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किडनी का सौदा कर रहे किसान!

08/07/2019

किडनी का सौदा कर रहे किसान!

तीन वर्ष से अकाल का सामना कर रहे हिंगोली जिले के सेनगांव के एक किसान ने तहसीलदार जीवराज कांबले को एक पत्र लिखा। किसान ने तहसीलदार से गुजारिश की कि उसे बीज तथा खाद मुहैय्या कराने के बदले कीमत के रूप में उसकी एक किडनी ले ली जाए। किसान की इस पेशकश से तहसीलदार हक्के बक्के रह गए। सेनगांव ऐसा गांव है, जहां वर्षा होती ही नहीं या होती है तो इतनी कम कि उससे सिंचाई नहीं की जा सकती। यहां के किसानों को बुआई से लेकर फसल तैयार होने तक का खर्च भी बड़ी मुश्किल से मिल पाता है। हर साल घटते जा रहे कृषि उत्पादन ने तहसील के किसानों का बजट ही बिगाड़ दिया है। किसानों ने हालांकि नई उम्मीद के साथ खरीफ फसल की तैयारी तो की थी लेकिन बीज तथा खाद खरीदने के लिए उनके पास पर्याप्त पैसा नहीं है। तीन वर्ष से कई अल्पभूमिधारक किसान फसल की बर्बादी से परेशान हैं। फसल न होने के कारण किसान अपना कर्ज भी चुकता नहीं कर पाए हैं।

कृषि प्रधान देश में अगर किसानों को बीज और खाद के बदले अपनी किडनी के सौदे की पहल करनी पड़े तो इसे क्या कहा जाए। कुछ इसी तरह के हालात इन दिनों महाराष्ट्र के एक क्षेत्र में दिखाई दिए हैं।

सरकार से पत्र के माध्यम से निवेदन करने के बावजूद किसानों के हाथ कुछ भी नहीं लगा है। कर्ज के बढ़ते बोझ तथा इस वर्ष भी फसल बर्बाद होने की आशंका के कारण किसान तहसीलदार कार्यालय पहुंच रहे हैं। किसानों की ऐसी हालत सिर्फ सेनगांव में ही नहीं है, बल्कि पूरे राज्य के किसान परेशान हैं। विदर्भ, मराठवाड़ा में 20 प्रतिशत उत्पादन कम होने से किसानों की हालत और भी ज्यादा दयनीय हो गई है। राज्य में वित्त वर्ष 2018-2019 में 94 प्रतिशत खरीफ फसल की बुवाई हुई है। इधर, जलाशयों में पानी का घटना और मानसूनी वर्षा समय पर न होने से स्थिति ज्यादा भयावह हो गई है। पिछले पांच माह में 809 किसानों की आत्महत्या कृषि प्रधान देश के प्रगतिशील राज्य महाराष्ट्र की हालत बयां कर रही है। अकाल, फसल न होने, निजी साहुकारों तथा बैंकों के कर्ज के बोझ तले दबे अधिकतर किसानों के पास बच्चों की शिक्षा और विवाह तक के पैसे नहीं हैं। राज्य का सूचना, मदद तथा पुनर्वास विभाग भी पिछले पांच माह में हर दिन पांच किसानों की आत्महत्या को स्वीकार रहा है।

सरकार की ओर से वर्तमान वित्त वर्ष में 809 में से 293 आत्महत्याग्रस्त किसान परिवारों को आर्थिक मदद की गई है। इसके बावजूद किडनी के बदले बीज और खाद की मांग करने वाले किसानों ने चिंता बढ़ा दी है। आंकड़े बताते हैं कि पिछले पांच वर्षों में राज्य में 14 हजार किसानों ने आत्महत्या की है। सहकार मंत्री सुभाष देखमुख कहते हैं कि इस पर नियंत्रण के लिए विविध सरकारी योजनाओं का लाभ किसानों को सीधे तौर पर दिया जा रहा है। मदद धनराशि भी किसानों के बैंक एकाउंट में भेजी गई है। अकाल निधि, ओले से फसलों के नुकसान की भरपाई, बेमौसम वर्षा से फसलों के नुकसान की भरपाई की जा चुकी है। अकाल के कारण मराठवाड़ा में 1 मई से 25 मई की कालावधि में 71 किसानों ने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। आत्महत्या करने वाले 71 किसानों में अकेले 41 किसान औरंगाबाद के थे। जनवरी 2019 से मई 2019 तक आत्महत्या करने वाले किसानों की संख्या 326 तक है। किसान अपनी व्यथा बता रहे हैं। किसानों, जिला प्रशासन तथा सरकार के बीच फंसी फसलों का उत्पादन कैसे बढ़ाया जाए, इस सवाल पर गौर करना जरूरी है। इसी से विपदा में फंसे किसानों को आत्महत्या करने से भी रोका जा सकता है।


 
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