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फिर एक राजनीतिक शगूफा

19/06/2019

फिर एक राजनीतिक शगूफा

गुंजन कुमार

लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद विधानसभा चुनाव जीतने की जुगत में जुटे केजरीवाल ने दिल्ली मेट्रो व बसों में महिलाओं को मुत यात्रा का राजनीतिक शगूफा छोड़ा है। हालांकि बिजली हाफ, पानी माफ के जमीनी हालात को देखते हुए उनकी सफलता में संदेह है।

लो कसभा की सभी सात सीटों पर करारी हार। चार सीट पर जमानत जब्त। पांच पर पार्टी उम्मीदवार तीसरे स्थान पर। कुल सत्तर विधानसभा क्षेत्र में कहीं भी पार्टी को बढ़त नहीं। दिल्ली विधानसभा के 70 में से 67 सीट जीतकर सत्तासीन आम आदमी पार्टी (आप) का इस लोकसभा चुनाव का ट्रैक रिकॉर्ड है। लोकसभा चुनाव के इस नतीजों ने पार्टी के इकलौते निर्णयकर्ता अरविंद केजरीवाल को कुछ माह बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में हार की साफ तस्वीर दिखा दी। हार की डर से वह घबरा गए हैं। इसलिए उन्होंने अपने पुराने नारे बिजली हाफ, पानी माफ की तर्ज पर नया शगूफा छोड़ा है। इस दफे महिलाओं को बसों और मेट्रो में मुत सफर का नारा गढ़ा है। ताकि दिल्ली की 40 फीसदी से ज्यादा महिला मतदाताओं को लुभाया जा सके। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने महिलाओं को मुत सफर के जो कारण गिनाए, वह कई लोगों को पच नहीं रहा है।

लोकसभा चुनाव नतीजों के बाद अरविंद केजरीवाल दहशत में हैं। यह उनकी वोट खरीदने की नाकाम कोशिश मात्र है। -मनोज तिवारी, दिल्ली भाजपा अध्यक्ष

अगर वे एसा कर सकते हैं तो यह एक अच्छी पहल है। लेकिन हमारा अनुभव बिजली और पानी को लेकर अच्छा नहीं है। इसलिए लगता है कि वे राजनीति कर रहे हैं। यह ठीक नहीं है। -शीला दीक्षित, पूर्व मुख्यमंत्री

यह फैसला महिलाओं को पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए लिया गया है। हमारी प्राथमिकता में महिला सुरक्षा सबसे ऊपर है। -कैलाश गहलोत, परिवहन मंत्री

मुख्यमंत्री के मुताबिक इससे महिलाएं पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ज्यादा इस्तेमाल करेंगी और वह सुरक्षित रहेंगी। यानी महिलाओं को सुरक्षा के लिए डीटीसी की बसों और मेट्रो में मुत सफर की योजना बनायी गयी है। एसे इस योजना को शुरू होने में केजरीवाल के अनुसार करीब 3 महीने लगेंगे। केजरीवाल ने यह भी कहा है कि इसके लिए डीटीसी और मेट्रो के अधिकारियों से पहले ही बात हो चुकी है। यहां सवाल यह उठता है कि जब दोनों विभागों के अधिकारियों से पहले ही इस पर बात हो चुकी है तो योजना को शुरू करने में 3 माह का समय क्यों लगेगा? दिल्ली के कई सिविल सोसायटी के लोगों का कहना है कि सरकार की मंशा यदि सही है तो डीटीसी में यह योजना आज से शुरू हो सकती है। लेकिन सरकार एसा नहीं कर रही। क्यों? अब बात दिल्ली में महिला सुरक्षा पर। यदि महिलाएं पब्लिक ट्रांसपोर्ट में सुरक्षित रहती हैं तो केजरीवाल सरकार को यह जवाब भी देना होगा कि दिल्ली में पहले महिला स्पेशल बस चला करती थी। उन बसों की स्थिति आज क्या है? दरअसल, शीला दीक्षित सरकार के समय महिलाओं के लिए स्पेशल बसें चलती थी। उन बसों में सिर्फ महिलाएं ही सफर करती थीं। यह बस दिल्ली की अधिकतर रूटों पर चलती थी। आॅफिस के समय में इसके फेरे बढ़ा दिये जाते थे। डीटीसी के एक अधिकारी के मुताबिक उस समय पूरी दिल्ली में तकरीबन 200 महिला स्पेशल बसें चलती थी। आज वह सभी बसें बन्द हो चुकी है। आज नहीं बल्कि केजरीवाल सरकार के आने के बाद से ही ये बन्द हैं। सिर्फ इतना ही नहीं अरविंद केजरीवाल ने सत्ता में आने से पहले महिला सुरक्षा के जो-जो वादे यहां किये थे, उनमें से एक भी वादे अभी तक पूरे नहीं हुए हैं। इन वादों में सबसे महत्वपूर्ण था डीटीसी की सभी बसों में सीसीटीवी कैमरा लगाना।


बिजली हाफ करने की बात थी तो सरकार ने फिक्स्ड चार्ज 4 गुणा कर दिया। पानी माफ करना था तो अधिकतर कॉलोनियों में पानी आ ही नहीं रहा। जहां आ रहा है, वहां का पानी बदबूदार है। अधिकतर लोग पानी खरीद कर पी रहे हैं।

 बसों में मार्शल की तैनाती करना। बसों को जीपीएस सिस्टम से जोड़ना। मुख्य बाजार और पूरी दिल्ली में सीसीटीवी कैमरे लगाना भी महिला सुरक्षा को लेकर ही किए गए वादे थे। मगर इनमें से एक भी वादे अभी तक केजरीवाल सरकार ने पूरे नहीं किये हैं। जबकि उनकी सरकार का चार साल का कार्यकाल खत्म हो चुका है। कुछ महीने बाद ही चुनाव प्रक्रिया शुरू होने वाली है। दिल्ली की सरकार अब नींद से जागी है। मुख्यमंत्री केजरीवाल अब कह रहे हैं कि एक लाख सीसीटीवी कैमरे का आर्डर दे दिया गया है। कुछ महीने में कैमरे लगने शुरू हो जाएंगे। उनके इन वादों पर आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्य रहे प्रशांत भूषण कहते हैं, ‘पता नहीं दिल्ली सरकार नींद से कितनी जगी है। यदि थोड़ा-बहुत जगी भी होगी तो उन्हें जगाने का काम लोकसभा के नतीजों ने किया है। इसके लिए दिल्ली की जनता को शुक्रिया कहना चाहिए। बसों और मेट्रो में मुत सफर औचित्यपूर्ण नहीं है। दिल्ली का बजट एसे ही घाटे में है। यह फैसला खजाने पर और बोझ बढ़ाएगा।’ यही नहीं दिल्ली पुलिस की क्राइम रिपोर्ट को देखें तो उससे यह तस्वीर भी साफ होती है कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट में महिलाएं सुरक्षित हैं या नहीं। दिल्ली पुलिस की रिपोर्ट के मुताबिक प्रत्येक साल बसों में महिलाओं के साथ आपराधिक घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है। इसमें तेजी चिंता की बात है। इसी वजह से डीटीसी बसों में कैमरे और सुरक्षा कर्मी रखने की बात हुई थी। इसलिए केजरीवाल का यह कहना कि सार्वजनिक परिवहन में महिलाएं सुरक्षित रहेंगी, यह अर्धसत्य है। केजरीवाल सरकार के एक पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा सरकार की इस घोषणा को सिर्फ और सिर्फ नौटंकी कहते हैं। उनका कहना है कि केजरीवाल दिल्ली की जनता का फ्री में मनोरंजन कर सकते हैं और कुछ नहीं। बिजली हाफ करने की बात थी तो सरकार ने फिक्स्ड चार्ज 4 गुणा कर दिया। पानी माफ करना था तो अधिकतर कॉलोनियों में पानी आ ही नहीं रहा। जहां आ रहा है, वहां का पानी बदबूदार है। अधिकतर लोग पानी खरीद कर पी रहे हैं। यह सब सिर्फ राजनीतिक शगूफा है। दरअसल, केजरीवाल का अब पूरा ध्यान विधानसभा चुनाव पर है। कुछ माह बाद होने वाले विधानसभा चुनावों में लोकसभा जैसा हश्र न हो, इसलिए पार्टी अपने आधार को बढ़ाने में जुटी है। चुनाव आयोग के आंकड़े बताते हैं कि कुल 1.43 करोड़ मतदाताओं में 64 लाख से ज्यादा महिलाएं हैं। महिलाओं को खुश कर विधानसभा चुनाव में सफलता हासिल की जा सकती है, एसा केजरीवाल मानकर चल रहे हैं। परिवहन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि मेट्रो में एसी योजना लागू करने में मुश्किल होगी क्योंकि दिल्ली मेट्रो रेल निगम में केंद्र और दिल्ली सरकार 50- 50 फीसदी के साझेदार हैं। बसों और मेट्रो में कुल यात्रियों में 33 फीसदी महिलाएं होती हैं। एक अनुमान के मुताबिक मेट्रो में महिलाओं की मुत यात्रा पर करीब एक हजार करोड़ प्रतिवर्ष का खर्च आएगा। करीब 200 करोड़ रुपये का खर्च बसों को लेकर सरकार पर आएगा। इस तरह इस योजना को लागू करने पर दिल्ली सरकार को 1200 करोड़ रुपये का बोझ बढ़ेगा। मेट्रो के नियमों और कई तकनीक में बदलाव कर ही इसे लागू किया जा सकेगा एसे में केंद्र सरकार से मंजूरी लेना जरूरी होगा। पहले के अनुभव बताते हैं कि एक बार फिर केंद्र और दिल्ली सरकार में टकराव देखने को मिलेगा। हालांकि कुछ लोगों का यह भी मानना है कि चुनाव नजदीक होने के कारण केजरीवाल टकराव से बचना चाहेंगे। एक सवाल यहां यह भी है कि मुत सफर का लाभ क्या सिर्फ दिल्ली की महिलाओं को मिलेगा या पूरे नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद आदि की महिलाओं को भी। क्योंकि इन शहरों की महिलाएं भी बहुत संख्या में मेट्रो में सफर करती हैं।

 


 
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