युगवार्ता

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विधायकों के बगावती तेवर

11/07/2019

विधायकों के बगावती तेवर

अरविंद कुमार राय

मणिपुर की भाजपा सरकार में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। कुछ विधायक मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह को हटाने की बात कर रहे हैं। इस बाबत उन्होंने अल्टीमेटम भी दे दिया है।

पूर्वोत्तर के पहाड़ी राज्य मणिपुर में भाजपा की पहली सरकार अपने गठन के तीसरे साल में अंदरूनी बगावत के चलते संकट के दौर से गुजर रही है। राज्य में लंबे समय तक कांग्रेस सत्ता में रही। 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में किसी को अनुमान नहीं था कि कांग्रेस सत्ता से बाहर होगी। लेकिन राज्य में कांग्रेस के विरुद्ध जनता में भारी आक्रोश और भाजपा की नीतियों से प्रभावित होकर सत्ता की चाभी भाजपा को सौंप दी। 60 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा को पूर्ण बहुमत नहीं मिला था। भाजपा को कुल 21 सीटें ही मिली थीं।
राजनीतिक रूप से मजबूत भाजपा ने सहयोगियों के बल पर सत्ता के लिए जरूरी आंकड़े का जुगाड़ कर सरकार बना ली। एन. बीरेन सिंह के नेतृत्व में भाजपा के 21, एलजीपी के एक, टीएमसी के एक, एक निर्दलीय, एनपीपी के चार, एनपीएफ के चार तथा कांग्रेस से निकले एक विधायक के समर्थन से सरकार का गठन हुआ। चुनावों में कांग्रेस ने 28 सीटें जरूर जीती थी। लेकिन वह सरकार नहीं बना पाई। 2017 और 2018 में एन. बीरेन सिंह नेतृत्वाधीन सरकार राज्य की सत्ता आसानी से चलाती रही। इस दौरान कांग्रेस से बगागवत कर कई विधायकों ने भाजपा सरकार का समर्थन कर दिया। हालांकि कुछ गैर राजनीतिक संगठनों ने राज्य के शांत माहौल को उथल-पुथल करने की जरूर कोशिश की, लेकिन वे सफल नहीं हो सके। कहा जाता है कि उन आंदोलनों के पीछे कहीं न कहीं कांग्रेस पार्टी का ही हाथ था।
राजनीति के जानकारों का मानना है कि गत डेढ़ महीने से राज्य में उठे राजनीतिक तूफान के पीछे कहीं ना कहीं मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस का हाथ है। मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह से नाराज विधायकों को मनाने की भरपूर कोशिश की गई। इस दौरान मुख्यमंत्री ने अपने सभी कैबिनेट सहयोगियों और विधायकों की एक बैठक बुलाई थी। बैठक में मंत्रियों समेत कुल 39 विधायकों को आमंत्रित किया गया था, लेकिन बैठक में सिर्फ 9 विधायक, जिसमें तीन मंत्री शामिल थे, ने हिस्सा लिया। जिसके चलते बैठक को स्थगित कर दिया गया।
मणिपुर से उठी विद्रोह की आवाज दिल्ली तक पहुंच गई। बगावती तेवर अपनाने वाले विधायकों का नेतृत्व विधायक विश्वजीत कर रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि बैठक में शामिल 9 विधायकों में तीन मंत्री और छह विधायक थे, जिसमें मंत्रियों में श्याम कुमार, के. श्याम और वी. हंगखलियन तथा विधायकों में एस. राजेन, एस. बीरा, डॉ एस. राजन, डब्ल्यू. रॉबिंद्रो, एच. डिंगो और सत्यब्रत शामिल हुए थे। बगावती तेवर अपनाने वाले गुट की यह मांग है कि हर हालत में मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह को बदलना होगा। नाराज विधायकों को मनाने के लिए असम के प्रभावशाली मंत्री व नार्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक एलायंस (नेडा) के संयोजक डॉ. हिमंत विश्वशर्मा ने भी पूरा प्रयास किया। लेकिन उनको भी सफलता नहीं मिली। डॉ. विश्वशर्मा का मणिपुर में भाजपा की सरकार के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका बताई जाती है। सूत्रों ने बताया है कि नाराज विधायकों का खेमा और मुख्यमंत्री का खेमा पिछले दिनों दिल्ली में पहुंचकर भाजपा के केंद्रीय नेताओं को अपनी बातों से अवगत कराया।
भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व इस समस्या के समाधान के लिए सभी पक्षों को समझाकर मामले को सुलझाने की कोशिश में जुटा हुआ है। सूत्रों का मानना है कि बगावती तेवर अपनाने वाले विधायक मुख्यमंत्री को हटाने के अपने कदम से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। इतना ही नहीं विश्वजीत ने हाल ही में मीडिया के सामने खुलेआम केंद्रीय नेतृत्व को 15 दिनों की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि अगर पार्टी इस समस्या का समाधान नहीं करती है, तो अगला कदम उठाने के लिए वे मजबूर होंगे। उल्लेखनीय है कि राज्य में भाजपा के पास पूर्ण बहुमत नहीं है।
इसका फायदा उठाते हुए कांग्रेस से अलग होकर भाजपा को समर्थन देने वाले विधायक और अन्य पार्टियों के विधायक दबाव बनाकर मुख्यमंत्री को हटाने की फिराक में हैं। हालांकि भाजपा मणिपुर की अपनी पहली सरकार को इतनी आसानी से जाने देने वाली नहीं है। राजनीति विशेषज्ञों का कहना है कि समय के साथ भाजपा इस समस्या का समाधान निकाल लेगी। फिलहाल राज्य में राजनीतिक घमासान चरम पर है।


 
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