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राफेल से बढ़ी वायुसेना की ताकत

09/10/2019

डॉ. दिलीप अग्निहोत्री

ई वर्षों तक हंगामा चला, लेकिन विजयादशमी के दिन राफेल भारत को मिला। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय मान्यता के अनुरूप फ्रांस में ही अस्त्र पूजन किया, राफेल पर ओम अंकित किया। भारत का खुश होना स्वाभाविक है। इसी के साथ आसमान तक भारत की ताकत बढ़ गई। लेकिन राफेल डील को रद्द कराने के लिए कांग्रेस ने जो आसमान सिर पर उठाया था, उसे भूलना मुश्किल है। तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष ने इसे लेकर कोई कसर नहीं छोड़ी थी। लोकसभा के आम चुनाव के दौरान अपनी प्रत्येक जनसभा में वह चौकीदार चोर का नारा लगवाते थे। कहा कि गोवा के एक मंत्री के ऑडियो में राफेल की सच्चाई है। इस पर लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि क्या वह इस बात की गारंटी लेते हैं कि ऑडियो सही है? फिर क्या था राहुल पलट गए। ऑडियो सुनने की जिद छोड़ दी। फिर जेपीसी बनाने की मांग से भी पीछे हट गए।
 अनिल अंबानी और एचएएल को लेकर कई बार सवाल उठाये गए। अंबानी, भारत और फ्रांस की सरकार, दसॉ कम्पनी सभी ने इन आरोपों को निराधार साबित किया। एचएएल को उबारने के लिए केन्द्र सरकार ने 52 बार सहायता दी थी। राफेल डील में दसॉ ने एचएएल से निर्मित होने वाले लड़ाकू विमान की गारंटी लेने से मना कर दिया था। उसका कहना था कि एचएएल के साथ मिलकर भारत में एक लड़ाकू विमान बनाने में उसे ढाई गुना अधिक समय लगता। उसने किसी और पार्टनर को चुनने के लिए देश की ऑफसेट नीति का सहारा लिया। इस ऑफसेट पार्टनर नीति को पूर्व की यूपीए सरकार ने 2013 में बनाया था। कांग्रेस सरकार दस में कोई करार नहीं कर सकी थी। 2016 में जो सौदा हुआ, उसके आधार पर बेयर एयरक्राफ्ट अर्थात युद्धक प्रणालियों से विहीन विमान का दाम यूपीए की कीमत से नौ प्रतिशत कम था और हथियारों से युक्त विमान यूपीए की तुलना में बीस प्रतिशत सस्ता था।
ऑफसेट का मतलब है कि किसी विदेशी से सौदा करते हैं तो कुछ सामान अपने देश में खरीदना होता है। राफेल में तीस से पचास प्रतिशत सामान भारत में खरीदने की बात है। कुल ऑफसेट 29 हजार करोड़ रुपये का है। कांग्रेस ने एक लाख 30 करोड़ होने का आरोप लगाया था। ऑफसेट तय करने का काम विमान तैयार करने वाली कंपनी का था। कांग्रेस राफेल खरीद प्रक्रिया जानने को बेताब थी। उसका भी माकूल जवाब मिला। राफेल की खरीद के दौरान पूरी प्रक्रिया का पालन किया गया। अनुबंधन वार्ता समिति, कीमत वार्ता समिति आदि की  74 बैठकें हुई। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को इसकी जानकारी दी थी। कांग्रेस ने राफेल पर हंगामा किया था। अब राफेल के भारत आने से उसे निराशा हाथ लगी। तभी कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित कहते हैं कि राफेल लेने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह फ्रांस क्यों गए थे? यह काम वायुसेना का कोई अफसर भी कर सकता था। गए तो शस्त्र पूजा क्यों की। राफेल पर ओम क्यों लिखा? वह भी विजयादशमी के दिन। विजयादशमी से  राफेल का क्या  तुक है? उन्होंने सरकार पर दिखावा करने का आरोप लगाया। ऐसा करके संदीप दीक्षित सोशल मीडिया पर ट्रोल हो गए हैं
अब विषय पर लौटते हैं। राफेल विमान निर्माता कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एरिक ट्रेपर ने भारतीय रक्षा मंत्री को पहला विमान सौंपा। राजनाथ सिंह ने विजयादशमी पर राफेल शस्त्र पूजन किया और  उड़ान भरी। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राफेल फ्रांसिसी शब्द है जिसका अर्थ होता है हवा का झोंका। यह लड़ाकू विमान अपने नाम के अनुरूप खरा उतरेगा। भारत और फ्रांस के बीच सामरिक संबंधों में नया अध्याय जुड़ा है। भारत सरकार भारतीय वायु सेना की क्षमता बढ़ाने और उसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों और हथियारों से लैस करने के लिए कटिबद्ध है। दसॉ कंपनी समय सीमा के अंदर सभी राफेल विमानों  की आपूर्ति कर देगी। 2022 तक सभी 36 राफेल भारत को मिल जाएंगे।
इससे भारतीय वायु सेना की शक्ति बहुत बढ़ जाएगी। उल्लेखनीय है कि भारत को राफेल मिलने के दिन ही भारतीय वायु सेना की स्थापना हुई थी। संयोग से इस बार उसी दिन विजयादशमी भी पड़ी। राजनाथ ने इसे प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण बताया। इसके अलावा राजनाथ सिंह ने फ्रांसिसी रक्षा मंत्री पार्ली और राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों व सुरक्षा  सलाहकार बर्नाड रोगेल से द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर वार्ता की। इसमें दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों को बढ़ाने पर सहमति बनी।
(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)


 
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