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सामान्य हालात की ओर लौटता कश्मीर

04/10/2019

रमेश गुुप्ता
जम्मू-कश्मीर व लद्दाख 31 अक्तूबर से केंद्र शासित प्रदेशों के रूप में अस्तित्व में आ जाएंगे। अब यह कुछ ही दिनों की बात रह गई है। राज्य से अनुच्छेद-370 समाप्त हुए दो माह से ज्यादा का समय हो चुका है। कश्मीर घाटी में शांति बनी हुई है। जनजीवन धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है। श्रीनगर व अन्य स्थानों पर बाजार प्रातः 06 से 10 बजे तक तक खुल रहे हैं जबकि गली, मोहल्लों की दुकानें लगभग पूरे दिन खुली रहती हैं। जम्मू-श्रीनगर के बीच निजी गाड़ियां व टैक्सियां सामान्य रूप से चल रही हैं, परंतु गांवों में मैटाडोर बस सेवा या टैक्सी सेवा बहुत कम चल रही है। श्रीनगर में जो संडे (रविवार) बाजार लगता था अब भी लग रहा है। बल्कि आमतौर पर दूसरी दुकानें बंद होने के कारण प्रतिदिन ही लग रहा है तथा ग्राहक भी भारी संख्या में वहां पहुंच रहे हैं। लोग वहीं अपनी आवश्यकता की वस्तुएं खरीदते हैं। सरकार ने स्कूलों को खोल दिया है परंतु अभी बच्चे बहुत कम संख्या में पहुंच रहे हैं। 16 अक्तूबर से काॅलेज भी खोलने का निर्णय लिया गया है।
राज्य सरकार ने अब ब्लॉक डवलपमेंट कमेटियों के चुनाव का निर्णय लिया है। इसके लिए अधिसूचना जारी कर दी गई है। राज्य में गत वर्ष पंचायतों के चुनाव हुए थे परंतु यहां 73वां संशोधन लागू नहीं किया गया, जिससे पंचायतों के अधिकार सीमित ही हैं। अब केंद्र सरकार राज्य में स्वतंत्रता उपरांत पहली बार ब्लाॅक डवलपमेंट काउंसिल के चुनाव करवाने जा रही है। राज्य में 316 ब्लाॅक डवलपमेंट काउंसिलों के चुनाव होने थे, उनमें से 310 के चुनाव करवाए जा रहे हैं। इसके लिए 4200 पंचायतों के लगभग दो लाख पंच, सरपंच मतदान करेंगे। यह मतदान मतदाता पर्ची द्वारा करवाया जा रहा है तथा सभी ब्लाॅक में चुनाव सामग्रियां भेज दी गई हैं। 24 अक्तूबर को मतदान होगा तथा मतदान के उपरांत उसी दिन मतों की गिनती होगी और परिणाम भी उसी दिन घोषित होंगे। उसके उपरांत जिला डवलपमेंट काउंसिल के चुनावों की घोषणा होगी। उसके लिए 20 जिलों के लिए चुनाव होंगे तथा लद्दाख में दो जिलों के लिए चुनाव होंगे। यह चुनाव राजनीतिक दलों द्वारा लड़े जाएंगे। इसलिए क्या इस चुनाव में भाजपा के अतिरिक्त अन्य दल भाग लेंगे? यह कहना कठिन है।
राज्य सरकार ने जम्मू प्रांत के सभी राजनीतिक दलों के नेताओं को रिहा कर दिया है। जिनमें कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गुलाम अहमद मीर, रमन भल्ला, नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रांतीय अध्यक्ष देवेंद्र राणा, सुरजीत सिंह सलाथिया, पैंथर्स पार्टी के हर्ष देव सिंह आदि प्रमुख हैं। जबकि कश्मीर घाटी के राजनीतिक दलों के नेताओं को सरकार ने कहा कि उन्हें बारी-बारी से छोड़ा जाएगा। कांग्रेस व पैंथर्स पार्टी इन चुनावों में भाग ले सकती है परंतु नेशनल कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन फारुख अब्दुल्ला पर पीएसए लगाया है और उनके रिहा होने की संभावनाएं कम हैं। उनके पुत्र पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला अभी भी नजरबंद हैं। कई अन्य नेता भी देश की विभिन्न जेलों में बंद हैं। वहीं पीडीपी की चेयरमैन व पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती भी नजरबंद हैं। उनके कई अन्य साथी भी देश की अन्य जेलों में बंद हैं, उनको रिहा करना भी एक समस्या है। वहीं राजनीतिक दल कह रहे हैं कि वह तभी इन चुनावों में भाग ले सकते हैं जब उनको रिहा किया जाएगा। अब देखना यह है कि सरकार किन-किन नेताओं को रिहा करती है तथा कब तक करती है।
अब 25 अक्तूबर को राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में सचिवालय के सभी कार्यालय बंद हो जाएंगे तथा 3 नवम्बर को शीतकालीन राजधानी जम्मू में खुलेंगे। उनके खुलने के उपरांत ही राज्य का कामकाज सही ढंग से होना प्रारंभ हो जाएगा। श्रीनगर में जब से सचिवालय मई में खुला था तब से वहां कामकाज नहीं हो सका। अब लोगों को आशा है कि उनके रुके काम हो सकेंगे।
जहां तक आतंकवाद का प्रश्न है, राज्य में आतंकवादियों की संख्या अभी 270 के आसपास बताई जा रही है। कुछ और भी आतंकवादी घुसपैठ करके आए, जिनकी सही संख्या का अनुमान नहीं है। वहीं आतंकवादी कश्मीर घाटी में कड़े सुरक्षा प्रबंधों के कारण जम्मू क्षेत्र या देश के अन्य भागों का रुख कर रहे हैं ताकि दीपावली तक कोई बड़ा कांड कर सकें, क्योंकि जब से अनुच्छेद-370 हटी है तभी से पाकिस्तान में बैठे आतंकी नेताओं से दबाव बढ़ रहा है। अब कश्मीर में आजादी की बात समाप्त-सी हो गई है। उसका विरोध भी नहीं हो पा रहा है। बड़ी घटना द्वारा विरोध प्रकट करने के मंसूबों पर चाक-चौबंद सुरक्षा एजेंसियां पानी फेर रही हैं। आतंकवादी भी समझ चुके हैं कि उनके अंतिम दिन नजदीक आ रहे हैं। वह जैसे-तैसे जान बचाने की फिराक में हैं। अब कश्मीर घाटी के लोग सच्चाई को समझने लगे हैं। वह चाहते हैं कि उनकी समस्याएं जो पुरानी सरकारें हल नहीं कर पाईं, वे हल की जाएं तथा राज्य से आतंकवाद का खात्मा कर इसे विकास पथ ले जाया जाए।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।)


 
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