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भारत-सऊदी संबंधों को लगे नये पंख

13/11/2019

भारत-सऊदी संबंधों को लगे नये पंख

मधुरेन्द्र

ऊदी अरब का भारत से व्यापारिक संबंध हजारों साल पुराना है और दोनों देशों में यह काफी फला-फूला। लेकिन आजादी के बाद भारत से अलग होकर एक इस्लामी देश पाकिस्तान बना। इसके बाद भारत सऊदी संबंधों में थोड़ा बदलाव आया और उसका झुकाव पाकिस्तान की ओर देखने को मिला। इसके अलावा भारत की सोवियत संघ से प्रगाढ़ मित्रता सऊदी अरब को कभी नहीं पसंद आई। फिर पिछले वर्षों में सऊदी अरब की सत्ता, नीति और राजशाही में कई बदलाव आए। शाहजादे बिन सलमान ने सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत करने के साथ अपने देश को आर्थिक रूप से मजबूत करने की दिशा में बड़े कदम उठाने शुरू कर दिए। उन्होंने मजहब से परे ऐसे व्यापारिक भागीदार ढूंढ़ने शुरू किए जो लंबे समय तक दोस्ती निभा सकें। इसके साथ ही सऊदी अरब और भारत के रिश्तों में नया आयाम देखने को मिला। शाहजादे सलमान ने भारत को काफी तरजीह देनी शुरू की और अब उनका देश भारत में सौ अरब डॉलर का निवेश करने को तैयार है। दरअसल,सऊदी अरब ने अब तक अपने निवेश का बड़ा हिस्सा अमेरिका में कर रखा था। वहां की बड़ी-बड़ी कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय बैंक,जैसे सीटी बैंक वगैरह में भी सऊदी अरब ने पैसे लगा रखा है। अब वह अमेरिका की बजाय अन्य देशों में निवेश करेगा और जाहिर है कि भारत उसकी प्रथम वरीयता है। यहां ध्यान देने की बात है कि सऊदी अरब दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है और उसके पास कच्चे तेल का बड़ा भंडार है।

सऊदी अरब के राजदूत सौद बिन मुहम्मद अल सत्ती ने कहा कि भारत, सऊदी अरब के लिए एक आकर्षक निवेश की मंजिल है। वह इस देश से दीर्घकालीन संबंध बनाए रखना चाहता है।

मध्य पूर्व में ऊठापटक के बीच वह अपनी आपूर्ति सुनिश्चित रखना चाहता है और इसके लिए उसे भारत तथा चीन जैसे बड़े खरीदारों की जरूरत भी है। भारत हर साल लगभग 17 अरब डॉलर के कच्चे तेल की खरीदारी सऊदी अरब से करता है। यह बहुत बड़ी रकम है और शाहजादे सलमान दोनों देशों के आपसी संबंधों को ज्यादा मजबूत करना चाहते हैं। इस सिलसिले में सऊदी अरब की सबसे बड़ी तेल कंपनी अरमाको ने भारत के रिलायंस इंडस्ट्रीज में लगभग 40 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की है। रिलायंस इंडस्ट्रीज देश का सबसे बड़ा रिफाइनर है और उसका संयंत्र पश्चिमी तट पर है। यह सऊदी अरब के लिहाज से उपयुक्त ठिकाना है। यहां निवेश करके वह आने वाले समय में अच्छी कमाई कर सकता है। उसे भारत अब एक बेहतरीन निवेश पहुंच के तौर पर दिख रहा है। भारत के लिए सऊदी अरब एक बड़ा श्रम बाजार है। वहां अभी 20 लाख से भी ज्यादा भारतीय काम करते हैं,जो नियमित रूप से भारत में पैसा भेजते हैं।

सऊदी अरब के भारत में राजदूत सौद बिन मुहम्मद अल सत्ती ने कहा कि भारत सऊदी अरब के लिए एक आकर्षक निवेश की मंजिल है और वह इस देश से दीर्घकालीन संबंध बनाए रखना चाहता है। शाहजादे सलमान ने अपने देश के लिए 2030 का एक विजन दस्तावेज तैयार करवाया है,जिसमें सऊदी अरब अमेरिका पर अपनी निर्भरता कम करना चाह रहा है और इसलिए उसे भारत एक आकर्षक देश दिख रहा है। इतना ही नहीं अभी उसके प्रतिद्वंद्वी देश ईरान पर अमेरिका ने कड़े प्रतिबंध लगा रखे हैं। इस वजह से भारत सऊदी से ही तेल खरीद रहा है। जब ये प्रतिबंध खत्म हो जाएंगे तो भारत उस ओर मुड़ सकता है,क्योंकि ईरान से भी भारत के ऐतिहासिक व्यापारिक रिश्ते हैं। सऊदी अरब भारत से दीर्घकालीन रिश्ते बनाकर ईरान का रास्ता पहले ही बंद कर देना चाहता है। एक और बात है कि मध्य पूर्व में सऊदी अरब अपने को सबसे बड़ा दिखाता रहा है लेकिन ईरान उसकी राह में रोड़े अटकाता रहा है। इस वजह से भी वह भारत को अपने साथ रखना चाहता है। इसके लिए वह कई कदम उठा रहा है।



 
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