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चिकित्सकों के साथ हिंसा सभ्य समाज की निशानी नहीं

11/07/2019

चिकित्सकों के साथ हिंसा सभ्य समाज की निशानी नहीं

 प्रियंका

नई दिल्ली के गांधी शांति प्रतिष्ठान में आयोजित राष्ट्रीय परिसंवाद में चिकित्सकों के साथ हुई हिंसक घटनाओं की न केवल निंदा की गई बल्कि इसे सभ्य समाज पर भद्दा दाग करार दिया गया।

चिकित्सकों की सुरक्षा के प्रश्न विषय पर नई दिल्ली के गांधी शांति प्रतिष्ठान में आयोजित राष्ट्रीय परिसंवाद में वक्ताओं ने एक स्वर से कहा कि किसी भी सभ्य समाज के लिए चिकित्सकों के साथ हो रही हिंसा चिंतनीय है। प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के सहयोग से स्वस्थ भारत न्यास एवं बिहार मेडिकल फोरम द्वारा आयोजित इस राष्ट्रीय परिसंवाद में दिल्ली के वरिष्ठ चिकित्सकों ने अपनी बात रखी। अपने अध्यक्षीय संबोधन में वरिष्ठ स्वास्थ्य पत्रकार धनंजय कुमार ने कहा कि जिस समय पूरा देश चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा है वैसे समय में चिकित्सकों के साथ दोस्ताना व्यवहार करने की बजाय नकारात्मक व्यवहार समाज के लिए ठीक नहीं है।
उन्होंने कहा कि इस दिशा में सरकार को भी मजबूत कदम उठाने चाहिए। स्वस्थ भारत न्यास के चेयरमैन आशुतोष कुमार सिंह ने कहा कि चिकित्सक इस देश के स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी पूंजी हैं। हमारी धरोहर हैं। बिहार मेडिकल एसोसिएशन के सचिव एवं वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. राजेश पार्थ सारथी ने 400 वर्ष पूर्व आई अंग्रेजी पैथी के इतिहास के बारे में बताते हुए कहा कि किस तरह से शाहजहां की बेटी का इलाज एक अंग्रेज ने किया था और उसकी बेटी ठीक हो गई थी। बदले में उस अंग्रेज चिकित्सक ने फोर्ट विलियम्स मांग लिया था। यानी उसने एक तरह से साम्राज्य स्थापित करने का अधिकार ही मांग लिया था। और उसके बाद अंग्रेजों को भारत में अपना पैर पसारने में आसानी हो गई। उनका कहना था कि जिस पैथी की नींव ही लाभ कमाने के लिए पड़ी हो उस पैथी से चैरिटी भाव या सेवा भाव की परिकल्पना करेंगे तो हम न्यायोचित परिणाम नहीं प्राप्त कर पाएंगे।
फोर्डा के अध्यक्ष डॉ. सुमेध संदनशिव ने चिकित्सकों के प्रति लोगों के मन में अविश्वास भाव को रेखांकित करते हुए कहा कि कोई भी मरीज चिकित्सकों को पीटने के लिए नहीं आता है लेकिन परिस्थियां ऐसी बना दी गई हैं कि लोग उग्र हो जाते हैं। उन्होंने इस स्थिति का जिम्मेदार लैक आॅफ इंफ्रास्ट्रक्चर, लैक आॅफ सर्विस और लैक आॅफ एडमिनिस्ट्रेशन को देते हुए कहा कि अगर सरकार इन बिन्दुओं पर ध्यान दे तो समस्या का समाधान संभव है। जाने माने न्यूरो सर्जन डॉ. संजीव ने चिकित्सकों की समस्या को रेखांकित करते हुए कहा कि चिकित्सक अपने शैडो से बाहर नहीं निकलना चाहते हैं। उन्होंने चिकित्सकों से अपील करते हुए कहा कि उन्हें भी सोसली एक्टिव होना चाहिए और अपने दृष्टिकोण को रखना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि, मुझे पता है यह हम आर्ट आॅफ मेडिसिन को रिवाइव करेंगे तो यही लोग हमें बहुत इज्जत करेंगे।
जाने माने आॅन्कोलोजिस्ट डॉ. सुशील कुमार ने कहा कि चिकित्सकों के खिलाफ हो रही हिंसा पर कानून जरूरी है। साथ ही उन्होंने कुछ राजनीतिज्ञों द्वारा चिकित्सकों के बारे में गलत बयानी करने पर भी नराजगी जताई।प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के जीएम (मार्केटिंग) धीरज शर्मा ने कहा कि किसी भी चिकित्सक के मन में यही बात रहती है कि उसे अपने मरीज को ठीक करना है। एक अंदर ठीक करने का भाव रहे और एक के अंदर ठीक होने का भाव, फिर उत्तेजना क्यों? थोड़ा धैर्य रखना जरूरी है। सिंपैथी के निदेशक एवं वरिष्ठ होमियोपैथी चिकित्सक डॉ. आर.कांत ने कहा कि मेट्रो शहरों में चिकित्सकों के प्रति सम्मान का भाव लोगों में कम हुआ है। उन्होंने कहा कि आजकल तो लोग चिकित्सक को कट्सी में नमस्कार करना भी पसंद नहीं करते हैं। वहीं वरिष्ठ होमियोपैथिक चिकित्सक डॉक्टर पंकज अग्रवाल ने कहा कि लोगों की साक्षरता तो बढ़ी है लेकिन शिक्षा में कमी आई है। उन्होंने इस बात को जोर देकर रेखांकित किया कि डॉक्टर एवं मरीज के बीच संवाद होना जरूरी है और इसके लिए आम लोगों को जागरूक करना भी बहुत जरूरी है।
आईएमए एवं डीएमए एवं स्वस्थ भारत अभियान से जुड़ी हुई वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. ममता ठाकुर ने कहा कि जब प्रधानमंत्री इंग्लैंड में जाकर भारतीय चिकित्सकों की बुराई कर सकते हैं तो कम से कम अपने देश में चिकित्सकों की सुरक्षा के प्रश्न पर उन्हें अपने मन की बात में अपील करनी चाहिए। इसके पूर्व स्वागत भाषण स्वस्थ भारत के चेयरमैन आशुतोष कुमार सिंह ने दिया। इंटरमिंगलिंग इंडिया, मस्कट हेल्थ प्रा.लि., बीबीआरएफआई, एवं हिलिंग सबलाइन जैसे संस्थानों ने भी इस आयोजन में अपना सहयोग दिया। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ रंगकर्मी, कवि एवं गीतकार मनोज सिंह ‘भावुक’ ने किया।


 
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