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आतिश तासीर का ओसीआई स्टेटस लिया गया वापस

08/11/2019

अनूप/सुफल

नई दिल्ली, 08 नवम्बर (हि.स.)। पाकिस्तानी पिता और भारतीय पत्रकार मां के बेटे लेखक एवं पत्रकार आतिश अली तासीर का ‘ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया’ (ओसीआई) का स्टेटस वापस ले लिया गया है। भारतीय मूल के लोगों को सुगमतापूर्वक भारत यात्रा के लिए दिया जाने वाला ओसीआई कार्ड अब आतिश को 15 दिन के भीतर न्यूयार्क स्थित भारतीय दूतावास में जमा कराना होगा।

गृह मंत्रालय ने एक ट्वीट में इसकी जानकारी दी है। मंत्रालय का कहना है कि तासीर ने इस बात को छुपाया था कि उनके पिता पाकिस्तान से थे। इसी कारण उन्हें ‘ओवरसीज सीटिजन ऑफ इंडिया’ (ओसीआई) के कार्ड के लिए ‘अयोग्य’ ठहराया गया है।

ओसीआई स्टेटस खत्म होने के बाद तासीर को भारत आने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। तासीर ने कहा है कि उन्हें भारत की नागरिकता से वंचित करने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस सहित विभिन्न राजनीतिक दलों तथा देश -विदेश के विभिन्न पत्रकार व लेखक संगठनों ने भी सरकार के इस फैसले की आलोचना की है।

समाचार पत्रों में लेख लिखने वाली पत्रकार तवलीन सिंह का पाकिस्तान के नेता सलमान तासीर से ब्रिटेन में रहने के दौरान थोड़े समय के लिए संबंध रहा था। दोनों ने आपस में शादी नहीं की। आतिश दोनों की संतान है और ब्रिटेन के नागरिक हैं।

ओसीआई विदेश में रह रहे भारतीय मूल के लोगों को असिमित समय के लिए भारत में आकर रहने और काम करने की सुविधा प्रदान करता है। इसे पाने की बुनियादी शर्तों में शामिल है कि व्यक्ति के माता-पिता, दादा-दादी या उनके माता व पिता पाकिस्तानी नहीं होने चाहिए। 2005 से पहले ओसीआई के स्थान पर ‘पर्सन ऑफ इंडियन ओरिजन’(पीआईओ) का स्टेटस दिया जाता था। आतिश तासीर ने 2000 में पीआईओ का स्टेटस हासिल किया था और इसके बाद 2016 में इसे ओसीआई में बदल दिया गया था।

गृह मंत्रालय के अनुसार तासीर को अपना जवाब देने का समय दिया गया था लेकिन वह ऐसा नहीं कर पाए। इसी के चलते नागरिकता कानून 1955 के तहत उन्हें ओसीआई कार्ड के लिए अयोग्य माना गया है। मंत्रालय का कहना है कि उन्होंने बुनियादी जरूरतों को पूरा नहीं किया और जानकारी छिपाई।

सलमान तासीर के पिता पाकिस्तान राजनीति में सक्रीय नेता थे। 2011 में पाकिस्तान के पंजाब राज्य के राज्यपाल रहते हुए उन्हीं के सुरक्षा गार्ड ने उनकी ‘ईशनिंदा’ से जुड़े कानून का विरोध करने पर हत्या कर दी थी।

एक समाचार पोर्टल आतिश तासीर ओसीआई स्टेटस को उनके टाइम्स मैगजीन में लिखे गए एक लेख से जोड़ते हुए खबर चलाई थी। पोर्ट का कहना था कि प्रधानमंत्री मोदी के विरोध में लिखे गए लेख ‘डिवाइडर इन चीफ’ के चलते उनका ओसीआई स्टेटस वापस लिया गया है। हालांकि गृह मंत्रालय ने इस आरोप को पूरी तरह से खारिज करते हुए कहा कि ऐसा इसलिए किया गया है कि अपने फॉर्म में उन्होंने अपने पिता से जुड़ी जानकारी छिपाई है।

आतिश तासीर ने ओसीआई स्टेटस समाप्त किए जाने के बाद एक लेख लिखा है, जिसमें खुद को भारतीय बताते हुए उन्होंने कहा है कि सरकार ने उन्हें निर्वासन पर भेज दिया है। ओसीआई एक तरह से ‘दोहरी नागरिकता’ की तरह है, जिसका लाभ दुनिया भर में रह रहे लाखों भारतीय उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ओसीआई स्टेटस हटाना टाइम्स मैग्जीन में लिखे उनके लेख के चलते हुआ है। उनका कहना है, “मेरी सोच पश्चिमी है। मैं अंग्रेजी बोलता हूं। मैं तिरस्कृत अभिजात वर्ग का हिस्सा हूं, जिसकी शक्ति मोदी के उदय का कारण बनी। हालांकि मेरी पहचान का एक और पहलू था जिसके चलते मुझपर हमले हो रहे हैं। मेरे पिता का जन्म ब्रिटिश भारत में एक ब्रिटिश मां और पिता के घर हुआ था, जिन्होंने पाकिस्तान बनने पर वहां की नागरिकता ले ली। मेरे लेख के प्रकाशित होने के चौबीस घंटे के भीतर ही भाजपा के प्रवक्ता संबित पात्रा ने इसे कारण बनाते हुए मुझे अयोग्य ठहराने की बात की।”

आतिश ने आगे लिखा है कि उनके पिता से उनका संबंध काफी जटिल रहा है। वह उनसे 21 वर्ष का होने पर मिले थे। उनके पास ब्रिटेन की नागरिता थी। हालांकि दो साल की उम्र से वह भारत में ही पले-बढ़े हैं। भारत में काफी ख्यातिप्राप्त पत्रकार माता तवलीन सिंह ने ही उनका पालन पोषण किया है। तासीर ने कहा कि उन्होंने अपनी पहली पुस्तक में ही अपने माता-पिता के संबंधों के बारे में लिखा था। इसका प्रकाशन 2009 में हुआ था और तब वह भारत में ही रह रहे थे। तब किसी ने उनकी कानूनी स्टेटस पर सवाल नहीं उठाए।

हिन्दुस्थान समाचार


 
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