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योगी ने अधिकारियों के कसे पेंच, समीक्षा बैठक में दिये कड़े निर्देश

12/06/2019

-पीएन द्विवेदी 

लखनऊ, 12 जून (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को समीक्षा बैठक के दौरान जिला से लेकर राज्य स्तर के सभी वरिष्ठ अधिकारियों की जमकर क्लास ली। कानून व्यवस्था और विकास के मुद््दे पर अफसरों को उन्होंने कड़े निर्देश दिये और जनता के प्रति संवेदनशील होने की सीख दी। क्राइम और करप्शन के मामले में जीरो टालरेंस की नीति पर काम करने को कहा।

मुख्यमंत्री ने आज लोक भवन में तीन दिवसीय मैराथन समीक्षा बैठक शुरू की। पहले चरण में पूर्वान्ह 11 बजे से अपराह्न 1.30 बजे तक उन्होंने जिलाधिकारियों और जिला पुलिस प्रमुखों के साथ प्रदेश की कानून व्यवस्था की समीक्षा की। इस बैठक में प्रमुख सचिव गृह और पुलिस महानिदेशक समेत कई और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इसके बाद अपराह्न दो बजे से उन्होंने दूसरे चरण में विकास कार्यों की समीक्षा की। अपराह्न चार बजे से मुख्यमंत्री योगी ने राजस्व विभाग की समीक्षा की।
 
इस दौरान मुख्यमंत्री योगी ने कानून व्यवस्था और विकास योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हर अधिकारी प्रतिदिन कम से कम दो घंटे अपने कार्यालय में बैठकर जनता का समस्यायें सुने। जिलास्तीय अधिकारियों से कहा कि वे अपने नियुक्ति स्थल पर ही रहें और जन-जन तक पहुंचे। तहसील और ब्लाक के अधिकारी भी अपने ही क्षेत्र में रात्रि विश्राम करें। जिलाधिकारी प्रतिदिन एक घंटे समय निकालकर क्षेत्र में जायें और निरीक्षण करें। छोटी घटनाओं पर भी पुलिस संवेदनशील बने। योगी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जिले में जिलाधिकारी और जिला पुलिस प्रमुख कानून व शांति व्यवस्था के लिये सीधे जिम्मेदार होंगे।

बैठक के बाद मुख्य सचिव डॉ. अनूप चंद्र पाण्डेय ने बताया कि मुख्यमंत्री ने अफसरों को कानून व्यवस्था में सुधार के कड़े निर्देश दिये। उन्होंने अफसरों को पुलिस की विजिबिलिटी बढ़ाने के साथ ही फुट पेट्रोलिंग बढ़ाने की बात कही। मुख्य सचिव ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी ने अधिकारियों से कहा है कि प्रदेश की कानून व्यवस्था को ठीक रखने के लिए वे निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ काम करें। आपराधिक तत्वों पर पैनी नजर रखें।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि वे प्रतिदिन नौ बजे से 11 बजे तक अपने कार्यालय में बैठकर जनता की समस्यायें अवश्य सुने और उसका तत्काल निस्तारण करें। उन्होंने कहा कि जनता से संवाद बनाये रखना सुशासन के लिये बहुत आवश्यक है। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने राजधानी में बैठे राज्य स्तर के अधिकारियों से भी कहा कि वे भी जिलों का दौरा कर नियमित रुप से स्थितियों की समीक्षा करते रहें।
 
मुख्य सचिव ने बताया कि मुख्यमंत्री ने समस्त जिलाधिकारियों एवं पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से यह अपेक्षा की है कि वे जनता से बेहतर संवाद बनाये ताकि संवेदनहीनता और संवादहीनता की स्थिति पैदा न हो। साथ ही यह भी निर्देश दिए हैं कि सभी अधिकारी अपनी-अपनी रिपोर्ट 20 जून तक मुख्य सचिव के माध्यम से मुख्यमंत्री को सौपेंगे। श्री पांडेय ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा संचालित सभी योजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी जिलाधिकारी की है। चाहे वह ओडीएफ हो, प्रधानमंत्री आवास योजना, राशन कार्ड, आयुष्मान भारत, मुद्रा लोन, स्टार्ट अप इंडिया जैसी योजनाओं में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।
 
हर थाने पर टॉप 10 के अपराधियों की सूची तैयार करने के निर्देश
मुख्यमंत्री योगी ने प्रदेश के थाने स्तर पर टाॅप 10 के अपराधियों की सूची तैयार करने को कहा है। कानून व्यवस्था की बैठक में पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह से वह नाराज भी दिखे। उनसे उन्होंने पुलिस के रवैया में सुधार लाने को कहा। समीक्षा बैठक के दौरान मंच पर बैठे डीजीपी की तरफ देखते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे नहीं चलेगा। आप लोग कुछ नहीं कर पा रहे हैं। यह पहला मौका था जब मुख्यमंत्री योगी ने आला अफसरों की उपस्थिति में प्रदेश के जिलाधिकारी और कप्तानों की संयुक्त रूप से बैठक की।

बैठक के बाद मीडिया से रूबरू हुए पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह ने कहा कि जनता के प्रति जवाबदेही को तय करने के लिए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि थानाध्यक्षों की नियुक्ति मेरिट के आधार पर ही होनी चाइये। जिनके खिलाफ शिकायत है उन्हें कतई चार्ज न दिया जाए। पुलिस महानिदेशक ने बताया कि मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि अपराधियों को किसी भी स्थिति में न छोड़ा जाये। जिलाधिकारी और पुलिस कप्तान एक साथ बैठकर के जिले की समीक्षा करें और अपराधियों पर कार्रवाई  करें। एन्टी रोमियो एस्कॉर्ट को और मजबूत किया जाये। स्कूल फिर से खुलने वाले हैं, उस समय बालिकाओं को जागरूक करंे। अपराधी के मन मे कानून व्यवस्था का डर होना चाहिये। योगी ने साइबर क्राइम और गौ तस्करी पर विशेष ध्यान देने की बात कही। 

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि प्रदेश के हर थाने में टॉप टेन अपराधियों की सूची तैयार की जाए और थाने में चस्पा कर उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही की जाए। थाने की तरह जिले में भी टॉप टेन अपराधियों की सूची तैयार करने को उन्होंने कहा। शराब से जुड़े अपराधों पर विराम लगाने के लिये भी उन्होंने जोर दिया। साथ ही महिलाओं, छोटे बच्चों और दलितों व अल्पसंख्यकों के खिलाफ होने वाले अपराधों पर पूरी सजगता बरतने के निर्देश दिये। 
 
समीक्षा बैठक से बाहर जमा कराये गये अफसरों के मोबाइल
समीक्षा बैठक में काफी सख्ती बरती गयी। अफसरों के मोबाइल फोन बाहर ही जमा करा लिये गये थे। जो अधिकारी थोड़ा विलंब से पहुंचा उसे बैठक में भी नहीं जाने दिया गया।  लोक भवन में दिन भर चली समीक्षा बैठक में आज पहली बार इतनी सख्ती देखी गयी। ठीक 11 बजे शुरू हुई बैठक में जो अधिकारी थोड़ा भी विलंब से पहुंचा उसे गेट पर ही रोक दिया गया। इसके अलावा सभी अधिकारियों के मोबाइल फोन बाहर ही जमा करा लिये गये। इससे कई वरिष्ठ अधिकारियों को शर्मिंदा भी होना पड़ा। 

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी ने कुछ दिन पहले कैबिनेट बैठक समेत सभी बैठकों में मोबाइल फोन लाने को प्रतिबंधित कर दिया था। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद इस संबंध में मुख्य सचिव ने एक आदेश भी जारी किया था। इसी आदेश के अनुपालन में लोक भवन में मंगलवार को सम्पन्न हुई कैबिनेट की बैठक में भी सभी मंत्रियों के मोबाइल फोन बाहर ही रखवा लियेे गये थे। 

13 और 14 जून को भी समीक्षा बैठक
मुख्यमंत्री योगी की यह समीक्षा बैठक लगातार तीन दिन तक चलेगी। 13 जून को राज्य के सभी मुख्य चिकित्साधिकारियों और अस्पतालों के अधीक्षकों के साथ बैठक कर वह स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा करेंगे। इसके बाद सूबे की शिक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के लिये उन्होंने 14 जून को प्रदेश के सभी शिक्षा अधिकारियों को बुलाया है। राजधानी में जनपद स्तर के अधिकारियों के साथ कानून व्यवस्था, विकास कार्य, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के बाद मुख्यमंत्री योगी 16 जून से पूरे एक माह तक जिलों के भ्रमण पर निकलेंगे। इस दौरान वह औचक निरीक्षण भी करेंगे। मुख्यमंत्री के इस तेवर को देखकर अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है।
  
 
हिन्दुस्थान समाचार
 


 
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