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भारत और ईरान के रिश्ते सदियों पुराने : अली रब्बानी

07/11/2019

एम.ओवैस
नई दिल्ली, 07 नवम्बर (हि.स.)। भारत स्थित ईरान कल्चरल हाउस में नवनियुक्त कल्चरल काउंसलर मोहम्मद अली रब्बानी ने गुरुवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा है कि भारत और ईरान के रिश्ते सदियों पुराने हैं और दोनों देशों की संस्कृति और सभ्यता में समानता की झलक देखने को मिलती है। उन्होंने कहा कि भारत और ईरान के बीच सांस्कृतिक सम्बंधों को और मजबूत बनाने के लिए वह हरसंभव प्रयास करेंगे।

मोहम्मद अली रब्बानी ने कहा कि भारत और ईरान के बीच सांस्कृतिक सम्बंधों के आदान-प्रदान के लिए हमेशा से कोशिशें होती रही हैं। उन्होंने कहा कि भारत में फारसी भाषा के विकास और उत्थान के लिए भी ईरान और भारत सरकार मिलकर काम कर रहे हैं। भारत के विश्वविद्यालयों में फारसी भाषा को बढ़ावा देने के लिए ईरान की तरफ से हरसंभव सहयोग किया जा रहा है। भारत में फारसी भाषा का सुनहरा इतिहास रहा है। फारसी के कई बड़े शायर और विद्वान यहां पर हुए हैं। उन्होंने कहा कि इसके अलावा ईरानी शिल्पकारों के जरिए बनाई जाने वाली टाइल्स, कालीन, हैंडीक्राफ्ट के आइटम की मांग भारत में हमेशा से रही है। ईरानी दस्तकार भारत में लगने वाली प्रदर्शनी आदि में हिस्सा लेते रहे हैं। भारत के भी शिल्पकारों को ईरान में लगने वाली प्रदर्शनी आदि में हिस्सा लेने का मौका मिलता है। 
रब्बानी ने बताया कि दिल्ली स्थित ईरान कल्चरल हाउस में ईरानी दस्तकारों द्वारा निर्मित हैंडीक्राफ्ट की एक एक प्रदर्शनी लगाई गई है। यहां पर दस्तकारों के जरिए बनाई जाने वाली अनेक प्रकार की हस्तशिल्प के नमूनों को प्रदर्शित किया गया है। उन्होंने बताया कि भारत में ईरान कल्चर हाउस की तरफ से हर साल पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के जन्म दिवस के उपलक्ष में एक प्रतियोगिता आयोजित की जाती है। इस प्रतियोगिता में देश भर से कुरान के कारी को बुलाया गया है। इस प्रतियोगिता में जीतने वाले कारी को पुरस्कृत भी किया जाता है। इस साल इस प्रतियोगिता के लिए 220 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिसमें से 120 आवेदन का चयन किया गया है। उन्होंने बताया कि इस प्रतियोगिता के माध्यम से मुसलमानों के विभिन्न समुदायों के बिच आपसी सौहार्द और एकता को बढ़ावा देने में बल मिलता है।

हिन्दुस्थान समाचार


 
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