युगवार्ता

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जम्मू-कश्मीर में रिहाई की पहल

14/10/2019

जम्मू-कश्मीर में रिहाई की पहल

उमेश चतुर्वेदी

जम्मू संभाग के नेताओं की रिहाई की खबर की सुर्खियां अभी ठंडी नहीं पड़ी है कि कश्मीर घाटी में नजरबंद नेताओं की रिहाई के भी संकेत आने लगे हैं।

जम्मू-कश्मीर को लेकर जो मौजूदा नैरेटिव है उसमें मीडिया, राजनीति और बौद्धिक के एक वर्ग को वर्चस्व हासिल है। जिसके मुताबिक अनुच्छेद 370 के कुछ प्रावधानों को खत्म किए जाने के बाद इस राज्य में हालात बदतर हैं। हालांकि केंद्र सरकार और राज्य प्रशासन इसे खारिज करता रहा है। अब इस दिशा में केंद्र सरकार और राज्य प्रशासन ठोस कदम उठाता भी नजर आ रहा है। सत्य और अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी की एक सौ पचासवीं जयंती दो अक्टूबर के दिन राज्य के जम्मू इलाके के तमाम नेताओं को प्रशासन ने नजरबंदी से मुक्त कर दिया। इसे राज्य प्रशासन की तरफ से सद्भाव के तहत उठाया गया कदम बताया जा रहा है।
प्रशासन ने इस दिन जम्मू इलाके के नेशनल कॉन् फ्रेंस, कांग्रेस और जम् मू-कश् मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी के उन सभी प्रभावी नेताओं को हिरासत से मुक् त कर दिया, जिन्हें पांच अगस्त से ही प्रशासन ने नजरबंद कर रखा था। राज्य प्रशासन के मुताबिक जिन प्रमुख नेताओं को रिहा किया गया, उनमें नेशनल कॉन् फ्रेंस के नेता देवेंद्र राणा और एसएस सलाथिया, कांग्रेस के रमन भल् ला और पैंथर्स पार्टी के हर्षद सिंह शामिल हैं। पांच अगस्त को राज्यसभा में अनुच्छेद 370 के कुछ प्रावधानों को खारिज करने के प्रस्ताव के स्वीकृत होने के बाद से ही राज्य प्रशासन ने एहतियाती रूप से नजरबंद कर रखा था।
हालांकि इन नेताओं की रिहाई पर अभी तक गैर भाजपा दलों की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। जम्मू संभाग के इन नेताओं की रिहाई की खबर की सुर्खियां अभी ठंडी नहीं पड़ी कि कश्मीर घाटी में नजरबंद नेताओं की रिहाई के भी संकेत आने लगे हैं। जम्मू-कश्मीर के तीन पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला और उनके बेटे उमर अब्दुल्ला के साथ ही पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुμती भी अभी नजरबंद हैं। इसके साथ ही कई और नेताओं को प्रशासन ने हिरासत में रखा है, जिसमें आॅल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस के प्रमुख सैयद अली शाह गिलानी, यासिन मलिक भी शामिल हैं। जम्मू संभाग के नेताओं की रिहाई के ठीक अगले ही दिन यानी तीन अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सतपाल मलिक के सलाहकार फारुख खान का बेहद महत्वपूर्ण बयान आया।
उन्होंने कहा कि हालात की समीक्षा करके नजरबंद एक-एक नेताओं को रिहा किया जाएगा। यहां यह बता देना जरूरी है कि फारुख की नजरबंदी को लेकर संसद तक में सवाल उठे थे। खासतौर पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की सांसद सुप्रिया सुले ने उनके बारे में गृहमंत्री अमित शाह से सवाल पूछे थे। संसद में इसे लेकर विपक्षी खेमे की ओर से हंगामा भी हुआ था। अनुच्छेद 370 के कुछ प्रावधानों को खत्म करने के बाद जम्मू-कश्मीर को हासिल विशेष दर्जे को हटाए जाने के बाद से राज्य प्रशासन की चुनौतियां बढ़ी हुई हैं।
कश्मीर की राजनीति में अब तक फायदे में रहे राजनीतिक दल और उसके नेता राज्य के बदले दर्जे से बेहद परेशान हैं। लिहाजा वे आंदोलन पर उतारू हैं, वहीं जम्मू-कश्मीर के बदले हालात को अंतरराष्ट्रीय मामला बनाने के लिए पाकिस्तान पूरी ताकत झोंके हुए है। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और पाकिस्तान परस्त आतंकवादी संगठन जम्मू-कश्मीर को अस्थिर करने की कोशिश में लगातार जुटे हुए हैं। ऐसे माहौल में जम्मू-कश्मीर प्रशासन की चुनौती है कि अगर वहां के नेताओं की रिहाई हुई तो उनकी राजनीतिक सक्रियता से भीड़ जुट सकती है और इसका फायदा पाकिस्तान परस्त आतंकी संगठन उठा सकते हैं।
इसीलिए प्रशासन प्रभावी नेताओं की रिहाई को लेकर इसी वजह से पसोपेश में है। वैसे नई व्यवस्था के तहत जम्मू-कश्मीर राज्य 31 अक्टूबर को केंद्र शासित प्रदेश बन जाएगा। इसी दिन लद्दाख का केंद्र शासित प्रदेश के तौर पर अलग अस्तित्व होगा। जाहिर है कि इसके बाद राज्य में नई राजनीतिक प्रक्रिया शुरू करनी होगी। ऐसे में राज्य में हिरासत में लिए गए नेताओं की रिहाई की प्रक्रिया भी जरूरी होगी। इसलिए माना जा रहा है कि राज्य प्रशासन 31 अक्टूबर के पहले तक राज्य में एहतियातन हिरासत में लिए गए नेताओं को रिहा कर देगा। इस बीच राज्य में जारी प्रतिबंधों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में 16 अक्टूबर को सुनवाई होनी है।
इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ 14 नवंबर को अनुच्छेद 370 के मुद्दे पर अलग से सुनवाई करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में राज्य प्रशासन और केंद्र सरकार से एक अक्टूबर को सुनवाई के दौरान 28 दिनों में जवाब मांगा है। माना जा रहा है कि इस जवाब के पहले भी राज्य में नजरबंद किए गए नेताओं की रिहाई हो सकती है। हालांकि रिहा किए जाने वालों में विशुद्ध राजनीतिक हस्तियां ही होंगी। हुर्रियत नेताओं पर चूंकि आतंकी फंडिंग आदि के मामले भी चल रहे हैं, लिहाजा उनकी रिहाई पर संदेह है।


 
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