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मॉब लिंचिंग की राजनीति

06/07/2019

मॉब लिंचिंग की राजनीति


Yugwatra

झारखंड के धातकीडीह गांव में भीड़ द्वारा तबरेज अंसारी की बेरहमी से पिटाई के बाद मौत के मामले में राज्य से लेकर केंद्र तक की सियासी हवा गर्म हो गई है।

झारखंड में सरायकेला-खरसावां जिले में हुई मॉब लिंचिंग की घटना की आंच संसद तक पहुंच गयी है। संसद में विपक्षी दलों के नेताओं ने इस मुद्दे को खूब हवा दिया और भाजपा सरकार को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की। लोकसभा चुनाव में भाजपा के हाथों मिली करारी हार के बाद विपक्ष को मॉब लिंचिंग के रूप में जैसे कोई बड़ा सियासी हथियार मिल गया है। सारा विपक्ष संसद में उठ खड़ा हुआ और प्रधानमंत्री मोदी पर सांप्रदायिक ताकतों के संरक्षण का इल्जाम लगा दिया गया।
विपक्ष भलिभांति जानता है कि झारखंड सहित महाराष्ट्र और हरियाणा में चार माह बाद विधानसभा का चुनाव है। ऐसे में अभी से विपक्षी दलों ने इस मुद्दे के जरिये केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए हमला तेज कर दिया है। हालांकि झारखंड में पिछले दो सालों में मॉब लिंचिंग की दो बड़ी घटनाएं सामने आयी हैं। जिस पर राज्य सरकार ने सख्ती से निपटने की कोशिश की है। गत 17 जून की रात सरायकेला के धातकीडीह गांव में भीड़ द्वारा तबरेज अंसारी (24) की बेरहमी से पिटाई की गई। बाद में उसकी पुलिस कस्टडी में मौत हो गई। मामले में पुलिस पर भी लापरवाही बरतने का आरोप है। इस घटना के बाद पूरे देश में यह खबर आग की तरह फैली। झारखंड की मुख्य विपक्षी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड में कानून व्यवस्था पूरी तरह फेल हो चुकी है। खरसावां की यह कोई पहली घटना नहीं है।
इससे साफ हो जाता है कि राज्य में कानून व्यवस्था बेपटरी हो चुकी है। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि झारखंड मॉब लिंचिंग और हिंसा की फैक्ट्री बन गया है। उन्होंने राज्यसभा में प्रधानमंत्री मोदी से अपील की है, ‘हम ‘सबका साथ और सबका विकास की लड़ाई में आपके साथ हैं। लेकिन इसे हकीकत की धरातल पर भी उतरना होगा, जिसे जनता देख सके। आॅल इंडिया मजलिस-एइत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर निशाना साधा। बहरहाल, अपने अभिभाषण के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि झारखंड मॉब लिंचिंग का अड्डा बन गया है, ये कहना सही नहीं है। सबको कठघरे में रखकर राजनीति करना उचित नहीं है। पूरे झारखंड को बदनाम करने का हक हमें नहीं है। हालांकि, सरायकेला एसपी एस कार्तिक ने बताया है कि मॉब लिंचिंग मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की गयी है। तबरेज अंसारी की पिटाई में शामिल 11 लोगों प्रकाश मंडल उर्फ पप्पू मंडल, भीमसेन मंडल, प्रेमचंद महली, कमल महतो, सोनामो प्रधान, सत्यनारायण नायक, सोनाराम महली, एचामू नायक, मैदान नायक, महेश महली और सुमन्त महतो को गिरμतार किया गया है। सभी 11 आरोपी धातकीडीह के हैं। साथ ही दो थाना प्रभारियों खरसावां थाना प्रभारी चंद्रमणि उरांव और सीनी ओपी प्रभारी विपिन बिहारी सिंह को काम में लापरवाही बरतने के आरोप में सस्पेंड कर दिया गया है।
घटना की गंभीरता को देखते हुए राज्य अल्पसंख्यक आयोग की तीन सदस्यीय टीम अध्यक्ष मोहम्मद कमाल खान, गुरदेव सिंह राजा और अशोक षाड़ंगी घटनास्थल सरायकेला प्रखंड के धतकीडीह गांव पहुंचे और पूरे मामले की जानकारी ली। इसके साथ ही खरसावां प्रखंड के कदमडीहा गांव में तबरेज के परिजनों से मुलाकात कर इस संबंध में बात की। भाजपा के वरिष्ठ मंत्री सीपी सिंह ने भी घटना की निंदा करते हुए कहा है कि मामले को तूल देकर राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है। विपक्षी दलों का झारखंड सरकार को घेरने के पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि पिछले दिनों भी मॉब लिंचिंग की कई घटनाएं हो चुकी हैं। रामगढ़ में मॉब लिंचिंग के चर्चित अलीमुद्दीन मामला प्रकाश में आया था। रामगढ़ के बाजारटांड स्थित सिदो-कान्हू जिला मैदान के पास भीड़ ने 29 जून 2017 को प्रतिबंधित मांस से लदी मारुति वैन को रोक था। भीड़ ने वैन को आग के हवाले कर दिया था।
चालक मनुआ गांव निवासी अलीमुद्दीन (42) की पीट-पीट कर हत्या कर दी गयी थी। मामले में निचली अदालत ने 21 मार्च 2018 को आरोपी कपिल ठाकुर, रोहित ठाकुर, राजू कुमार, संतोष सिंह, उत्तम राम, छोटू वर्मा, दीपक मिश्र, विक्रम प्रसाद, सिकंदर राम, विक्की साव, नित्यानंद महतो को दोषी पाकर उम्र कैद की सजा सुनायी थी। आरोपियों ने इस फैसले को हाइकोर्ट में चुनौती दी थी। इसके बाद रोहित ठाकुर, कपिल ठाकुर, राजू कुमार, संतोष सिंह, उत्तम राम, सिकंदर राम, विक्की साव और नित्यानंद महतो को बेल मिली।


 
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