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वन्य जीवन और निवास स्थान का संरक्षण भारत के सांस्कृतिक स्वभाव का हिस्सा : मोदी

17/02/2020

-प्रधानमंत्री ने प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण पर आयोजित सम्मेलन काप-13 का किया उद्घाटन

रवीन्द्र मिश्र

नई दिल्ली/गांधीनगर (गुजरात), 17 फरवरी (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण पर आयोजित सम्मेलन काप-13 का सोमवार को उद्घाटन किया। प्रधानमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए दिल्ली से संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन ऑन माइग्रेटरी स्पीसीज सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के सांस्कृतिक स्वभाव में सदियों से वन्य जीवों का संरक्षण करना हिस्सा रहा है, जो करुणा और सह-अस्तित्व को प्रोत्साहित करता है। 17 फरवरी से शुरू हुआ यह सम्मेलन 22 फरवरी तक चलेगा।

अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा, "हमारे वेदों ने जानवरों के संरक्षण की बात की है। सम्राट अशोक ने वनों के विनाश और जानवरों की हत्या को रोकने के लिए बहुत जोर दिया।उन्होंने बताया कि भारत विविध पारिस्थितिक आवासों से समृद्ध है और 4 जैव-विविधता वाले हॉटस्पॉट भी हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, "भारत दुनिया के सबसे विविध देशों में से एक है और वैश्विक जैव विविधता में लगभग 8 प्रतिशत भूमि का योगदान देता है।" भारत सरकार स्थायी विकास के मार्ग में पूरी तरह से विश्वास करती है और यह सुनिश्चित करती हैं कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना विकास हो।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आसियान और पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन के देशों के साथ अपने सहयोग को मजबूत करने का प्रस्ताव रखता है। यह इंडो पैसिफिक ओशन इनिशिएटिव के साथ होगाजिसमें भारत एक नेतृत्वकारी भूमिका निभाएगा। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत पारंपरिक रूप से "अतिथि देवो भव" पर विश्वास करता है जो काप-13 के लिए दिए गए "प्रवासी प्रजातियां ग्रह को जोड़ती हैं और हम उनका घर में स्वागत करते हैं" से भी परिलक्षित है।

प्रवासी पक्षियों के बारे में जानकारी देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में दुनिया भर से लगभग 500 प्रवासी प्रजातियों का घर है। संरक्षण के मूल्यों पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, "भारत संरक्षणस्थायी जीवन शैली और हरित विकास मॉडल के मूल्यों के आधार पर क्लाइमेट एक्शन का चैंपियन रहा है।" उन्होंने कहा, "गांधीजी से प्रेरित अहिंसा और जानवरों और प्रकृति के संरक्षण के सिद्धांत भारत के संविधान में निहित हैं।"

हिन्दुस्थान समाचार


 
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