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फिर कमल खिलाएंगे धर्मपाल!

22/10/2019

फिर कमल खिलाएंगे धर्मपाल!

डॉ. शारदा वंदना

कार्यकर्ताओं में समन्वय बनाकर कार्ययोजना को अमलीजामा पहनाने से विपक्ष की हर चाल कुंद हो जाती है। कुछ इसी नीति पर राज्य भाजपा का नेतृत्व अग्रसर है।

विधानसभा चुनाव का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। सियासी दलों के दिग्गज मैदान में उतर चुके हैं। आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। शुरूआती दौर में सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी विपक्षी दलों से काफी आगे नजर आ रही है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) को छोड़कर अन्य दल कांग्रेस, झारखंड विकास मोर्चा (झाविमो), राष्ट्रीय जनता दल (राजद) अभी भी मैदान में उतरने की जद्दोजहद मे हैं।
बहरहाल, भाजपा की शुरुआती बढ़त में संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह का बड़ा रोल है। विधानसभा चुनाव में एक बार फिर ‘कमल’ खिलाने की जिम्मेदारी संभाल ली है। उन्होंने जिस प्रकार संगठन, सरकार और कार्यकर्ताओं में सामंजस्य बनाया है, जिस तरह से वे पार्टी के छोटे-बड़े सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं के सुझावों को सुनते हैं, उसका पार्टी को फायदा मिल रहा है। चौबीस घंटे चुनावी रणनीति में जुटे रहने वाले धर्मपाल सिंह के पास बूथ स्तर तक के कार्यकर्ताओं की पूरी लिस्ट मौजूद है, वह हर रोज जमीनी स्तर पर हो रही गतिविधियों का अपडेट ले रहे हैं।
जानकारों की मानें तो इसके लिए संगठन मंत्री ने खास रणनीति बनाई है, वे हर विधानसभा क्षेत्र की समस्याओं और विकास कार्यों का पूरा लेखा-जोखा सामने रखकर उससे निपटने के तौर- तरीकों पर गंभीरता से विचार करते हैं। इसके साथ ही हर विधानसभा सीट पर विपक्ष की हर हलचल पर नजर रखते हैं। निजी मसलों पर कम बोलने वाले सौम्य स्वभाव के धर्मपाल सिंह एक गंभीर राजनेता हैं। जब काम की बात आती है, तो उनका अंदाज बदल जाता है। वो टफ टास्क मास्टर हैं, और कार्यकर्ताओं से कैसे टास्क पूरा करवाना है वह भलिभांति जानते हैं।
यही कारण है कि पिछले दिनों सूबे में हुए कई चुनावों में उन्होंने शीर्ष नेतृत्व के सामने अपनी बातों को बेबाक अंदाज में रखा है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि संगठन मंत्री ने जब से प्रदेश की कमान संभाली है लगातार कार्यकर्ताओं और नेताओं को उत्साहित किया है। जिसका नतीजा है कि भाजपा में न सिर्फ कार्य संस्कृति बदली है बल्कि लाखों की संख्या में नए सदस्य पार्टी से जुड़े हैं। झारखंड की राजनीति को नजदीक से समझने वाले कई जानकार कहते हैं कि संथाल-परगना से लेकर पलामू और कोल्हान से कोयलांचल तक हर इलाके में पार्टी की नींव मजबूत करने में संगठन मंत्री धर्मपाल सिंह का बड़ा योगदान है।
लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी को ऐतिहासिक सफलता दिलाने में भी उनकी राजनीतिक सूझबूझ की बड़ी भूमिका थी। कई मौकों पर पार्टी में अंदरूनी विवाद की स्थिति में उन्होंने संकटमोचक बनकर पार्टी को उबारा है। इसी का परिणाम है कि लोकसभा चुनाव में तमाम झंझावातों के बावजूद भाजपा ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है। भाजपा ने विधानसभा चुनाव में 65 प्लस का लक्ष्य तय किया है। यह आसान नहीं है। इस बार चुनाव में मुद्दे स्थानीय उठाए जा रहे हैं। रघुवर सरकार के कामकाज पर मतदाताओं को लुभाने का प्रयास किया जा रहा है। विपक्ष जमीन अधिग्रहण, सीएनटी-एसपीटी और बेरोजगारी जैसे मुद्दे उठा रहा है। राज्य सरकार की उपलब्धियों पर सवाल उठाए जा रहे हैं। ऐसे में पार्टी की ओर से आक्रामक रुख अपनाया गया है और विपक्ष पर हमला किया जा रहा है।
खास रणनीति के तहत सूबे के सबसे बड़े दल झामुमो के गढ़ संथाल- परगना में भाजपा के कार्यकर्ता दिन रात मेहनत कर रहे हैं। बूथ स्तर तक घर-घर रघुवर अभियान के जरिए मजबूत पैठ बनाने की कोशिश हो रही है। इधर, महागठबंधन का गांठ ही अब तक सुलझ नहीं पायी है। हालांकि मुख्य विपक्षी पार्टी झामुमो और कांग्रेस एक मंच पर आते तो दिख रहे हैं, लेकिन सीटों को लेकर दोनों दलों ही नहीं बल्कि महागठबंधन के सभी दलों में जिद बरकरार है। हर दल सीटों को लेकर अपने-अपने दावे पेश कर रहे हैं।
पिछले दिनों हेमंत सोरेन के आवास पर कांग्रेस प्रभारी आरपीएन सिंह के साथ हुई मुलाकात के दौरान हेमंत सोरेन ने स्पष्ट कर दिया कि झामुमो को 45 सीटें चाहिए। शेष 35 सीटों पर अन्य विपक्षी दल आपस में बंटवारा कर लें। जबकि कांग्रेस पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि उसे 25 सीटे चाहिए। झामुमो भी सीटिंग और सेकेंड पोजिशन की सीटों समेत 45 सीटे चाहता है। उधर, झाविमो, राजद और अन्य विपक्षी दलों में सीटों को लेकर स्थिति पूरी तरह से उलक्ष गयी है।


 
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