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महात्मा गांधी को समर्पित सत्र

05/10/2019

डॉ. दिलीप अग्निहोत्री
महात्मा गांधी की एक सौ पचासवीं जयंती पर उत्तर प्रदेश विधानसभा ने कीर्तिमान स्थापित किया। पहली बार कोई विधायी सदन लगातार छत्तीस घण्टे तक चला। यह सत्र महात्मा गांधी को समर्पित था। इसमें वही विषय शामिल थे, जिनकी कल्पना महात्मा गांधी ने की थी। वह एक साथ दो मोर्चों पर कार्य कर रहे थे। पहला, भारत को ब्रिटिश चंगुल से मुक्त कराना चाहते थे, दूसरा स्वतंत्र भारत को खुशहाल देखना चाहते चाहते थे। इसके लिए उन्होंने सुनियोजित अर्थनीति, कृषि नीति, ग्राम स्वराज की कल्पना की थी। इतना ही नहीं विश्व के प्रति भी उनकी स्पष्ट नीति थी। जिसमें युद्ध और तनाव की जगह अहिंसा और सद्भाव था। वह वैश्विक समस्याओं का समाधान वार्ता के द्वारा चाहते थे।
गांधी जयंती पर उत्तर प्रदेश विधानसभा ने गांधी दर्शन पर आधारी सतत विकास के विषयों पर विचार-विमर्श किया। 36 घंटे लगातार सदन चलता रहा। बेहतर होता कि विपक्ष भी इस ऐतिहासिक पल का हिस्सा बनता। खैर, इतिहास इसका भी आकलन करेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ठीक कहा कि यह देश के लोकतंत्र की अद्भुत घटना है, जिसमें सदस्यों ने अपने विचार व्यक्त किए। इस विशेष सत्र में दोनों सदनों के सदस्यों ने सम्बन्धित विषयों पर अपने विचार रखे।
यह सराहनीय है कि विपक्ष के शिवपाल सिंह यादव, अदिति सिंह सहित सात सदस्यों ने राजनीति की जगह महात्मा गांधी को महत्व दिया। ये लोग कार्यवाही में शामिल हुए। लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दर्शायी। लोकतंत्र संवाद से चलता है। इसे बाधित करने पर अराजकता की स्थिति बनती है। इस चर्चा के दौरान दोनों सदनों में सदस्यों ने अपने विचार प्रस्तुत किये। इन्हें संकलित कर इनका दस्तावेज बनाया जाए, जिससे लोगों को इसके माध्यम से सतत् विकास के लक्ष्यों पर सदन के अन्दर की गई चर्चा की जानकारी मिल सके।
मुख्यमंत्री ने भगवान बुद्ध का स्मरण करते हुए कहा कि वह कहते थे दुनिया में दुःख है तो उसका कारण भी है और निवारण भी। इसी प्रकार लोकतंत्र में यदि समस्याएं हैं तो उन समस्याओं का कारण और निवारण दोनों मौजूद हैं। प्रदेश सरकार इसी भावना से कार्य कर रही है। इसी के मद्देनजर मंत्रि परिषद् सदस्यों एवं वरिष्ठ अधिकारियों ने आईआईएम प्रबंधन का ज्ञान हासिल किया। 2030 तक के विकास का रोडमैप बनाया गया है। यह एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य है, जिसे वर्ष 2016 में विश्व ने अंगीकृत किया है। इसके अनुरूप राज्यों सरकारों एवं अन्य संस्थाओं को अपनी जिम्मेदारी निर्धारित करनी होगी। उत्तर प्रदेश सरकार इस दिशा में कार्य कर रही है। उसने दो करोड़ 61 लाख शौचालयों का निर्माण करके स्वच्छ भारत मिशन में सबसे बड़ा योगदान किया है। भारत में सतत् विकास लक्ष्य की भावना आदिकाल से रही है। भारत ने ही वसुधैव कुटुम्बकम का मानवतावादी विचार दिया। प्रकृति संरक्षण का विचार भी हमारे ऋषियों ने दिया, आज इनका महत्व समझा जा सकता है। सतत् विकास के लिए सरकार संसाधन जुटाने हेतु कटिबद्ध है। पिछले ढाई साल में सरकारी राजस्व संग्रह को बढ़ाया गया है। केंद्र सरकार, विश्व बैंक, एशियन डवलपमेन्ट बैंक, सीएसआर एवं सिविल सोसाइटी से वित्तीय सहयोग हासिल करने के प्रयास भी किए गए और विशेषज्ञों का सहयोग लिया गया। प्रदेश से निर्यात में वृद्धि हुई है। गरीबी, बीमारी दूर करने की संयुक्त रणनीति पर कार्य चल रहा है। अन्तर्विभागीय समन्वय के साथ कार्य करने की योजनाएं बनी हैं। सतत् विकास की कार्यवाही को निरन्तर आगे बढ़ाया गया है। सतत् विकास के तहत एक ऐसे समाज का निर्माण करना है, जिसमें गरीबी, भुखमरी न हो। लैंगिक समानता हो, लोगों को बढ़ने के अवसर और सम्मान मिले। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी राज्य सरकार कार्यवाही कर रही है।
सतत विकास की ऐसी ही कल्पना महात्मा गांधी ने की थी। जाहिर है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा का यह ऐतिहासिक सत्र महात्मा गांधी को समर्पित था। यह अपने लक्ष्य को हासिल करने में सफल रहा है।
(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)


 
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