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पर्यटन से बढ़ेगा रोजगार : प्रहलाद पटेल

30/09/2019

पर्यटन से बढ़ेगा रोजगार : प्रहलाद पटेल

विविधता और गंगा यमुनी संस्कृति भारतीय पर्यटन उद्योग के लिए एक अवसर है। देश में अनगिनत पर्यटन स्थल हैं, जिनमें पर्यटकों को आकर्षित करने की अपार क्षमता है। बस जरूरत है कि कनेक्टिविटी, सुरक्षा और जन सुविधाओं से ऐसे स्थलों को संबद्ध किया जाए। पर्यटन से जुड़े तमाम बिंदुओं पर सौरव राय ने संस्कृति और पर्यटन मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रहलाद सिंह पटेल से बात की। प्रस्तुत है संपादित अंश।

 भारत सरकार पर्यटन को लेकर कितना गम्भीर है?
मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री ने मन की बात और लाल किले, दोनों ही माध्यमों से यह स्पष्ट किया है कि वह पर्यटन को लेकर कितने गंभीर हैं। इसके लिए उन्होंने स्वदेशी और ग्लोबल मीडिया दोनों स्तर पर प्रतिबद्धता जाहिर की है। प्रधानमंत्री जितने देशों में गये हैं वहां उन्होंने अपनी संस्कृति और पर्यटन को जिस प्रकार से प्रचारित किया, वह बताता है पर्यटन को को लेकर कितने गम्भीर हैं। एक तरह से वह हमारे ब्रांड एंबेसडर हैं। मुझे लगता है कि हमारी सरकार की लाइन बहुत साफ है। उसकी दिशा भी सही है। उसका प्रमाण यह है कि हमारी रैंकिंग में सुधार हुआ है 2013 में हम विश्व रैकिंग में 60 वें स्थान पर थे। फिलहाल हम 36वें स्थान पर हैं।

 पर्यटन के क्षेत्र में सुरक्षा एक अहम मुद्दा है, इसके लिए सरकार क्या योजना बना रही है?
जब मैंने मंत्री पद स्वीकार किया था तो सबसे पहला मेरा उद्देश्य था कि धन से ज्यादा धारणा बदलने की जरूरत है। मैं भी जानता हूं कि सुरक्षा होनी चाहिए। लेकिन सुरक्षा कैसी होनी चाहिए किन-किन परिस्थितियों में होनी चाहिए। और उसमें किस-किस की जवाबदेही होनी चाहिए। इस पर फोकस है। भारत सुरक्षित और हमारा पर्यटन सुरक्षित यही हमारा उद्देश्य है। राज्य और केंद्र दोनों को मिलकर इस पर कार्य करना होगा। इसलिए जरूरी है कि जो हमारे सहयोगी संगठन हैं, उनको भी अपने दायित्व को समझ कर पर्यटन ओर पर्यटकों की सुरक्षा को सुनिश्चित करना चाहिए। जैसे रेल में यात्रा करते समय किसी पर्यटक के साथ कुछ घटता है तो वहां सुरक्षा की जिम्मेदारी रेलवे की है।
वैसे ही किसी राज्य में अगर पर्यटक जाएगा तो वहां की सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है। जितनी भी यात्रा कराने वाली कम्पनी है उनकी भी जिम्मेदारी है। हमारे पास सीधी जवाबदेही तो किसी बात पर नहीं है लेकिन नैतिक जिम्मेदारी हमारी है। क्योंकि जब भी कहीं भी किसी पर्यटक के साथ कोई घटना घटेगी तो वह यही कहेगा कि भारत में ऐसा मेरे साथ हुआ। इसलिए सुरक्षा व्यवस्था में जनता का भी शामिल होना जरूरी है। यह बदलाव पूरी तरह से धारणा का बदलाव है और इसमें सबकी जिम्मेदारी बनती है। बहुत सारी चुनौतियां हैं जिस पर नए सिरे से काम करना होगा।

 पर्यटन स्थलों पर आधारभूत सुविधा की कमी दिखती है। इसे दूर करने के लिए सरकार की क्या योजना है?
इसमें भी कई कैटेगरी है जैसे हमने तय किया है कि ‘हमारी धरोहर हमारी पहचान’ जिसमे कुछ बड़े औद्यौगिक घराने शामिल होकर धरोहरों को संवारने का काम लिया है। उन्होंने उन धरोहरों पर अच्छा काम किया है। लाल किले में आप जाएंगे तो देखेंगे कि वहां पर काम शुरू हुआ है और अच्छा काम हुआ है। पहले चरण में यह एक अच्छी कोशिश है। दूसरी बात मैं अभी ताजमहल गया था। मैंने वहां की सुविधाओं का जायजा लिया और तीन चीजें तय की जैसे वहां मैंने देखा कि मां को अपने बच्चे को दूध पिलाने के लिए कोई जगह नहीं है। जबकि इस तरह की सुविधा होनी चाहिए। इसपर हमारा ध्यान भी है। हमने यह तय किया कि जितनी भी हमारी आॅईकॉनिक साइट्स हैं, वहां पर यह चीजें शुरू होनी चाहिए। यह बहुत छोटी चीज है लेकिन बहुत ही महत्वपूर्ण है। उसी तरह से टॉयलेट और साफ- सफाई को लेकर हमारी सरकार सक्रिय है। प्रधानमंत्री की तरफ से भी साफ निर्देश है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर का स्वच्छता का प्रबंध आॅईकानिक साइट्स में उपलब्ध करायें। इससे विदेशी पर्यटक आकर्षित होंगे।

 पर्यटन क्षेत्र में राजस्व बड़ा मुद्दा है। भारत सरकार इसे बढ़ाने के लिए किस तरह के कदम उठा रही है?
पूरी दुनिया में पर्यटन बहुत बड़ा आय का साधन है। प्रधानमंत्री का भी इस पर ध्यान है। पर्यटन से भारी राजस्व उपार्जन हो सकता है। हमारे मंत्रालय ने कुछ बातों पर सुझाव दिया है। जैसे कि ई-वीजा ने अच्छे परिणाम दिए लेकिन इसकी अवधि बढ़नी चाहिए। हमने राज्य के पर्यटन मंत्रियों का सम्मेलन किया था। इसमें यह निर्णय हुआ कि ई-वीजा कि अवधि एक साल से बढ़ाकर पांच साल कर दी जाए। इसलिए इन चीजों को सरकार समझती है कि इकोनॉमी में क्या जरूरत है और क्या संशोधन होना चाहिए।

 पर्यटन में जब रोजगार बढ़ेगा, तब उन क्षेत्रों से लोगों को पलायन रुकेगा। इसके लिए सरकार क्या कर रही है?
पर्यटन क्षेत्र प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों प्रकार के रोजगार उपलब्ध कराता है। इसलिए पर्यटन के लिए योजना बनाने में इस बात पर पूरा फोकस है। अगर पर्यटन क्षेत्र में कार्य होगा तो रोजगार अपने आप बढ़ेगा। जितना ही हम पर्यटन स्थलों को पर्यटक उन्मुखी बनाएंगे उतने ही पर्यटक उस क्षेत्र में आएंगे। इससे लोगों की आय भी बढ़ेगी और उनको अपना घर छोड़कर भी नहीं जाना पड़ेगा।

 देश के पर्वतीय क्षेत्र में पर्यटन उद्योग की अपार संभावनाएं हैं। सरकार इस विषय पर कितना गम्भीर है?
हम इस पर भी कार्य कर रहे हैं। हमने यह तय किया कि जितने भी पर्वतीय राज्य हैं, वहां 2007 से हिमालय की जो चोटियां हैं उसे पर्वतारोहण के लिए बंद कर दिया गया था। मैं प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने एक साथ 137 चोटियों को खोलने का निर्देश दे दिया। अब इसमें हमारी और राज्य सरकार की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है क्योंकि जब भी आप पर्वतारोहण की बात करते हैं तो सबसे जरूरी चीज है सुरक्षा, दूसरी चीज है वहां जन सुविधाएं तीसरी चीज है, हम ट्रेनिंग दे पाने की स्थिति में हैं कि नहीं है। और चौथी चीज है जो इंस्टूमेंटल सपोर्ट है। अब इसमें भी हमें यह देखना है जो विदेशी पर्वतारोही हैं वह खुद लेकर आएगा कि उसे हम देंगे। इन सब व्यवस्था को देख कर, समझकर हम आगे बढ़ रहे हैं। यह बहुत बड़ी जिम्मेदारी है जो राज्य सरकार और हमारे ऊपर है।

 प्रधानमंत्री ने देशी पर्यटकों को देश में घूमने के लिए प्रोत्साहित किया है। परन्तु कई ऐसे पर्यटन क्षेत्र हैं जहाँ कनेक्टिविटी की कमी है। इसको दूर करने की क्या योजना है?
स्वदेश दर्शन का एक उद्देश्य यह भी है कि जहां पर रोड कनेक्टिविटी नहीं है वहां रोड कनेक्टिविटी बनाई जाए। जहां पर जन सुविधाएं नहीं हैं वहां जन सुविधाएं हों। और जो हमारे आईकॉनिक साइट्स हैं अगर उनके बीच में कोई साइट्स आती है तो उसके बीच की कनेक्टिविटी को बनाना हमारा प्राथमिक उद्देश्य है। यह सब स्वदेश दर्शन की स्कीम का हिस्सा है। आज के समय में रोड और ट्रेन कनेक्टिविटी तो उबलब्ध है पर हवाई सुविधा उपलब्ध नहीं है। उसके लिए भी हम प्रयासरत हैं।

पर्यटन क्षेत्र प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों प्रकार के रोजगार उपलब्ध कराता है। इसलिए पर्यटन के लिए योजना बनाने में इस बात पर पूरा फोकस है। अगर पर्यटन क्षेत्र में कार्य होगा तो रोजगार अपने आप बढ़ेगा।

 लेह-लद्दाख और जम्मू कश्मीर में पर्यटन को बढ़ाने के लिए सरकार किसी नई योजना पर कार्य कर रही है। इसमें कितनी सच्चाई है?
मंत्रिमंडल के अधिकारीगण गए थे। वहां पर जितनी भी पर्यटन की दृष्टि से चीजें विकसित की जा सकती हैं। उसको हमने देखा समझा और रिपोर्ट दे दी है। उसको प्रधानमंत्री जी विस्तार करेंगे। वैसे वहां पर पर्यटन की सुविधओं का बहुत अभाव नहीं है। वहां पर सुंदरता, शांति और एडवेंचर स्पोर्ट्स है। इसपर हम कार्य करना शुरू कर चुकें हैं।

 उत्तर-पूर्वी राज्य प्राकृतिक और सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध हैं। ऐसे में यहां के लिए कोई विशेष योजना है क्या?
उत्तर-पूर्वी राज्यों को लेकर अटल बिहारी वाजपेई के समय में ही खाका खींचा गया था। हमारी पिछली सरकार के कार्यकाल में इस पर बहुत काम भी हुआ और हो भी रहा है। जैसे मणिपुर की कनेक्टिविटी रह गई है वह इस साल पूरी हो जाएगी। बाकी राज्य रेल से जुड़ा है। सिक्किम में एयरपोर्ट तैयार हो गया है। कोई भी ऐसा राज्य नहीं है जो कनेक्टिविटी में पीछे हो। मुझे लगता है कि इससे बड़ी बात यह है कि जो धारणा थी उत्तर-पूर्वी राज्यों के बारे में वह पांच वर्षों में खत्म हुई है। नई पीढ़ी को भी उत्तर पूर्वी राज्यों में घूमाना चाहिए। इस पर हम विचार कर रहे हैं और हमने एएचआरडी मंत्रालय को पत्र भी लिखा है कि नवोदय और केन्द्रीय विद्यालय के बच्चों को उत्तर-पूर्व भेजें। अगर वह बच्चे वहां जाकर देखेंगे तो वह जरूर वहां से कुछ सीखेंगे।

 पर्यटन के लिहाज से विश्व के शीर्ष दस देशों में आने में हमें कितना समय लगेगा?
देखिए 5 साल में विश्व पर्यटन सूची में हम 60 से 34 पर आ गये हैं। अगले 5 साल में इससे भी तेजी से हम आगे बढ़ेंगे। हो सकता है कि 5 साल के अंदर ही आप की जो बात है वह पूर्ण होते हुए आप देखें।


 
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