश्यों का आनंद लेने के साथ-साथ सरदार सरोवर बांध का दिलकश नजारा भी दिखाई देगा। स्टैच्यू की छाती के पास झरोखे बनाए गए हैं और इन्हीं झरोखों से सरदार सरोवर डैम को पूरा देखा जा सकता है। स्टैच्यू में की गई लेजर लाइटिंग की व्यवस्था के कारण दिन-रात इसकी रौनक एक समान बरकरार रहेगी। इस स्टैच्यू के नीचे एक म्यूजियम तैयार किया गया है, जहां सरदार पटेल की स्मृति से जुड़ी बहुत सारी वस्तुएं रखी गई हैं। आने वाले समय में पर्यटकों के ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ तक पहुंचने के लिए पुल और बोट की व्यवस्था भी की जाएगी। सरदार पटेल की इस मूर्ति से करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर एक टेंट सिटी बनाई गई है, जो 52 कमरों का श्रेष्ठ तीन सितारा ‘भारत भवन’ होटल है, जहां पर्यटक रातभर रूककर विश्राम कर सकते हैं। 
सबसे बड़ी और रोचक बात यह है कि स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के प्रति पर्यटकों का आकर्षण काफी हद तक वैसा ही देखा जा रहा है, जैसा अमेरिका के 133 वर्ष पुराने स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी के प्रति देखा जाता रहा है। न्यूयॉर्क हार्बर पर लिबर्टी द्वीप पर स्थित ‘स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी’ को देखने के लिए जहां प्रतिदिन लगभग 10 हजार पर्यटक पहुंचते हैं, वहीं ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ को देखने के लिए लगभग साढ़े आठ हजार पर्यटक रोजाना आते हैं। इसी साल 17 सितम्बर को अपने जन्मदिन के अवसर पर ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी ने ही बताया था कि इस स्टैच्यू को देखने के लिए प्रतिदिन औसतन करीब 8,500 पर्यटक पहुंच रहे हैं। ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ को आम जनता के लिए खोले जाने के एक वर्ष के भीतर इसका दीदार करने के लिए देश-विदेश से 25 लाख से भी अधिक पर्यटक यहां पहुंचे। इस साल जन्माष्टमी वाले दिन तो यहां पहुंचने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़कर करीब 34 हजार हो गई थी। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के अनावरण के शुरूआती 11 दिनों में इसे देखने पहुंचे पर्यटकों की संख्या एक लाख 28 हजार से भी ज्यादा थी और इसके अनावरण के शुरूआती दिनों के दौरान सप्ताहांत में यहां करीब 50 हजार पर्यटक पहुंचे थे। रखरखाव के लिए प्रत्येक सोमवार को ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ स्मारक को आम जनता के लिए बंद रखा जाता है।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं)


 
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