यथावत

Blog single photo

कोरोना तोड़ रहा कई मिथक

04/05/2020

कोरोना तोड़ रहा कई मिथक

डॉ. राकेश राणा

कोरोना संक्रमण से जिस तरह का विश्व परिदृश्य उभरा उससे कई मिथक टूटे हैं। पहला तो यही कि जिस यूरोप को अपने ज्ञान-विज्ञान पर इतना भरोसा था, वह उसी में उलझकर हताश और निराश नजर आया। दूसरे एशिया को जितना पर-निर्भर माना जाता रहा है और उसके मॉडल को कभी तरजीह नहीं दी गई, यह गलत साबित हुआ। यह मिथक भी टूट गया कि सिर्फ गैर-लोकतांत्रिक सरकारें ही किसी आपात स्थिति में त्वरित गति से हस्तक्षेप कर संकट से सफलतापूर्वक जूझ पाती हैं। साथ ही दुनिया को अब इस गलतफहमी से भी उबर जाना चाहिए कि छोटे देश ही सुशासन और प्रभावी तरीके से अपने सार्वजनिक क्षेत्र का संचालन कर पाते हैं। इस महामारी में यह भी समझ आया होगा कि दुनिया को सिर्फ राजनैतिक नेताओं और अपने बगल बच्चे बुद्धिजीवियों तथा चाटुकार पत्रकारों के स्तर पर ही एकदूसरे से अंत:क्रियाएं कर कामों की इति नहीं समझ लेनी चाहिए। चूंकि दुनिया अब बदल चुकी है, ग्लोबलाइजेशन सिर्फ अच्छी-अच्छी चीजों का ही नहीं होगा।

विश्व संचालन का केन्द्र समझे जाने वाले अमेरिका की पोल सबसे ज्यादा खुली। नई शक्ति के संकेत देता दक्षिण
कोरिया, यह बताने में सफल रहा कि सामुदायिक सशक्तिकरण के साथ कैसे, कितने भी बड़े संकट से आत्मविश्वास के साथ जूझा जा सकता है और उस पर पार पाया जा सकता है।

गुलगुले सबको चाहिए और गुड़ से परहेज नहीं चलेगा। ग्लोबलाइजेशन की प्रक्रिया में संकट भी साझे झेलने पड़ेंगे। सब इतने जुड़े हैं कि बीमारियां-महामारियां भी आसानी से एक-दूसरे तक पहुचेंगी। इसलिए सभी सार्वजनिक क्षेत्रों और सेवाओं से जुड़े विशेषज्ञों को विश्व स्तर पर निरन्तर अपने अनुभवों, अनुसंधानों और सूचनाओं को साझा करने की एक वैश्विक संस्कृति विकसित करनी होगी। अपने डॉक्टर्स और प्लानर्स तथा मध्यम स्तरीय नौकरशाहों को भी यह वैश्विक एक्सपोजर समय-समय पर कराते रहने की जरूरत होगी। तभी ऐसे वैश्विक संकटों से बेहतर ढंग से पार पाया जा सकेगा। जन-स्वास्थ्य जैसे मुद्दों का भी वैश्विक रणनीति के मुख्य एजेंडे में शामिल होना जरूरी है। सिर्फ व्यापार आधारित सम्मेलनों से दुनिया आगे बढ़ने के बजाए पिछड़ती चली जायेगी। सामाजिक कल्याण के क्षेत्रों को फालतू मानकर दुनिया भारी घाटे की तरफ बढ़ रही है। इसलिए जरूरी है कि ज्ञान-विज्ञान से जुड़े लोग, नयी उर्जा और सृजनात्मक क्षमता वाले युवा वैज्ञानिक, सामाजिक क्षेत्रों की गहन समझ रखने वाले विशेषज्ञ अंतरराष्टृीय विमर्शों और मंचों पर अपने-अपने समाजों के अनुभव विश्व स्तर पर साझा करें ताकि दुनिया वैश्विक साझेदारी का एक मजबूत आधार खड़ा कर सके और समस्याओं से निपट सके। देर-सबेर कोरोना महामारी से उबरने के बाद समूचे संसार के सम्मुख जो नए ढंग के संकट खड़े होंगे, दुनिया के बाजार और सरकार इसे एक अवसर में बदल लेने की होड़ में लगेंगे।

बहरहाल, अब इस संकट का सफलतम ढ़ंग से वैश्विक एकजुटता के साथ सामना करना है। यह महामारी और उसका अर्थव्यवस्थाओं पर असर एक वैश्विक संकट है। इसका सामना वैश्विक सहयोग से ही संभव है। सबसे पहले तो इस वायरस संक्रमण से निबटने के लिए दुनिया भर के देशों को सूचना का आदान-प्रदान करने वाला एक ठोस विश्वसनीय मैकेनिज्म बनाना होगा।

इस संकट के बाद दुनिया शायद पूरी तरह बदल जाए। यह ठीक वैसे ही घटित होने वाली स्वभाविक प्रक्रिया की तरह सब कुछ घटता जायेगा जैसे किसी भयानक तूफान के बाद सब बदल चुका होता है। उन सियासी कयासों का भी कहीं न कहीं कोई अस्तित्व देर-सबेर उभर सकता है, जो दुनिया की महाशक्तियों अमेरिका और चीन के बारे में दुनिया दबी जुबान बोल रही है। अब यह इनकी कोई चाल है या चूक है, पर पूरी दुनिया एक बड़े खतरे में पड़ गई है, यह सच है। दरअसल, दो बड़ी नायाब तकनीकें दुनिया के शक्तिशाली देशों के पास जमा हो गयी है- पहली इंफॉरमेशन टैक्नोलॉजी और दूसरी बायो-टैक्नोलॉजी। यह सभ्यताओं के विकास और मानवक ल्याण के लिए करिश्मा कर सकती है। जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाले बड़े योगदान कर सकती है। पर जब दुनिया वर्चस्व की होड़ में शामिल हो तो यह कल्याण के बजाए खात्मा भी कर सकती है। कोरोना संक्रमण के सामान्य स्थिति में आते ही बहुराष्ट्रीय निगमों के आर. एण्ड डी. खेमें दिन-रात जुटेंगे, अपनी उन नई तकनीकियों के बाजार विस्तार में जिन्हें इस डर ने सबके लिए जरूरी बना दिया है।

अब आॅनलाइन टैक्नोलॉजी का बाजार बढ़ता जायेगा। उन्हें शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में इसके लिए बड़ी संभावनाएं दिखेंगी। यह कोरोना बहुत कुछ कर जायेगा। गरीब से गरीब देशों की सरकारें भी बायोटैक् नोलॉजी के बडे़ बजट पास कर जायेगी। इनफॉरमेशन टैक्नोलॉजी के लिए निगरानी क्षेत्र में निजता को लेकर जो बाधाएं अभी तक खड़ी थीं, उन सब बचे-खुचे क्षेत्रों में उसे प्रवेश का अब निर्बाध अधिकार प्राप्त होगा। सकबे भले और आपात आवश्यकता के नाम पर यह अवसर बाजार भी भुनायेगा और सरकारें तो तलाश में ही रहती हैं, कि कब लोगों की स्वतंत्रता को कम करने के नियम-कानून हमारे हाथ में आयें। बहरहाल, अब इस संकट का सफलतम ढ़ंग से वैश्विक एकजुटता के साथ सामना करना है। यह महामारी और उसका अर्थव्यवस्थाओं पर असर एक वैश्विक संकट है। इसका सामना वैश्विक सहयोग से ही संभव है। सबसे पहले तो इस वायरस संक्रमण से निपटने के लिए दुनिया भर के देशों को सूचना का आदान-प्रदान करने वाला एक ठोस विश्वसनीय मैकेनिज्म बनाना होगा।

हम सबको वैश्विक बंधुत्व और एकजुटता की भावना के साथ ईमानदार प्रयास से इस कठिन समय को मिलकर जीतना होगा। सभी देशों को इस संबंध में खुल कर जानकारियों का आदान-प्रदान करना होगा। इससे भी आगे बढ़कर जो सक्षम देश हैं, जिनमें कोरोना संक्रमण कम है या नियंत्रण की स्थिति में हैं, उन्हें ऐसे देशों में मशीनें, उपकरण और तकनीकी मदद भेजनी चाहिए जहां संक्रमण अभी पैर पसार रहा हैं। इसी तरह डॉक्टर्स, पैरा- मेडीकल स्टाफ और विशेषज्ञों को एक जगह से दूसरे देश जाकर साहस के साथ मानवता पर आए इस संकट को रोकने में मदद करनी ही चाहिए। इसी क्रम में अर्थव्यवस्थाओं को संभालने के लिए भी एक वैश्विक नीति बने जो विश्व अर्थव्यवस्था को बल प्रदान कर सके। क्योंकि भविष्य में भी ऐसे संकट आते ही रहेंगे। अब दुनिया ग्लोबलाइजेशन के दौर में है। स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़े मुददों पर साझी वैश्विक पहल ही विश्व को ऐसी समस्याओं से निजात दिला सकती है और भविष्य के ऐसे संकटों से निबटने के लिए हम सब मजबूत हो सकेगें। तभी हम यह कहने के सच्चे अधिकारी हैं कि हम सब एक सभ्य विश्व समाज के सभ्य नागरिक हैं। फले-फूलेगा निगरानी तंत्र का बाजार! कोरोना संकट के साथ-साथ दुनिया में निगरानी-तंत्र से जुड़े उपकरण का बाजार तेजी से पनपेगा। स्वास्थ्य क्षेत्र में सक्रिय बहुराष्टÑीय कम्पंनियां विकासशील देशों को भावी खतरों से सुरक्षित करने के नाम पर अपनी गिरμत में लेगी ही, जैसा हमेशा होता रहा है।

यह बड़ा संकट गरीब देशों पर दोहरी मार डालेगा और इनके आर्थिक तंत्र को बुरी तरह लील देगा। यह सब पूरी दुनिया को जरूरी भी लगेगा क्योंकि कारोना संक्रमण के दौरान चीन और दक्षिण कोरिया ने बड़े स्तर पर टैक्नोलॉजी का लाभ लिया और कोरोना संक्रमण पर काबू पाने में कामयाबी हासिल की। यह मॉडल दुनिया के तमाम देशों को भायेगा और वे इसके लिए अतिरिक्त वित्त भार सुरक्षा की दृष्टि से सबको आवश्यक रूप से वहन करने को मजबूर करेगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इस जोखिम के समय में कोरोना संक्रमण को काबू करने में बहुत काम आयी। स्मार्टफोन के जरिए मॉनिटरिंग करने में मदद मिली, वहीं कैमरों से चेहरों की शिनाख्त करने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया। इतना ही नहीं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए लोगों के शरीर का तापमान तक पता कर लिया। गूगल लोकेशन लेकर संक्रमित लोगों पर गिरानी रखी गई, उन्हें एकांत में सबसे अलग रखा गया। टैक्नोलॉजी के माध्यम से यहां तक पता कर लिया गया कि कौन व्यक्ति कहां-कहां पर किस-किस से मिला है। उन सबका गहन परीक्षण, संक्रमण को रोकना सुनिशिचत करने में मददगार रहा। 


 
Top