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आशा जगाती नयी सरकार..

19/06/2019

आशा जगाती नयी सरकार

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 बद्रीनाथ वर्मा/ सौरव राय

एक बार फिर मोदी सरकार के नारे को साकार करते हुए नरेंद्र मोदी दूसरी बार देश के प्रधानमंत्री बन चुके हैं। पिछले कार्यकाल के बचे हुए कामों को पूरा करने तथा देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए उन्होंने अपनी टीम के स्पेशल 57 का भी चयन कर लिया है। इसमें पीएम के अलावा 24 कैबिनेट, 9 राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार तथा 24 राज्यमंत्री हैं।

आ जाद भारत में जन्मे नरेंद्र मोदी दूसरी बार देश के प्रधानमंत्री बने हैं। देश ने उनके किये गये कामों व वादों पर जी खोलकर भरोसा करते हुए उन्हें 2014 से भी बड़ा समर्थन दिया है। 2014 में जहां भाजपा को 282 सीटें मिली थीं, वहीं 2019 में बढ़कर 303 हो गई। न केवल भाजपा की सीटों में 21 का इजाफा हुआ बल्कि सहयोगी दलों की सीटों में भी अच्छी खासी बढ़ोतरी दर्ज हुई। इस समय एनडीए की सदस्य संख्या 353 है।

सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के साथ राष्ट्रपति भवन में सात हजार से भी अधिक मेहमानों की मौजूदगी में 57 सदस्यीय मंत्रिपरिषद के साथ नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री पद की शपथ ली है। इनमें 24 कैबिनेट, 9 राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार तथा 24 राज्यमंत्री हैं। पीएम पार्ट 2 में सहयोगियों के चयन में युवा जोश के साथ अनुभव व क्षेत्रीय संतुलन व सामाजिक समीकरण का भरपूर खयाल रखा गया है। मंत्रिपरिषद में जहां भाजपा अध्यक्ष अमित शाह समेत कुछ नये लोगों को शामिल किया गया है।

हीं, पिछले मंत्रिपरिषद के हिस्सा रहे कुछ मंत्रियों की आश्चर्यजनक रूप से छुट्टी भी की गई है। इनमें सुषमा स्वराज, मनोज सिन्हा, मेनका गांधी, उमा भारती, सत्यपाल सिंह, राधामोहन सिंह, सुरेश प्रभु, चौधरी वीरेंद्र सिंह, जगत प्रकाश नड्डा, राज्यवर्धन सिंह राठौर, डॉ. महेश शर्मा, के जे अल्फांसो, अनुप्रिया पटेल, विजय गोयल, एस एस अहलुवालिया, रामकृपालयादव, शिवप्रताप शुक्ल के अलावा अनंत हेगड़े शामिल हैं। सुषमा स्वराज व उमा भारती ने जहां चुनाव नहीं लड़ा था, वहीं मनोज सिन्हा गाजीपुर से जीत पाने में असफल रहे। मंत्रिपरिषद के सबसे उम्रदराज मंत्री 73 वर्षीय रामविलास पासवान हैं तो सबसे कम उम्र की मंत्री स्मृति ईरानी (43) हैं। नये मंत्रिपरिषद में स्मृति इरानी समेत कुल छह महिलाओं को मंत्रिपद मिला है। बहरहाल, भाजपा की इस महाविजय की रणनीति बनाने वाले भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का मंत्रिपरिषद में शामिल होकर गृहमंत्री बननासबसे महत्वपूर्ण घटना है। पूर्व गृहमंत्री राजनाथ सिंह देश के नये रक्षामंत्री बनाये गये हैं। आम धारणा है कि गृह मंत्रालय की कमान जिसके हाथ में होती है उसकी हैसियत सरकार में नंबर दो की होती है। वैसे तो शपथ लेने के क्रम में प्रधानमंत्री मोदी के बाद दूसरे नंबर पर राजनाथ सिंह ने जबकि अमित शाह ने तीसरे नंबर पर पद व गोपनीयता की शपथ ली थी। लेकिन मंत्रिपरिषद के बंटवारे में अमित शाह की पोजिशन नंबर दो पर आ गई और राजनाथ सिंह तीसरे नंबर पर पहुंच गये। कारण प्रधानमंत्री कार्यालय के बाद गृहमंत्रालय ही देश का सबसे शक्तिशाली मंत्रालय होता है। मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे उस समय अमित शाह गृहमंत्री हुआ करते थे। अब केंद्र में भी भाजपा के चाणक्य शाह उसी भूमिका में आ गए हैं। अंतर बस राज्य और केंद्र का है। इसी तरह का चौंकाने वाला फैसला पूर्व विदेश सचिव एस जयशंकर का शपथ लेना था। इसी साल पद्मश्री से नवाजे गये एस जयशंकर को सीधे कैबिनेट मंत्री बनाकर पीएम मोदी ने सभी को चौंका दिया है। उल्लेखनीय है कि एस जयशंकर जनवरी 2015 से जनवरी 2018 तक भारत के विदेश सचिव रहे थे।

देश की पहली महिला वित्त मंत्री

देश की पहली रक्षा मंत्री बनने का गौरव हासिल करने वाली निर्मला सीतारमण इस बार देश की पहली महिला वित्त मंत्री बनाई गई हैं। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में निर्मला को उद्योग एवं वाणिज्य मंत्रालय का जिम्मा राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार के रूप में सौंपा गया था। इसके बाद उन्हें कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई और उन्हें रक्षा मंत्री बनाया गया था। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दूसरे कार्यकाल में उन्हें वित्त मंत्रालय की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है।

एस जयशंकर को सुषमा स्वराज की जगह विदेश मंत्रालय की कमान सौंपी गई है। अमेरिका के साथ परमाणु समझौता हो या चीन के साथ डोकलाम विवाद दोनों ही बड़े मामलों को जयशंकर ने बेहतर तरीके से सुलझाया था। अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर के बीच दोनों देशों में भारत के राजदूत रहे जयशंकर को विदेश मंत्री बनाया जाना उन पर प्रधानमंत्री मोदी के भरोसे को भी जाहिर करता है। अपने किये गये काम की वजह से विपक्षी दलों की भी सराहना हासिल करने वाले नितिन गडकरी को पहले की तरह ही सड़क परिवहन एवं राजमार्ग के अलावा सुक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय का कार्यभार सौंपा गया है। जबकि पहली बार पटना से सांसद बने रविशंकर प्रसाद के पास कानून व न्याय मंत्रालय बरकरार है।

नरेन्द्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी 
गुजरात से लेकर दिल्ली तक के सफर में पीएम मोदी के सबसे भरोसेमंद साथी रहे अमित शाह को देश का नया गृह मंत्री बनाकर प्रधानमंत्री ने अपने चाणक्य पर एक बार फिर भरोसा जताया है। गांधी नगर से बड़े फासले से जीतकर आने के बाद हर किसी का मानना था कि इस बार उन्हें मंत्रिपरिषद में महत्वपूर्ण मंत्रालय मिलेगा लेकिन वह सबसे शक्तिशाली गृह मंत्रालय होगा, इस पर लोगों की राय अलग-अलग थी। लेकिन पीएम मोदी ने अपने चाणक्य को गृह मंत्रालय की कमान सौंपकर संकेत दे दिया है कि आने वाले दिनों में देश को प्रभावित कर सकने वाले कुछ कड़े फैसले लिये जाने हैं।

अरुण जेटली के सरकार में शामिल न होने के कारण रक्षा मंत्री रहीं निर्मला सीतारमण को वित्त मंत्री व अमेठी में राहुल को हराने वाली स्मृति ईरानी को मेनका गांधी की जगह महिला व बाल विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं,हरिद्वार से सांसद बने रमेश पोखरियाल निशंक को मानव संसाधन विकास मंत्रालय का पदभार सौंपा गया है।

पीयूष गोयल को रेल मंत्रालय के अतिरिक्त सुरेश प्रभु से लेकर वाणिज्य मंत्रालय का कार्यभार मिला है। दूसरी बार जीत कर आये जीतेंद्र सिंह को पीएमओ के मंत्री के अलावा उत्तर-पूर्व क्षेत्र विकास मंत्री की भी जिम्मेदारी दी गई है। किरण रिजिजू को युवा एवं खेल मंत्रालय तथा प्रहलाद सिंह पटेल को महेश शर्मा की जगह संस्कृति मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसी तरह मोदी के नवरत्नों में शामिल नरेंद्र सिंह तोमर का कद बढ़ाते हुए कृषि मंत्री के साथ साथ ग्रामीण विकास मंत्रालय एवं पंचायती राज की भी जिम्मेदारी सौंपी गई है। डॉ. हर्षवर्धन को स्वास्थ्य मंत्रालय की अहम जिम्मेदारी दी गई है। प्रकाश जावड़ेकर को सूचना प्रसारण के अलावा पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की भी कमान सौंपी गई है। मुख्तार अब्बास नकवी का भी प्रमोशन करते हुए उन्हें अल्पसंख्यक मामलों का मंत्री बनाया गया है। प्रहलाद जोशी को संसदीय कार्यमंत्री जबकि महेंद्र नाथ पांडेय को स्किल डिवेलपमेंट मंत्री बनाया गया है। विशेष बात यह है कि सहयोगी दलों को पिछली बार मिले मंत्रालयों में किसी प्रकार का फेर बदल नहीं किया गया है। एलजेपी प्रमुख रामविलास पासवान को इस बार भी उपभोक्ता एवं खाद्य, शिरोमणि अकाली दल की हरसिमरत कौर बादल को खाद्य प्रसंस्करण, आरपीआई के रामदास आठवले को सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण मंत्रालय में राज्यमंत्री की जिम्मेदारी पूर्ववत बरकरार है। वहीं, शिवसेना के कोटे से आने वाले मंत्री अरविंद सावंत को भारी उद्योग मंत्रालय दिया गया है। एनडीए के सहयोगीदलों में जहां पहले की सरकार में शामिल रहे अपना दल को कोई मंत्रिपद नहीं मिला है। वहीं, एनडीए का हिस्सा बने नीतीश कुमार के जेडीयू ने सरकार में शामिल होने से इनकार कर दिया। इस संबंध में कहा जा रहा है कि बिहार में 16 सीटें जीतने वाली जेडीयू को महज एक मंत्रालय लेना गवारा नहीं था। सूत्रों के मुताबिक वह कम से कम दो या तीन मंत्रालय चाहते थे। बहरहाल, अगर राज्यवार मंत्रियों की बात की जाय तो इसमें उत्तर प्रदेश की भागीदारी सबसे ज्यादा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा उत्तरप्रदेश से राजनाथ सिंह, स्मृति ईरानी, महेंद्रनाथ पांडेय और मुख्तार अब्बास नकवी के अलावा संतोष गंगवार, जनरल वीके सिंह, संजीव बालियान और साध्वी निरंजन ज्योति हैं।

बिम्सटेक देशों के प्रमुखों की मौजूदगी

मोदी के दूसरी बार देश की सत्ता संभालने का गवाह बिम्सटेक देशों के सभी सात सदस्य बने। बंगाल की खाड़ी से जुड़े सात देश भारत, बांग्लादेश, म्यांमार, श्रीलंका, थाईलैंड, नेपाल और भूटान इस संगठन में शामिल हैं। शपथ ग्रहण समारोह में इस बार बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद अब्दुल हमीद, श्रीलंका के राष्ट्रपति एम सिरीसेना, किगिजिस्तान के राष्ट्रपति एस जीनबेकोव, म्यांमार के राष्ट्रपति यू विन मिंट, मॉरिशस के प्रधानमंत्री प्रविंद कुमार जगन्नाथ, नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली, भूटान के प्रधानमंत्री डॉ. एल शेरिंग तथा थाइलैंड के विशेष प्रतिनिधि जी बूनरैक प्रमुख थे। उल्लेखनीय है कि हाल के वर्षों में बिम्सटेक को मजबूती से खड़ा करने में भारत का अहम योगदान रहा है। मोदी की वापसी से इसे और फलने-फूलने का मौका मिलेगा, इसमें कतई संदेह नहीं है।

बिहार से भी मोदी कैबिनेट में तीन कैबिनेट, एक राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार व दो राज्य मंत्री यानी कुल छह मंत्रियों को जगह मिली है। इनमें रामविलास पासवान, रविशंकर प्रसाद और गिरिराज सिंह के अलावा आरके सिंह, अश्विनी कुमार चौबे और नित्यानंद राय के नाम शामिल हैं। इसके बाद महाराष्ट्र से पांच मंत्रियों में से नितिन गडकरी, प्रकाश जावडेकर, अरविंद सावंत कैबिनेट जबकि रामदास अठावले और संजय धोत्रे राज्यमंत्री बनाए गए हैं। पंजाब से हरसिमरत कौर बादल कैबिनेट तो सोमप्रकाश राज्यमंत्री बने हैं। गुजरात से तीन अमित शाह कैबिनेट, मनसुख मंडाविया स्वतंत्र प्रभार तथा पुरूषोत्तम रुपाला राज्यमंत्री हैं।

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक तथा झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा पहली बार केंद्र में मंत्री बनाये गये हैं। सभी 10 सीटों पर विजय दिलाने के इनाम के रूप में हरियाणा को राव इंद्रजीत सिंह, कृष्णपाल गुर्जर और रतनलाल कटारिया के रूप में तीन मंत्री मिले हैं। इसी तरह पश्चिम बंगाल में भाजपा की जबरदस्त कामयाबी के बाद मंत्रिपरिषद में दो चेहरों बाबुल सुप्रियो और देबाश्री चौधरी को बतौर राज्यमंत्री सरकार में शामिल किया गया है। ओडिशा से धर्मेंद्र प्रधान कैबिनेट और ओडिशा के मोदी कहे जाने वाले प्रताप चंद्र सारंगी को राज्यमंत्री के रूप में मंत्रिपरिषद में जगह मिली है। हिमाचल प्रदेश से अनुराग ठाकुर, कर्नाटक से सदानंद गौडा, प्रहलाद जोशी व सुरेश अंगाड़ी तथा असम से रामेश्वर तेली, अरुणाचल प्रदेश से किरण रिजिजू और तेलंगाना में चार कमल खिलाने वाले जी किशन रेड्डी को मंत्रिपद की सौगात मिली है। इनके अलावा छत्तीसगढ से रेणुका सिंह सरुता, गोवा से श्रीपद नाइक और केरल से वी मुरलीधर को सूबे की नुमाइंदगी सुनिश्चित की गई है।


 
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