क्षेत्रीय

Blog single photo

पंजाब : विधायकों को लाभ के पद वाले कानून से बाहर करने का बिल विधानसभा में पास

07/11/2019

नरेंद्र जग्गा
चण्डीगढ़, 07 नवम्बर ( हि.स.)। पंजाब विधानसभा में विपक्ष के विरोध के बावजूद सत्ताधारी कांग्रेस विधायकों को लाभ के पद के कानून से बाहर करने का बिल गुरुवार को पास करवाने में सफल हो गई है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेन्द्र सिंह ने अपने छह विधायकों को अपना सलाहाकार नियुक्त करके उन्हे मंत्री का रुतबा दिया था। इसे लेकर कानूनी रुकावटें भी खड़ी हो गई थीं और विपक्ष का भी विरोध था। 

इन्हीं रुकावटों को हटाने के  लिए सरकार यह बिल सदन में लेकर आई थी। आम आदमी पार्टी ने इस बिल का तीव्र विरोध करते हुए वाकआउट किया जबकि शिरोमणि अकाली दल ने सदन में ही विरोध किया। आरोप था कि पंजाब आॢथक संकट झेल रहा है, सरकार अपने वायदे पूरा करने में असफल हो रही है, किसान मर रहे है, परन्तु सरकार अपने मंत्रियों, विधायकों को ही राजी करने में लगी हुई है। इसी बात को लेकर मुख्यमंत्री के सलाहाकर बने विधायक राजा वडिन्ग ने विपक्षियों को उनके भत्तों को लेकर जमकर लताड़ा और सदन की कारवाई होने के बाद राजा वडिन्ग और विधायक सिमरनजीत सिंह बैंस के मध्य हाथापाई होते होते बची। 

पंजाब विधास सभा के विशेष सत्र का आज दूसरा दिन था। सदन में सरकार की तरफ से तीन बिल पेश किये गये। राज्य के गैर सहायता प्राप्त स्कूलों से फीसें रेगुलेट करने और पंजाब राज अनुसूचित जातियों के लिए आयोग में संशोधन को लेकर लाये आर्डीनेंस को बिल के रूप में पेश करने के साथ-साथ पंजाब राज्य विधान मंडल (अयोगयता करार देने से रोक) बिल पेश किया गया। इस बिल को लेकर आम आदमी पार्टी के नेता हरपाल सिंह चीमा में विरोध प्रकट करते हुए कहा कि यह बिल संविधान के खिलाफ है।

 उन्होंने कहा कि कर्मचारी धरने पर हैं और उन्हें वेतन नही मिल रहा, भत्ता नहीं मिल रहा, छात्रों के वजीफे बंद हो गये हैं। किसानों की कर्ज माफी नहीं हुई, परन्तु मुख्यमंत्री अपनी विधायकों को ही राजी करने में लगे हुए है। इस बिल को वापस लेने की मांग करते हुए आम आदमी पार्टी ने वॉकआउट किया। शिरोमणि अकाली दल के परमिंद्र सिंह ढींढसा ने भी इसका विरोध किया। परन्तु ढींढसा ने यह भी कहा कि वो उन विधायकों के खिलाफ नहीं, जिन्हें सालाहाकार का पद दिया गया है, बल्कि उनकी पार्टी तो संविधान का उल्लंघना कर विरोध करती है। लोक इन्साफ पार्टी के विधायक सिमरजीत सिंह बैंस ने कहा कि सरकार अपने वायदे तो पूरे कर नहीं पा रही, बेरोजगारी भत्ता बढ़ाने, कर्ज माफी, युवाओं को स्मार्ट फोन, लैपटॉप, बेजरोजगारी का कोई हल नही निकल रहा, परन्तु मुख्यमंत्री ने ओ एस डी की फौज खड़ी कर दी है जो किसी भी काम के नहीं और सिर्फ रेत, बजरी का काम संभाल रहे है। 

इसी बहस में मुख्यमंत्री के सलाहाकर नियुक्त हुए गिदड़बाहा के विधायक राजा वडिन्ग ने विपक्ष की पोल खोल कर रख दी। वडिन्ग ने कहा कि जो लोग उनकी नियुक्ति पर शोर मचा रहे है, उस अकाली दल ने अपने राज में ही सिर्फ हेलीकाप्टर पर ही 121 करोड़ रुपये खर्च कर दिये और शोर मचाने वाले लोक इन्साफ पार्टी के मात्र दो विधायकों ने भी अपने वेतन के अतिरिक्त भत्तो के रूप में 34 लाख रुपये का कलेम दिया। परन्तु अब वें शिक्षाएं दे रहे हैं। वडिन्ग ने यें भी कहा कि मुख्यमंत्री के सलाहाकार के रूप में वें एक रुपया भी अतिरिक्त नहीं ले रहे हैं। इसी बात पर सदन की कारवाई समाप्त होने के बाद वडिन्ग और बैंस के मध्य हुई बहस हाथापाई की नौबत तक पहुंचने के पहले ही मंत्रियों ने मामला शांत करवा दिया। इससे पूर्व सदन ने दो अन्य बिलों के साथ इस बिल को भी पास कर दिया। 

हिन्दुस्थान समाचार


 
Top