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गुरु नानक के नाम पर देश-दुनिया के विश्वविद्यालयों में बनेंगी ‘चेयर’ : निशंक

07/11/2019

सुशील बघेल

नई दिल्ली, 07 नवम्बर (हि.स.)। केंद्र सरकार ने सिख पंथ के संस्थापक गुरु नानक देव के नाम पर देश और दुनिया के कई विश्वविद्यालयों में चेयर स्थापित करने की घोषणा की है। इसका उद्देश्य नानक के उपदेशों, जीवन काल में की गई यात्राओं और जाति-धर्म के आधार पर समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने के उनके प्रयासों के बाबत समेकित शोध कार्य को बढ़ावा देना है। यह बातें केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने गुरु नानक के जीवन और उपदेशों पर आधारित पुस्तकों के विमोचन के अवसर पर कही।

गुरुवार को दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय के उत्तरी परिसर में श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज में गुरु नानक देव की 550वीं जयंती के अवसर पर गुरु नानक वाणीनानक वाणी और  साखियां गुरु नानक देव तीन पुस्तकों के विमोचन के दौरान निशंक के साथ केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री हरसिमरत कौर बादल भी मौजूद थीं। पुस्तकों का प्रकाशन नेशनल बुक ट्रस्‍ट ने किया है। मूलरूप से इन पुस्‍तकों का प्रकाशन पंजाबी भाषा में हुआ है। इनका अनुवाद 15 भारतीय भाषाओं में किया जाएगा।

निशंक ने कहा कि गुरु नानक देव के जन्मोत्सव पर उनके उपदेशों को पूरे विश्व में ले जाने की दिशा में हमारी तरफ से ये छोटा सा प्रयास है। में गुरु नानक देव विश्वविद्यालय पंजाब में 439 करोड़ की लागत से एक अंतः पंथ केंद्र की स्थापना, अंतरराष्ट्रीय सेमिनार के आयोजन के लिए 0.91 करोड़ रुपयेयूके और कनाडा प्रत्येक के एक विश्वविद्यालय में विदेश मंत्रालय के अनुमोदन के अधीन चेयर की स्थापना शामिल है। उन्होंने कहा कि यूके में चेयर के लिए 4.5 करोड़ रुपये (वर्ष के लिए) और कनाडा में चेयर के लिए नौ करोड़ (वर्ष के लिए)विभिन्न भारतीय भाषाओं में गुरुवाणी के प्रकाशन के लिए 0.65 करोड़ रुपये और गुरु नानक देव के संदेशों का विश्व की भाषाओं में अनुवाद करने के लिए 0.21 करोड़ रुपये की घोषणाएं शामिल हैं।

हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि वर्तमान परिदृश्य में गुरु नानक देव के लेखन की प्रासंगिकता स्पष्ट दिखाई देती है क्योंकि उनकी लेखनी भ्रमित समाज में एक प्रकाशस्तंभ की भूमिका निभाती है। राष्ट्रीय पुस्तक न्यास से मेरी गुजारिश है कि वह गुरु नानक देव की किताबों को ज्यादा से ज्यादा भाषाओं में प्रकाशित करें ताकि सब लोगों तक उनका संदेश पहुंच सकें। उन्होंने एनबीटी पुस्तक मेले में गुरु नानक और पंजाबी भाषा की पुस्तकों के लिए अलग से एक खंड का सुझाव दिया। इसके अलावा उन्होंने एनबीटी के पंजाबी विभाग को मजबूत करने की जरूरत पर भी बल दिया।

इस अवसर पर श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ जसविन्दर सिंह और राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के अध्यक्ष प्रो. गोविंद प्रसाद शर्मा भी मौजूद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार


 
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