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सूरत नहीं सीरत जरूरी है का संदेश देती है 'उजड़ा चमन'

04/11/2019

अखिलेश कुमार 

निर्माता : कुमार मंगत और अभिषेक पाठक 
 निर्देशक : अभिषेक पाठक 
कलाकार : सनी सिंह, मानवी गगरु, ऐश्वर्या सखूजा, शारिब हाशमी, करिश्मा शर्मा, गृशा कपूर और अन्य। 

'दिलों की बात करता है जमाना, पर मोहब्बत अब भी चेहरे से शुरू होती है.' को स्थापित करने की जद्दोजहद की मनोरंजक कहानी है उजड़ा चमन। 2017 की हिट कन्नड़ फिल्म ओंडू मोट्टेया कठे का रीमेक 'उजड़ा चमन' दिल्ली यूनिवर्सिटी के हंसराज कॉलेज के 30 वर्षीय हिंदी लेक्चरर चमन कोहली (सनी सिंह) की दुख भरी दास्तान है, जो गंजा होने के कारण हर किसी की हंसी का पात्र बनता है। यही नहीं, उससे बड़ी समस्या यह है कि गंजेपन के कारण उसकी शादी नहीं हो रही है, जबकि एक ज्योतिषी गुरु जी (सौरभ शुक्ला) के अनुसार, अगर 31 की उम्र से पहले उसकी शादी न हुई, तो वह संन्यासी हो जाएगा। इसलिए, वह अपने लिए एक अदद लड़की तलाशने के लिए कॉलेज की सहकर्मियों से लेकर दोस्त की शादी में आई लड़कियों, सब पर चांस मारता है। वहीं अपने गंजेपन को छिपाने के लिए विग लगाने से लेकर ट्रांसप्लांट तक की सोचता है, लेकिन बात नहीं बनती। जैसे-तैसे अप्सरा (मानवी गगरू) के रूप में उसे एक लड़की मिलती है, जो उससे शादी करने को तैयार है, लेकिन वह चमन के ख्वाबों की अप्सरा नहीं है। ऐसे में कहानी क्या क्या मोड़ लेती है, यह फिल्म देखकर पता चलेगा।  

स्क्रीनप्ले और डायलॉग राइटर दानिश खान 'बाल नहीं, तो लड़की नहीं' की इस एक लाइन पर ही अटक गए हैं. इंटरवल तक तो सिर्फ चमन के गंजेपन का मजाक उड़ाने के ही सीन हैं, जो कई बार जबरदस्ती ठूंसे हुए लगते हैं। हंसराज कॉलेज में सारे स्टूडेंट्स सिर्फ चमन का मजाक उड़ाने आते हैं, कॉलेज का प्रिसिंपल इतना भ्रष्ट है कि, एक हजार रुपए के लिए खुद अपने स्टूडेंट से लेक्चरर की बेइज्जती करने को कहता है। ये सीन्स हजम नहीं होते हैं। 

सनी सिंह के पास अपनी अदाकारी दिखाने का बड़ा मौका था, जैसा उन्होंने प्यार का पंचनामा' और 'सोनू के टीटू की स्वीटी' में किया था, लेकिन वे यहां चूक गए। चमन के पैरंट्स की भूमिका में अतुल कुमार और ग्रूशा कपूर भरपूर मनोरंजन करते हैं। 

अन्य भूमिकाओं में गौरव अरोड़ा, करिश्मा शर्मा, ऐश्वर्या सखूजा ओर शारिब हाश्मी ने अपने किरदारों के साथ न्याय किया है। फिल्म का म्यूजिक कुछ खास नहीं है. गंजेपन की समस्या पर आधारित निर्देशक अभिषेक पाठक की फिल्म उजड़ा चमन का मूल संदेश यही है कि प्यार के लिए इंसान की सूरत नहीं, सीरत देखी जानी चाहिए। 

क्लाइमेक्स  का एक संवाद 'दिलों की बात करता है जमाना, पर मोहब्बत अब भी चेहरे से शुरू होती है.' भी बहुत कुछ कह देता है. दर्शक फिल्म देखकर बोर नहीं होंगे.।

 रेटिंग : 2/5 स्टार 

 हिन्दुस्थान समाचार



 
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