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​नौसेना को मिला ​पहला पनडुब्बी रोधी ​टारपीडो ​​'वरुणास्त्र​'​

21/11/2020

​- ​ डीआरडीओ सचिव जी​.​ सतीश रेड्डी ने ​​हरी झंडी दिखाकर रवाना किया

सुनीत निगम 
नई दिल्ली, 21 नवम्बर (हि.स.)​​​ भारतीय नौसेना को पहला भारी वजन वाला पनडुब्बी रोधी टारपीडो 'वरुणास्त्र' शनिवार को मिल गया जिससे भारत की समुद्री ताकत बढ़ेगी​ रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग ​(​​​​डीआरडीओ) ​के सचिव जी​.​ सतीश रेड्डी ने ​आज ​पहले वरुणास्त्र को ​​हरी झंडी दिखाकर रवाना किया​ ​​भारत डायनामिक्स लिमिटेड​ ​(​​​बीडीएल​)​​ की ​विशाखापत्तनम इकाई में आयोजित एक समारोह में ​उन्होंने अत्याधुनिक केंद्रीय भंडार स्थापित करने की आधारशिला ​भी ​रखी।

वरुणास्त्र एक भारतीय उन्नत दिग्गज पनडुब्बी रोधी टारपीडो है। इसका विकास रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के नौसेना विज्ञान और तकनीकी प्रयोगशाला (एनएसटीएल) ने किया है। भारत डायनामिक्स लिमिटेड​ ​(​​​बीडीएल​)​ अपने विभिन्न मिसाइल कार्यक्रमों के लिए ​​डीआरडीओ​ ​से जुड़ा हुआ है​ यह क्विक रिएक्शन सरफेस टू एयर मिसाइल (​क्यूआरएसएएम) के लिए उत्पादन एजेंसी है, जिसके हाल ही में सफलतापूर्वक परीक्षण किए गए थे​​ वरुणास्त्र टारपीडो का जहाज औपचारिक रूप से 26 जून​,​ 2016 को ​तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ​ने भारतीय नौसेना में शामिल किया था।​ ​भारतीय नौसेना के लिए 73 तारपीडो का ​निर्माण किया जाना है।

​रक्षा मंत्रालय की उत्पादन एजेंसी होने के नाते भारत डायनामिक्स लिमिटेड अपनी विशाखापत्तनम इकाई में भारतीय नौसेना के लिए पनडुब्बी रोधी टारपीडो वरुणास्त्र का निर्माण कर रही है। बीडीएल एस्ट्रा एयर-टू-एयर मिसाइल सिस्टम के लिए उत्पादन एजेंसी भी है और इन मिसाइलों के निर्माण की शुरुआत की है। इन मिसाइल प्रणालियों को भारतीय वायु सेना के लिए डीआरडीओ ने स्वदेशी रूप से विकसित किया है। पहले वरुणास्त्र के निर्माण के लिए सतीश रेड्डी ने सभी हितधारकों, विशेष रूप से डिजाइन एजेंसी (एनएसटीएल) और उत्पादन एजेंसी (​​​बीडीएल​)​ के बीच तालमेल की सराहना की।

हिन्दुस्थान समाचार


 
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