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केंद्र ने की मप्र की राशि में 2677 करोड़ रुपये की कटौती : भनोत

10/07/2019

मयंक चतुर्वेदी 
भोपाल, 10 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के वित्तमंत्री तरुण भनोत ने बुधवार को राज्‍य का बजट पेश करते हुए केंद्र सरकार पर आर्थ‍िक मामलों को लेकर मध्य प्रदेश के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया है। उन्‍होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा मध्य प्रदेश को दी जाने वाली राशि में 2 हजार 677 करोड़ रुपये की कटौती की गई।

भनोत ने कहा कि भारत सरकार द्वारा वित्‍त‍ीय वर्ष 2018-19 के बजट अनुमान में राजस्‍व प्राप्‍तियों में वृद्धि की दर 20.4 प्रतिशत रखी गई थी जबकि केंद्र सरकार के आर्थ‍िक सर्वेक्षण में प्रकाशित प्रावधिक आंकड़ों के अनुसार यह दर मात्र 8.9 प्रतिशत रही है। केंद्र शासन द्वारा अर्थ व्‍यवस्‍था के समुचित प्रबंधन के अभाव का प्रतिकूल प्रभाव राज्‍य की अर्थ व्‍यवस्‍था पर पड़ना स्‍वभाविक है। 

उन्‍होंने केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि मध्‍य प्रदेश को विभाजनीय करों में हिस्‍सेदारी की राशि में निरंतर कमी हो रही है। विगत वित्‍तीय वर्ष में बजट अनुमान की अपेक्षा लगभग दो हजार करोड़ रुपए कम प्राप्‍त हुए। केंद्र सरकार द्वारा फरवरी 2019 में प्रस्‍तुत अंतरिम बजट के आंकड़ों की तुलना में हाल में लोकसभा के समक्ष प्रस्‍तुत बजट प्रस्‍ताव के अनुसार अब प्रदेश को वर्ष 2019-20 में लगभग 2 हजार 677 करोड़ रुपए कम प्राप्‍त होने का अनुमान है। उन्‍होंने कहा कि हमारा बजट अनुमान अंतरिम बजट के आंकड़ों पर आधारित है। अत: हमें प्रदेश में संसाधनों एवं व्‍ययों की निरंतर समीक्षा कर राजकोषीय उत्‍तरदायित्‍व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम के तहत निर्धारित लक्ष्‍यों की पूर्ति के लिए आवश्‍यक कदम उठाने होंगे। 

भनोत का कहना है कि हमने राज्‍यों के वित्तिय अधिकारों तथा करों में हिस्‍सेदारी कम होने के संबंध में अपनी आशंका से वित्‍त आयोग को अवगत कराया है। आयोग की मध्‍य प्रदेश शासन के साथ हाल ही में बैठक हुई थी। हमने राज्‍य की हिस्‍सेदारी 42 से बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने की मांग रखी है। 

उन्‍होंने कहा कि विगत कुछ वर्षों में केंद्र सरकार ने सेस एवं सरचार्ज बढ़ाकर काफी अधिक राजस्‍व संग्रहण किया है, जिसकी हिस्‍सेदारी राज्‍य के साथ नहीं है। हमने आयोग को ऐसे राजस्‍व को राज्‍य एवं केंद्र के बीच विभाजित करने के लिए संविधान संशोधन प्रस्‍तुत करने की अनुशंसा करने की मांग की है। भनोत का कहना है कि वास्‍तव में सेस एवं सरचार्ज लगाना कोऑपरेटिव फेडरलिज्‍म की भावना के विपरीत है। 

हिन्‍दुस्‍थान समाचार


 
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