लेख

Blog single photo

फायदेमंद रही प्रधानमंत्री की रूस यात्रा

09/09/2019

डॉ. दिलीप अग्निहोत्री

भारत-रूस सम्बंध इतने मजबूत पहले कभी नहीं थे। कई बार तो पाकिस्तान और चीन से उसकी नजदीकियां भारत के मुकाबले अधिक दिखाई देती थी। लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय हितों के अनुरूप अपने प्रयास जारी रखे। इससे स्थिति पूरी तरह बदल गई। दोनों देशों के संबन्ध पुराने दौर की याद दिलाने लगे। कुछ ही दिन पहले रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कश्मीर पर पाकिस्तान के प्रस्ताव को खारिज कराने में बड़ी भूमिका का निर्वाह किया। उसने खुलकर भारत का समर्थन किया। यह कहा कि अनुच्छेद 370 को हटाना और जम्मू कश्मीर को केंद्र शासित बनाना भारत का आंतरिक मामला है। इस पर संयुक्त राष्ट्र संघ या किसी अन्य देश को हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बीते सप्ताह की रूस यात्रा कई मायनों में सफल रही। दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौते हुए। द्विपक्षीय व्यापार को तीस अरब डॉलर तक ले जाने का संकल्प व्यक्त किया गया। इसी क्रम में मोदी ने पूर्वी आर्थिक मंच में भागीदारी की। भारत इसमें मुख्य अतिथि था। कई देशों के साथ मोदी की द्विपक्षीय वार्ता भी हुई। जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबो ने कहा कि दोनों देश हिन्द प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी बढ़ाएंगे। पूर्वी आर्थिक मंच के साथ भारत का सहयोग बढ़ा है। इसमें हिस्सा लेने वाले भारतीय उद्योगों एवं कारोबारी प्रतिनिधियों से भी उनकी व्यापारिक सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। यह मंच रूस के सुदूर पूर्वी क्षेत्र में कारोबार एवं निवेश के अवसरों को बढ़ाएगा। इस क्षेत्र में भारत और रूस के बीच सहयोग बढ़ेगा।
रूस में उनकी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात बहुत सार्थक रही। प्रधानमंत्री रूस के सुदूर पूर्वी क्षेत्र की राजधानी व्लादिवोस्तोक भी गए थे। व्लादिवोस्तोक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंडिया लाउंज पवेलियन गए। यहां भारत और रूस की स्टार्टअप के परिवेश के अंतर को दूर किया गया। इस क्रम में भारत-रूस ऑनलाइन मंच का गठन किया गया। मोदी पूर्वी आर्थिक मंच की पांचवीं बैठक में शामिल हुए। इसके माध्यम से दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाया जाएगा।
मोदी ने स्टार्टअप इंडिया कल्याणी एडटेक चैलेंज की भी शुरुआत की। इसके तहत इनवेस्ट इंडिया और कल्याणी ग्रुप के सहयोग से भारतीय एवं रूसी स्टार्टअप में तेजी लाई जाएगी। यह चैलेंज सभी स्टार्टअप और नवोन्मेषियों के लिये खुला है। यह स्टार्टअप इंडिया की वेबसाइट पर उपलब्ध होगा।  इससे सुदूर पूर्वी रूस में भारतीय निवेश को बढ़ावा मिलेगा। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन के निमंत्रण पर नरेंद्र मोदी फोरम के मुख्य अतिथि बने थे।
 इस अवसर पर नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत रूस के सुदूर पूर्व क्षेत्र के विकास के लिए उसके साथ मिलकर काम करेगा। भारत संसाधन वाले इस क्षेत्र के विकास के लिए एक अरब डॉलर का रूस को कर्ज देगा। पांचवें पूर्वी आर्थिक मंच में मोदी ने कहा कि भारत और रूस के बीच दोस्ती केवल राजधानी शहरों में सरकारी बातचीत तक सीमित नहीं है। बल्कि यह लोगों और करीबी व्यापारिक संबंधों की  मिसाल है। यहां मोदी ने सुदूर पूर्व में कार्य करो अर्थात एक्ट फार ईस्ट की नीति का ऐलान किया। रूस के सुदूर पूर्व क्षेत्र के साथ गतिविधियों को मजबूत बनाने के लिए मोदी ने यह नीति बनाई है। भारत इस नीति पर तेजी से काम करेगा। इससे आर्थिक कूटनीति को एक नया आयाम मिलेगा। 
 रूस और भारत के बीच बीसवें सम्मेलन के बाद कई समझौते हुए। दोनों देश उपकरणों का संयुक्त रूप से निर्माण करेंगे। चेन्नई और व्लादिवस्तोक के बीच मेरिटाइम रूट का प्रस्ताव किया गया है। अंतरिक्ष, सुरक्षा, हवाई, समुद्री यातायात, व्यापार और निवेश पर सहयोग बढ़ाया जाएगा। इन क्षेत्रों में सहयोग की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए सहमति बनी है। एलएनजी की आपूर्ति के लिए करार हुआ है। इस समझौते के तहत नोवाटेक भारत, बांग्लादेश और अन्य बाजारों में एलएनजी की बिक्री के लिए भविष्य के एलएनजी टर्मिनल और संयुक्त उद्यम के गठन में निवेश करेगी।
भारत और रूस के बीच 2025 तक व्यापार बढ़कर 30 अरब डॉलर हो जाएगा। मोदी ने रूस को भारत में समर्पित रक्षा उद्योग पार्क बनाने का न्योता दिया। दोनों देश नई व नवीकरणीय ऊर्जा, परमाणु प्रौद्योगिकी और रक्षा के क्षेत्र में अधिक घनिष्ठता से कार्य करेंगे। पुतिन ने कहा कि भारत के साथ व्यापारिक संबंध बढ़ाना उनकी सरकार की प्राथमिकता है। 2017 में दोनों देशों के व्यापार में 21 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह करीब दस अरब डॉलर हो गया। इस वर्ष जनवरी से जुलाई के दौरान 20  फीसदी की वृद्धि के साथ छह अरब डॉलर का व्यापार हुआ है। प्रौद्योगिकी में प्रगति से अधिक संवृद्धि व निवेश हासिल करना संभव हुआ है।
दोनों देश एक-दूसरे के यहां 15 अरब डॉलर का निवेश करेंगे। दो वर्षों में 20 प्रतिशत व्यापार बढ़ना उत्साहजनक है। मोदी ने यह भी बताया कि इज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए पिछले कुछ वर्षों में राज्यों ने बहुत काम किया है। इस संबंध में हमें रूस और भारत के राज्यों के बीच अधिक वार्ता की उम्मीद है।
परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भारत और रूस दोनों को मित्र माना जाता है। प्रौद्योगिकी की खरीद-बिक्री के अतिरिक्त अब हम मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत भारत में प्रौद्योगिकी का विकास कर सकते हैं। रक्षा के क्षेत्र में हम अपनी पुरानी साझेदारी को आगे बढ़ा सकते हैं और भारत में नए उत्पाद बना सकते हैं। भारत की आईटी व फार्मास्युटिकल कंपनियां रूसी कंपनियों के साथ संयुक्त उपक्रम के माध्यम से वहां काम कर सकती हैं।
(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)


 
Top