चुनावी विशेष

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अंतिम पायदान पर बैठे लोगों को इज्जत मिली, जनता ने वोटों से नवाज दिया

23/05/2019

पंडित दीनदयाल उपाध्याय का एकात्म मानववाद इसबार के लोस चुनाव में अंगीकार
होता नजर आया



राजीव मिश्र



रांची, 23 मई (हि.स.)। पहली बार पंडित दीनदयाल उपाध्याय का एकात्म मानववाद इसबार के लोकसभा चुनाव में अंगीकार होता नजर आया। अंतिम पायदान पर बैठे लोगों तक सरकार
की योजनाएं पहुंचीं और उसका प्रतिफल भी भाजपा को मिला। 

जिसने सपने में भी नहीं
सोचा था, उसे पक्के मकान मिल गये। अंधेरा होने का इंतजार करने की असहनीय पीड़ा
झेलती महिलाओं को मिले शौचालय ने उन्हें इज्जत बख्शी। आयुष्मान भारत ने स्वास्थ्य
ठीक किया। जन धन योजना ने उस तबके का खाता खुलवाया जिसने कभी बैंक का मुंह तक नहीं
देखा था। सरकार ने किसानों का ख्याल किया तो किसानों ने दोबारा सरकार बनाने में
अपनी ताकत लगा दी। नोटबंदी से काला धन बाहर लाया तो धनपशु परेशान हो गये। एसी में
भी उन्हें पसीने आने लगे, लेकिन गरीब तबके ने मोदी को गले से लगा लिया। जीएसटी ने
फाइलों में चल रही कंपनियों से ब्लैकमनी को ह्वाइट करने के धंधे पर विराम लगा दिया।
सर्जिकल और एयर स्ट्राइक ने देशवासियों को विश्वास से लबरेज कर दिया कि यही सरकार
है जिसमें देश सुरक्षित रह सकता है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमारी छवि मजबूत हो
सकती है। 

लंबी फेहरिस्त है भाजपा नीत केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के कामों की,
जिसने समाज के आम लोगों को प्रभावित किया। समाज की अंतिम पंक्ति के लोगों के
दिलो-दिमाग में नमो-नमो छा गया और सभी लोगों ने मिलकर राष्ट्र को सुरक्षित हाथों
में एकबार फिर सौंप दिया।  



इस बार का लोकसभा चुनाव पूरे देश में सिर्फ और सिर्फ एक ही प्रत्याशी भाजपा
से चुनाव लड़ रहा था, उनका नाम है नरेंद्र मोदी। वोट देते वक्त मतदाताओं ने
उम्मीदवारों को नहीं देखा, बल्कि विकास और नरेंद्र मोदी के चेहरे को देखा। भाजपा
की अभूतपूर्व जीत राष्ट्रीय सुरक्षा और भावना की जीत है। 

शौचालय बनाकर मोदी ने जो इज्जत
दी, बदले में महिलाओं ने वोट देकर उन्हें सम्मान से नवाज दिया। घर-घर गैस पहुंचा
कर धुएं से मुक्ति दिलाने पर मां-बहनों ने विपक्ष को धुंआ-धुंआ कर दिया। विपक्षी
गठबंधन के नेताओं खासकर राहुल गांधी की गालियों से उत्पन्न गुस्से ने वोट का रूप
धारण कर लिया और फिजां में कमल खिला दिया। बगदीदी के आतंक पर बंगाल ने वोटों के
गोले दाग दिये। वोट देने के सांप्रदायिक आह्वान ने लोगों के स्वाभिमान को झकझोर दिया।
नतीजा सामने है। ईसाई मिशनरीज की खुलकर अपील के बावजूद आदिवासी समाज ने
उप्पल बाहा (कमल फूल) को चुन लिया।  



हिन्दुस्थान समाचार/राजीव/   संजीव


 
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