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बेचूबीर धाम पर तीन लाख श्रद्धालुओं ने टेका मत्था, बेचुआ-रे-बेचुआ की स्वर लहरी गूंजी

07/11/2019

कमलेश्वर
मीरजापुर, 07 नवम्बर (हि.स.)। वैज्ञानिक युग में विज्ञान को धता बताते हुए अंधविश्वास पर टिका विश्वास की यह पूजा बेचूआ रे बेचूआ की स्वर लहरी से गूंज उठी। ट्रैक्टरों व सवारी गाड़ियों पर हिचकोले खाते दर्शनार्थियों का हुजूम अहरौरा विकास खंड के जंगल महाल स्थित बेचूबीर धाम पर उमड़ पड़ा। भूत-प्रेत बाधाओं, चर्म रोगों से ग्रस्त एवं संतान प्राप्ति की इच्छा लिए महिलाओं का रेला लगातार बाबा की चैरी पर कूच कर रहा है। पूजा स्थल पर हजारों महिलाओं के पहुंचने से भीड़ को नियंत्रित करने में प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी। गुरूवार को लगभग तीन लाख भक्तों ने बेचूबीर बाबा की चैरी पर मत्था टेका। 

मान्यताओं के अनुसार पूजा के पूर्व भक्सी नदी पर स्नान करने की महिलाओं की परंपरा से उनकी नग्नता आम होने को प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए महिलाओं के वस्त्र बदलने की व्यवस्था टेंट लगवाकर कर दी है, जिससे दर्शनार्थियों में संतोष व्याप्त है। नदी के आसपास छोड़े गए वस्त्रों, गंदगी और कूड़े के अंबार से निपटने के लिए प्रशासन ने नगर पालिका से साफ-सफाई की व्यवस्था तो कराई है परन्तु महिलाओं और पुरुषों की उमड़ी भारी भीड़ के चलते अपर्याप्त रही। बताते चले कि मेला स्थल पर पहुंचने के पूर्व भक्सी नदी में स्नान कर पूरा वस्त्र वहीं पर छोड़ देने की परंपरा है, जिसके चलते नदी के आसपास गंदे कपड़ों का अंबार बिखरा पड़ा रहा। पूजा स्थल तक पहुंचने वाले हजारों श्रद्घालुओं ने बाबा की चैरी पर मत्था टेका। संतान प्राप्ति की इच्छा पूरी होने वाले दंपतियों की भी बाबा के धाम में भारी भीड़ पहुंची थी। विशाल मेला क्षेत्र में जगह-जगह टेंट लगाकर अस्थाई दुकानें सजाई गई र्हैं, जिसके चलते मेला क्षेत्र की जमीनों पर अतिक्रमण का खामियाजा भी दर्शनार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। सुविधा और सुव्यवस्था के नाम पर अस्थाई तौर पर टैंकर से पेयजल की आपूर्ति की जा रही है, जिससे पानी लेने के लिए दिन भर टैंकर के पास दर्शनार्थियों का तांता लगा रहा। गंदगी के चलते संक्रामक रोग के खतरे से निपटने के लिए कैंप लगाकर चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई गई है। इसके अलावा अगलगी की घटनाओं से निजात पाने के लिए दमकल की गाड़ियों की व्यवस्था कहीं नहीं नजर आईं। मेला क्षेत्र में चैरी के सामने हजारों पीड़ित महिलाओं के खेलने-हबुआने से वीरान पड़ी भूमि दर्शनार्थियों की भीड़ से ठसाठस भर गई है। उनको नियंत्रित करने के लिए पुलिस प्रशासन ने बड़े पैमाने पर बैरिकेडिंग भी कर रखा है, बावजूद इसके मनरी बजने के समय वास्तविक प्रसाद चावल ग्रहण करने के लिए होने वाली परेशानी को नियंत्रित करने में प्रशासन को काफी मशक्कत का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि बाबा की चैरी के सामने का अधिकांश इलाका दुकानों के चलते अतिक्रमण की चपेट में है।

बार-बार चढ़ा बकरे का बच्चा मेमना 
मन्नत के अनुसार मुराद पूरी होने पर श्रद्धालु बाबा की चैरी पर बकरे की बलि देते है ऐसी मान्यता है परंतु प्रशासनिक प्रतिबंध के चलते बलि नहीं चढ़ाई जाती है ।आरोप है कि मेला प्रशासक द्वारा चढ़ाए गए बकरे के बच्चे मेमना को बार-बार दुकान दालों को बेच दिया जाता है पुनः श्रद्धालु इसी मेमने को खरीद कर बाबा को चढ़ाते हैं दर्जनभर मेमने के बार-बार चढ़ाए जाने से हाथ लगते लगते उसकी दशा दयनीय होती गई और श्रद्धालु मेमना की पीड़ा को दरकिनार कर अपनी मनौती पूरा करने मे मशगूल रहे।
चप्पे-चप्पे पर तैनात रही पुलिस 
मेले की अप्रत्याशित भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पूर्वनियोजित सुरक्षा ब्यवस्था के तहत चप्पे-चप्पे पर पुलिस की तैनाती की गई है , बावजूद इसके संपूर्ण मेला क्षेत्र पर नजर रख पाना संभव नहीं रहा परिणाम स्वरुप  गाहे-बगाहे बैग झोला के गायब होने से हल्ला मचता रहा तथा तथा पाकिट मारी की घटनाएं भी रुकी नहीं श्रद्धालुओं को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा।
मेले मे नहीं रूकी आबकारी की गंध 
प्रशासनिक सुरक्षा व्यवस्था को धत्ता बताते हुए भारी भीड़ के मेला क्षेत्र में आबकारी की बिक्री रुक नहीं सकी छोटे-मोटे दुकानों से छुपते छुपाते दुकानदार देसी मदिरा की बिक्री करते मिले जिसके चलते मेला क्षेत्र में आबकारी की महक भी बरकरार रही हालांकि पुलिस प्रशासन ने शराब की बिक्री पर पैनी नजर बनाई थी परंतु मेला क्षेत्र में आबकारी की महक रुक नहीं सकी ।ब्लैक मे शराबियों को शराब उपलब्ध मिली।
नौटंकी में नर्तकियों ने बिखेरा जलवा 
बेचूबीर के ऐतिहासिक मेले में टेंट लगाकर बाकायदा नर्तकीओं ने अपनी नौटंकी  का जलवा बिखेरा । अर्धनग्न कपड़ों में ठुमके लगाने की इस जुगलबंदी को देखने के लिए पुलिस और प्रशासन के जवान भी आतुर रहे ,रात के अंधेरे में कम कपड़ों की नुमाइश करके नर्तकीयों ने धन और वाहवाही दोनों बटोरी शिकायत के बाद यदा-कदा कुछ देर के लिए नृत्यांगनाओ का जलवा बंद करा दिया जाता है परंतु प्रशासन के ही जवान पीछे से इसका आनन्द लेने मे मशगूल रहे। इसके चलते अर्धनग्न नर्तकियां भी आकर्षण का केन्द्र बनी रही और उनका जलवा बरकरार रहा ।
रास्ते में बनी रही जाम की स्थिति
बेचूवीर मेला में अनवरत वाहनों का काफिला गुजरने से रास्ते भर जाम की स्थिति बनी रही। जगह जगह तैनात किए गए ट्रैफिक पुलिस के जवान जाम छुड़ाने में लगे रहे।बेतरतीब वाहनों के गुजरने से रास्ते भर जाम लगी रही। जाम में घंटो तक वाहनों की लंबी लाइन लग जा रही थी।ट्रैक्टर व टेंपो के चालक जल्दबाजी में जाम लगा दे रहे थे।बताते चले कि मेला क्षेत्र में पहुंचने के लिए बैरमपुर गांव से इकलौता मार्ग है जिसके चलते जाम से निजात पाना संभव नहीं। 
जरगो जलाशय के रास्ते नाव से भी पहुंचे श्रद्धालु
बेचूबीर बाबा की चैरी पर पहुंचने की जल्दी और बाबा के दर्शन की कामना में जाम के झाम से जूझ रहे श्रद्धालु को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है जिसके चलते कुछ श्रद्धालु इमिलिया चट्टी से जरगो जलाशय होते हुए जलमार्ग से बाबा के धाम पहुंच गए जलाशय मे प्राइवेट नाविकों के द्वारा धन वसूली कर जल के रास्ते श्रद्धालुओं को जलाशय पार कराया जाता है जहां से श्रद्धालु आसानी से बरही गांव में स्थित बेचू वीर बाबा के मंदिर पहुंचते हैं। जान जोखिम में डालकर यह यात्रा खतरे से खाली नहीं। बावजूद इसके परिवार सहित डग्गामार नांव पर सवार होकर श्रद्धालु बाबा की चैरी पर मट्ठा टेकने पहुंचे। 
एकादशी की भोर में बजेगी मनरी 
मेला का समापन कार्तिक शुक्ल एकादशी की भोर में मनरी बजने के साथ होगा। इस दिन मध्य रात्रि को भक्तों को बाबा के प्रसाद रूपी अक्षत प्रदान करने की परंपरा है। मुख्य पुजारी बाबा के चैरी का पूजन करने के बाद अक्षत फेंकते हैं। मेले का चरमोत्कर्ष भी अक्षत है। अक्षत लेने के लिए महिलाएं अपनी आंचल तो पुरुष अपना गमछा, रुमाल फैला कर खड़े रहते हैं। मान्यता है कि जिसे अक्षत रूपी चावल के एक दाना भी मिल जाता है वह खुद को धन्य समझता है। अक्षत लेने की होड़ सी पैदा हो जाती है। 
पुराने कपड़ा लेने के लिए जमाया डेरा 
बेचूवीर मेले में आने वाली महिलाएं परम्परा के अनुसार भक्सी नदी पर स्नान कर अपनी साड़ी आदि छोड़ नई साड़ी पहनकर चैरी पर जातीं हैं। मेले के अंतिम दिन भक्तों के छोड़े गए कपड़े को लेने के लिए बिहार से लेकर गोरखपुर, छत्तीसगढ़ तक कपड़ा उठाने वाले भक्सी नदी के समीप तीन दिनों से अस्थाई रैनबसेरा बनाकर रह रहे हैं। यहां के पुराने कपड़े का भी अपना बड़ा बाजार है। यहां उठाए गए कपड़े लाखों रुपये में वाराणसी समेत पूर्वांचल की गुदड़ी बाजार में सौदा किए जाते हैं। 
ग्रीन ग्रुप की महिलाओं ने संभाली सुरक्षा कमान 
बेचूवीर मेले में जिले के साथ आसपास के गाजीपुर, आजमगढ़, चंदौली, सोनभद्र समेत बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ से आई महिला श्रद्धालुओं को अभेद्य सुरक्षा प्रदान करने के लिए ग्रीन गु्रप की महिलाओं ने कमान संभाल लिया है। हरी साड़ी पहनकर विशेष पहचान वाली व प्रशिक्षण प्राप्त महिलाओं की नजर मेले के चप्पे-चप्पे पर रही। किसी भी महिला के साथ किसी प्रकार की छेड़-छाड़ या अन्य समस्या पैदा होने पर ग्रीन ग्रुप की जाबांज महिलाएं फौरन पुलिस को खबर करेंगी और पुलिस के जवान आरोपी की गिरेबान तक पहुंच जाएगी। अहरौरा थानाध्यक्ष राजेश चैबे ने बताया कि लगभग 25 ग्रीन ग्रुप की महिलाओं की पूरे मेला क्षेत्र में तैनाती की गई है। ये पुलिस का सहयोग करेंगी। किसी भी प्रकार की हरकत की जानकारी मिलने पर आरोपी को दबोच लिया जाएगा। 

हिन्दुस्थान समाचार


 
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