राष्ट्रीय

Blog single photo

विश्व प्रसिद्ध हुसैन टेकरी पर शुरू हुआ चेहल्लुम , 2 लाख जायरीन आएंगे विश्व भर से

09/10/2019

शरद जोशी
रतलाम, 09 अक्टूबर  (हि.स.)। रतलाम जिले के जावरा स्थित धार्मिक स्थल हुसैन टेकरी की ख्याति देश के कोने-कोने में ही नहीं वरन सात समंदर पार स्थित देशों में विख्यात है। यही वजह है कि प्रतिवर्ष यहां पर आयोजित होने वाले चेहल्लुम में लाखों की संख्या में जायरीन जावरा आकर आस्था का परिचय देते हैं । वर्ष 1882 में बनी हुसैन टेकरी का विस्तार नवाबी रियासत में देश की स्वतंत्रता से पहले हुआ था । 1942 से मातम ए खंदक का आयोजन शुरू हुआ जो आज तक चल रहा है। 1945 में मुंबई के एक व्यापारी ने रौजा बनवाया था । इस वर्ष 9 अक्‍टूबर से 18 अक्‍टूबर तक के दस दिनों में करीब 2 लाख से अधिक जायरीनों के जावरा पहुंचने की उम्मीद है। इस बार अतिवर्षा की वजह से जावरा आने वाले जायरीनों के लिए व्यवस्थाएं जुटाने में टेकरी प्रशासन के पसीने छूट रहे हैं । व्यवस्था की दृष्टि से इस बार प्रशासनिक निर्देश पर चूल की संख्या 2 से बढ़ाकर 3 की जा रही है। बरसो से मान्यता है कि यहां हाजरी देने वालों को उनके विश्वास के अनुसार लाभ जरूर प्राप्त होता है। सामान्य दिनों में भी यहां अच्छी चहल-पहल रहती है। 
रौजा का निर्माण
टेकरी शरीफ के मुतवल्ली के अनुसार 1882 में परिसर में फैले तब के जंगल में रोशनी नजर आई तथा इसी वर्ष इसी रात में बावड़ी का ताजिया खुद ब खुद आम रास्ते से हटकर हमाम बाड़े के बरामदे में चला गया। तब के जावरा नवाब मोहम्मद इस्माइल अली खान रोशनी नजर आने वाले स्थान पर पहुंचे तो वहीं लोहबान की खुशबू महसूस हुई। खुशबू वाले स्थान को पहचान कर उन्हें चिन्हित किया तथा इसी चाहरदिवारी को हुसैन टेकरी नाम दिया गया। बाद में 1945 में मुंबई के एक व्यापारी ने स्वप्न में एक बुजुर्ग के कहने पर कि जावरा में हुसैन टेकरी हैं, वहां जाकर रौजा बनवाओ तब उस आदेश के बाद व्यापारी ने बड़े रौजा का निर्माण करवाया। 
कहा जाता है कि व्यापारी मोहम्मद इस्माइल का जहाज समुद्र में डूबने से बचने पर उसे काफी मुनाफा हुआ था। बाद में नवाब इफ्तेखार अली के जमाने में हुसैन टेकरी का विस्तार किया गया। 
रौजा की संख्या है छह 
टेकरी परिसर में कुल छह रौजा है। हर एक का अपना महत्व और अपना इतिहास है। मुख्य रौजा हजरत इमाम का है, जिसे बड़ा रौजा भी कहते हैं । निर्माण सन 1945 में मुंबई के एक व्यापारी द्वारा करवाया गया था । इसी वर्ष हजरत अब्बास आलम द्वारा हजरत अली का रौजा बनवाया गया । 1997 में बीबी फातेमा का और 1998 में बीबी जैनब और जनाबे सकीना का रौजा बनावाया गया । हजरत अली के रौजा को टॉप शरीफ भी कहा जाता है। मान्यता है कि रौजा निर्माण से पहले यहां इमाम हुसैन के घोड़े के टॉप के निशान होने से इसका नामकरण हिय गया है । 
56 साल से हो रहा आयोजन
टेकरी पर चेहल्लुम का ज्यादातर आयोजन हुसैन मिशन द्वारा किया जाता है, हालांकि यह स्थान सुन्नी वक्फ की जमीन है। सभी व्यवस्था वक्फ हुसैन टेकरी प्रशासन करता है। इतने वर्षों के सफल आयोजन से टेकरी की पहचान देश के साथ-साथ विदेशों तक बनी है । श्रद्धालुओं की तादाद में लगातार बढ़ोतरी होती रही । मुख्य आयोजन चूल में सबसे पहले निकलने के वास्ते 21-21 दूल्हों का चयन लक्की ड्रा में होता है। 
इस वर्ष की चूल व्यवस्था
अतिवृष्टि के कारण चेहल्लुम आयोजन की व्यवस्था प्रभावित हुई है। आग पर मातम का आयोजन 18 अक्टूबर की रात्रि 10 बजे से होगा। सहमति से इस वर्ष चूल स्थान पर दो की बजाय 3 चूल बनाई जा रही हैं । प्रशासन ने तीसरी चूल से जुड़ी सभी जरूरी तैयारियां शीघ्र करने का निर्देश दिया है। चूल स्थान पर पानी भराव को देखते हुए चूल से निकले वाले जायरीनों के लिए प्रशासन ने मार्ग परिवर्तन किया है। 3 चूल होने से जायरीनों को बेरीकेड्स में अधिक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। व्यवस्थाओं को जायरीनों के अनुकूल तथा सुविधा की दृष्टि से सभी जिम्मेदार कार्यकर्ताओं को मुस्तैदी से जुटे रहने को कहा गया है। 
सीसीटीवी कैमरे से रखी जाएगी नजर
जायरीनों की संख्या लाखों में होने की उम्मीद के चलते प्रशासन जिम्मेदारी से हर नजरिये से मुस्तैद होकर काम कर रहा है। पूरे टेकरी परिसर को सीसीटीवी कैमरों की जद में लाया जाएगा ताकि हर एक गतिविधि पर नजर रखी जा सके। साथ ही कंट्रोल रूम से पूरे परिसर पर सतत रूप से प्रशासन पैनी निगरानी करेगा। इस हेतु 50 के करीब कैमरे लगाए जा रहे हैं । इसी क्रम में जायरीनों की सुविधा के मद्देनजर धर्मशाला होटलों पर भी प्रशासन की नजर है, ताकि उन्हें खाने-पीने ठहरने में परेशानी नहीं हो। इस हेतु पृथक से दल गठित किया जा चुका है। जमा पानी की निकासी हेतु मोटरों की मदद ली जा रही है। कीचड़ को समेटा जा रहा है।विशेषकर चेहल्लुम के 10 दिनी आयोजन में भीड़ उमड़ती है । 77वें आयोजन में इस बार अधिक बारिश होने की वजह से पहुंचने वाले जायरीनों को परेशानी और असुविधा झेलनी पड़ सकती है, फिर भी यहां धर्मशाला, होटलों सहित निजी सभी आवास स्थलों की बुकिंग हो चुकी है। अधिकतर जायरीन वर्षा थमने से खुले में टेंट में रहेंगे। पुलिस प्रशासन, नपा व अन्य सरकारी अमलों के साथ चिकित्सा व्यवस्था पर हर कोई फोकस किए हुए हैं । 
हिन्‍दुस्‍थान समाचार


 
Top