युगवार्ता

Blog single photo

एक्शन से भरपूर मनोरंजक ‘साहो’

11/09/2019

एक्शन से भरपूर मनोरंजक ‘साहो’

प्रकाश के रे

दक्षिण की फिल्मों को एक विशेष ट्रीटमेंट की वजह से उत्तर भारत में भी काफी पसंद किया जाता है। शायद यही कारण है कि ‘बाहुबली’ फेम प्रभास जैसे दक्षिण के सुपर स्टार से सजी ‘साहो’ को एक साथ तीन भाषाओं में रिलीज किया गया है। एक्शन और रोमांस से भरी एक बड़े बजट वाली इस फिल्म को देखना सभी चाह रहे हैं।

परदे पर हिंदी, तमिल और तेलुगू भाषाओं में बहुप्रतीक्षित ‘साहो’ आ चुकी है। माना जा रहा है कि सुजीत के निर्देशन में बनी यह फिल्म 2019 की सबसे बड़ी हिट हो सकती है। रिपोर्टों की मानें, तो इस फिल्म को बनाने में 350 करोड़ की लागत आयी है, लेकिन इसने रिलीज से पहले ही वितरकों से करीब तीन सौ करोड़ की अग्रिम कमाई कर ली है। ‘साहो’ को हिट होने के लिए दुनियाभर के थिएटरों से 600 करोड़ की आमदनी करनी होगी। सिनेमा कारोबार के जानकारों का अनुमान है कि सभी भाषाओं में फिल्म 60-70 करोड़ की कमाई से शुरुआत करेगी। इस एक्शन-थ्रिलर में मुख्य भूमिका प्रभाष ने निभायी है और उनकी प्रेमिका के किरदार में श्रद्धा कपूर हैं।
फिल्म के अन्य उल्लेखनीय कलाकारों में जैकी श्रॉफ, चंकी पांडे, नील नितिन मुकेश, मंदिरा बेदी, महेश मांजरेकर, अरुण विजय और मुरली शर्मा है। दक्षिण भारतीय सिनेमा और हिंदी सिनेमा के अनेक स्टार और जाने-पहचाने चेहरों के होने का फायदा ‘साहो’ को जरूर मिलेगा। चूंकि ‘साहो’ एक एक्शन-थ्रिलर है, इस कारण फिल्म का बहुत दारोमदार प्रभाष और एक्शन दृश्यों पर निर्भर करेगा। ‘बाहुबली’ फिल्म के दोनों भागों की बहुत बड़ी कामयाबी की वजह से भी प्रभाष से ज्यादा उम्मीदें बंधी हैं। इस संदर्भ में निर्देशक सुजीत और नायक प्रभाष ने उम्दा काम किया है। एक्शन दृश्यों को फिल्माने के लिए हॉलीवुड के दो नामी स्टंट निर्देशकों- केनी बेटेस और पेंग झांग- की विशेषज्ञ सेवा ली गयी है। प्रभाष ने एक साक्षात्कार में बताया था कि एक खास एक्शन दृश्य के शूटिंग में ही निर्माताओं ने 75 करोड़ रुपये खर्च कर दिए। फिल्म देखते हुए निर्मार्ता-निर्देशकों की गंभीरता का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।
जब भी फिल्म में एक्शन के दृश्य आते हैं, फिल्म बहुत प्रभावी हो जाती है। अनेक दर्शक जब इस फिल्म को देश की बेहतरीन एक्शन फिल्म की संज्ञा दे रहे हैं, तो यह अतिशयोक्ति नहीं है। सिर्फ़ एक्शन के कारण ही फिल्म कम-से-कम एक बार देखने लायक होगी। व्यावसायिक सिनेमा के स्टार सिस्टम व्याकरण के तहत फिल्म में रोमांस और गीतों का होना जरूरी है। गाने कोई खास नहीं हैं, पर उन्हें संगीत का अच्छा साथ मिला है। सुंदर दृश्यों के सेट और लोकेशन तथा नायक व नायिका के सौंदर्य के कारण रोमांस दर्शकों की भावनाओं को भी तुष्ट करता है, साथ ही एक्शन की निरंतरता से कुछ देर के लिए भटकाता भी है। अगर कहानी या कथानक के मर्म के हिसाब से फिल्म की गुणवत्ता को मापने की कोशिश होगी, तो निराशा ही हाथ लगेगी। फिल्म की कहानी मुंबई में दो हजार करोड़ की चोरी और अंडरकवर अधिकारी बने प्रभाष द्वारा अपराधियों को पकड़ने की कथा है। ऐसी कहानी हम अनगिनत दफा सिनेमा और सीरिजों में देख चुके हैं। इसलिए हमें फिल्म का आकलन उसकी मनोरंजन करने की क्षमता के आधार पर करना चाहिए। अपराध कथाओं में ज्यादा किरदार और घटनाक्रम रखने से कहानी ज्यादा असरदार हो जाती है, अगर संतुलित ढंग से उसे दिखाने का प्रयास हो। इस काम में निर्देशक सुजीत कायदे से कामयाब होते हैं।
तकनीक, विशेषकर डिजिटल तकनीक, के बेहतर इस्तेमाल ने दृश्यों को अद्भुत बना दिया है। यह एक्शन और रोमांस दोनों ही हिस्सों में बखूबी दिखता है। निर्देशक की कल्पनाशक्ति को कंप्यूटर की सहायता से वास्तविक बनाने के लिए फिल्म के तकनीकी सहयोगियों की विशेष सराहना की जानी चाहिए। हालांकि ‘बाहुबली’ की वजह से प्रभाष हिंदीपट्टी के दर्शकों के लिए अनजान नहीं हैं, लेकिन ‘साहो’ से उनकी पहचान ठोस होगी। दक्षिण के कमल हासन, रजनीकांत, प्रभुदेवा जैसे कलाकारों का जो मुकाम बना है, वहां पहुंचने में उन्हें अभी वक़्त लगेगा। श्रद्धा कपूर समेत सभी कलाकारों का काम संतोषजनक से अच्छे के दायरे में है, किंतु नील नितिन मुकेश अपनी छाप छोड़ने में सफल रहे हैं। एक बात और विचारणीय है कि ‘बाहुबली’, ‘2 .0’, ‘केजीएफ’, ‘साहो’ जैसी दक्षिण भारत से आ रही फिल्में बॉलीवुड को दबाव में डाल सकती हैं। इस तरह की कुछ फिल्में अगले साल भी आ रही हैं। इस सूत्र पर सलमान खान की ‘दबंग-3’ के दक्षिण भारतीय भाषाओं में भी लाने की योजना है।




 
Top