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आचार्य श्री महाश्रमण का पहली बार कर्नाटक में चातुर्मास

19/06/2019

चार्य श्री महाश्रमण अपनी अहिंसा यात्रा में असम, बंगाल, नगालैण्ड, मेघालय, बिहार, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, आंध्रप्रदेश, केरल और तमिलनाडु के कन्याकुमारी आदि अनेक स्थानों पर सद्भावना नैतिकता एवं नशामुक्ति का शंखनाद करते हुए तमिलनाडु में हैं। उनका 5 जून को कर्नाटक के सुंदरपाल्या में प्रवेश होगा। आचार्य श्री महाश्रमण का 12 जुलाई को कुंबलगोड़ स्थित आचार्य तुलसी महाप्रज्ञ चेतना सेवा केन्द्र में चातुर्मासिक मंगल प्रवेश होगा। वे वहां 13 नवम्बर तक प्रवास करेंगे। बेंगलुरु-मैसूरु रोड पर स्थित कुंबलगोड़ स्थित आचार्य तुलसी महाप्रज्ञ चेतना सेवा केन्द्र में आचार्य श्री महाश्रमण के 12 जुलाई से चातुर्मास की तैयारियां जोरों पर हैं। इस आयोजन की तैयारी में श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथ सभा, बेंगलुरु की चातुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति के साथ पूरा समाज जुटा हुआ है।

आचार्य श्री महाश्रमण पहली बार कर्नाटक में चातुर्मास करेंगे, जबकि जैन धर्म के श्वेतांबर तेरापंथ के किसी आचार्य
का 50 साल बाद बेंगलुरु आगमन होगा। इसके पहले वर्ष 1969 में नवें आचार्य तुलसी बेंगलुरु आये थे। बेंगलुरु-मैसूरु रोड पर स्थित कुंबलगोड़ स्थित आचार्य तुलसी महाप्रज्ञ चेतना सेवा केन्द्र में आचार्य श्री महाश्रमण के 12 जुलाई से ऐतिहासिक चातुर्मास की तैयारियां जोरों पर हैं।

आचार्य श्री महाश्रमण चातुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति-बेंगलुरु के अध्यक्ष मूलचंद नाहर के अनुसार, आचार्य श्री महाश्रमण के कर्नाटक में प्रवेश के उपलक्ष्य में 7 जून को केजीएफ में समारोह होगा। इसके पश्चात विहार करते हुए आचार्य श्री महाश्रमण 20 जून को सुशील धाम पहुंचेंगे। 23 जून को बेंगलुरु के पैलेस ग्राउंड में उनका नागरिक अभिनन्दन होगा। बेंगलुरु के अडकमारनहल्ली, भिक्षु धाम में 3 जुलाई को दीक्षा महोत्सव आयोजित है।

आचार्य श्री महाश्रमण अहिंसा यात्रा द्वारा असम, बंगाल, नगालैण्ड, मेघालय, बिहार, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, आंध्रप्रदेश, केरल और तमिलनाडु के कन्याकुमारी आदि स्थानों पर सद्भावना, नैतिकता एवं नशामुक्ति का शंखनाद कर तमिलनाडु में हैं। उनका 5 जून को कर्नाटक के सुंदरपाल्या में प्रवेश होगा।

मूलचंद नाहर , अध्यक्ष चातुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति

छह हजार आगंतुकों के लिए दो हजार अस्थाई कॉटेज बनाये जा रहे हैं। यहां एक विशाल प्रवचन स्थल निर्मित किया जा रहा है। वहां 8 से 10 हजार लोग एक साथ बैठकर प्रवचन सुन सकेंगे। चातुर्मास के दौरान पूरे देश से
करीब 8 लाख लोग यहां आएंगे।

– दीपचंद नाहर, महामंत्री चातुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति

इरोड में अक्षय तृतीया प्रवास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष हीरालाल चोपड़ा, महामंत्री रमेश पटावरी, ईरोड़ सभाध्यक्ष नरेन्द्र नखत ने बेंगलुरु चातुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष मूलचंद नाहर, महामंत्री दीपचंद नाहर को जैन ध्वज का हस्तांतरण कर व्यवस्था का दायित्व सौंपा। समिति के महामंत्री दीपचंद नाहर ने बताया कि आचार्य तुलसी महाप्रज्ञ चेतना सेवा केन्द्र में चातुर्मास के दौरान हर रोज करीब छह हजार लोगों के ठहरने की व्यवस्था की जा रही है।

महाश्रमणजी में असाधारण विशेषताएं

आचार्य श्री महाश्रमण को पहले मुनि मुदित के नाम से जाना जाता था। असाधारण विशेषताओं के कारण मुनि मुदित ने तेरापंथ संप्रदाय में कई पुराने भिक्षुओं का नेतृत्व किया और 28 वर्ष की आयु में महाश्रमण बन गए। 1997 में 35 वर्ष की आयु में वे वर्तमान आचार्य के लिए ‘युवाचार्य’ के उत्तराधिकारी बने। आचार्य श्री महाप्रज्ञ के महाप्रयाण के बाद वे 9 मई 2010 को आचार्य बने। उनका जन्म 1962 में राजस्थान के सरदारशहर में हुआ था। 12 साल की उम्र में वह साधु बन गए। आचार्य तुलसी और आचार्य श्री महाप्रज्ञ के मार्गदर्शन में उन्होंने शिक्षा प्राप्त की। महाश्रमणजी को आचार्य महाप्रज्ञ द्वारा गंगाशहर स्थित बाफना स्कूल में युवाचार्य उपाधि से सम्मानित किया गया था।

चातुर्मास के दौरान पूरे देश से करीब 8 लाख लोग यहां आएंगे। चातुर्मास स्थल पर अस्थाई चिकित्सालय का निर्माण किया जा रहा है जहां मेडिकल स्टोर, ईसीजी, अल्ट्रासाउंड, एक्स रे, डेंटल, आई केअर, फिजियोथैरेपी, लैबोरेटरी आदि की सुविधा उपलब्ध रहेगी। यह पहला मौका है जब शहर से करीब 20- 22 किलोमीटर दूरी पर स्थित आचार्य तुलसी महाप्रज्ञ चेतना सेवा केन्द्र में चातुर्मास का आयोजन किया गया है। यह स्थल बेंगलुरु रेलवे स्टेशन से 22 किलोमीटर, यशवंतपुर रेलवे स्टेशन से 20 किलोमीटर, केन्गेरी रेलवे स्टेशन से करीब 7 किलोमीटर, मैसूरु रोड मेट्रो स्टेशन से 12 किलोमीटर जबकि शांतिनगर बस स्टैंड से 25 किलोमीटर तथा मैसूरु रोड सैटेलाइट बस स्टैंड से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।


 
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