युगवार्ता

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आनलाइन सिनेमा-संगीत

04/05/2020

आनलाइन सिनेमा-संगीत

 प्रकाश के रे

सोशल मीडिया और इंटरनेट जैसे मंचों के माध्यम से लोगों के साथ साथ सिनेमा और संगीत के दिग्गज न केवल कोरोना संकटकाल में अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं, बल्कि इसके माध्यम से सीख भी दे रहे हैं।

प्रकाश के रे

नुष्य या तो परिस्थितियों को अपने अनुकूल बनाने या अपनी सोच के अनुसार उन्हें संभावित करने का प्रयास करता है। उसमें यह भी क्षमता होती है कि वह परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढाल लेता है या उनके साथ समायोजित करने की चेष्टा करता है। कोरोना विषाणु ने देश और शेष विश्व की बहुत बड़ी जनसंख्या को अपने घरों में बंद रहने पर विवश कर दिया है, तो लोग भी अपनी कला की अभिव्यक्ति के लिए उपलब्ध साधनों का उपयोग कर रहे हैं। आपने सोशल मीडिया और इंटरनेट के अन्य मंचों पर देखा होगा कि लोग आॅडियो-वीडियो के माध्यम से बात कर रहे हैं, गीत गा रहे हैं और कविताओं-कहानियों का पाठ कर रहे हैं। इसका एक आयाम यह है कि कई लोग एक साथ सूचना-तकनीक और इंटरनेट के द्वारा साझा प्रस्तुतियाँ कर रहे हैं।

इस महीने के प्रारंभ में भारतीय सिनेमा के कई नामचीन अभिनेताओं ने अपने घरों में ही रहकर अभिनय किया और उसकी रिकॉर्डिंग की। यह सब एक लघु फिल्म के रूप में हमारे सामने आया। इस फिल्म ‘फैमिली’ में अमिताभ बच्चन, रजनीकांत, ममूटी, मोहनलाल, रणबीर कपूर, प्रियंका चोपड़ा, चिरंजीवी, आलिया भट्ट और दिलजीत दोसाँझ जैसे दिग्गज उपस्थित हैं। कहानी दिलचस्प है। यह एक बड़ा परिवार है और इसके मुखिया का चश्मा नहीं मिला रहा है। इसकी अवधारणा प्रसून पांडेय और अमिताभ बच्चन की है। यह छोटी फिल्म मनोरंजन तो करती ही है, इससे ऐसी फिल्मों के चलन बनने की प्रेरणा भी मिलेगी। कोरोना विषाणु के संक्रमण से बचने-बचाने के लिए घरों में रहने के लिए जागरूकता का संदेश भी इसमें है। एक संदेश यह भी है कि ऐसी कठिन समस्या का सामना करने में विभिन्न भाषाओं के हमारे फिल्मी कलाकार एक साथ आते रहे हैं और देश की एकजुटता का प्रतीक बनते हैं।

ऐसा ही एक महत्वपूर्ण प्रयोग भारत रत्न स्वर्गीय पंडित रविशंकर के सौवें जन्मदिवस पर उनकी पुत्री और शिष्या अनुष्का रविशंकर ने महान संगीतकार के अनेक शिष्यों के साथ आॅनलाइन जुगलबंदी के माध्यम से की है। यह भी बढ़िया संयोग है कि जिस दिन (सात अप्रैल) को फिल्मी कलाकारों ने ‘फैमिली’ को प्रदर्शित किया था, उसी दिन संगीत की यह प्रस्तुति भी हमारे सामने हुई। इसमें प्रख्यात संगीतकारों विश्व मोहन भट्ट, शुभेंद्र राव, बैरी फिलिप्स और बिक्रम घोष समेत अन्य कई लोग सम्मिलित हुए। इसमें पंडित जी की कृति ‘सांध्य राग’ को अलग अलग वाद्ययंत्रों पर प्रस्तुत किया गया है। ऐसी और भी प्रस्तुतियां आगामी दिनों में हमारे सामने आयेंगी। इतने सारे बड़े संगीतकारों को एक साथ एक राग को प्रस्तुत करते हुए देखना और सुनना सामान्य दिनों में भी अकल्पनीय है।

साहित्य के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित गीतकार-गायक बॉब डिलन ने मार्च के अंतिम दिनों में 17 मिनट लंबा गीत- मर्डर मोस्ट फाउल- प्रस्तुत कर अपने प्रशंसकों को चैंका दिया। कोई मूल गीत-संगीत की उनकी प्रस्तुति आठ वर्ष के अंतराल पर आयी है। वर्ष 2016 में विश्व का सर्वोच्च सम्मान नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने के बाद भी यह उनका पहला गीत है। कुछ दिन पहले विश्व-विख्यात संगीत बैंड- द रोलिंग स्टोंस- ने भी आठ साल बाद कोई नया गाना गाया है। इसका शीर्षक है- लिविंग इन ए घोस्ट टाउन। डिलन ने अपने गीत में साठ के दशक में अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ केनेडी की हत्या और उसके बाद से अमेरिकी रा नीति, अर्थव्यवस्था और समाज में होती आ रही निरंतर गिरावट को रेखांकित किया है। द रोलिंग स्टोंस का गीत, जैसा कि शीर्षक से ही इंगित होता है, हमारे वर्तमान के अंधेरों, आशंकाओं और अनिश्चितताओं के बारे में है।   

आॅस्कर समेत कई बड़े पुरस्कारों से सम्मानित फिल्मकार माइकल मूर ने इंटरनेट पर अपनी नयी फिल्म ‘प्लेनेट आॅफ ‘ूमंस’ को जारी किया है। मूर इसके निर्माता हैं और इसका निर्देशक उनकी अनेक फिल्मों के सह-निर्माता रह चुके जेफ गिब्स ने किया है। यह एक वृत्तचित्र है और इसमें जलवायु परिवर्तन को रोकने एवं पर्यावरण के संरक्षण के लिए प्रोत्साहित किये जा रहे स्वच्छ ऊर्जा से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न उठाये गये हैं, जैसे- स्वच्छ ऊर्जा के लिए क्या प्रकृति का वैसा ही दोहन नहीं होगा, जो जीवाश्म-आधारित ईंधनों में हो रहा है, क्या इसके पीछे बहुत अधिक लाभ कमाने और नीतियों को बदलने के लिए अनैतिक साधनों का प्रयोग नहीं हो रहा है आदि।

ये कुछ उदाहरण हैं। इनके अलावा भी बड़ी संख्या में नयी पुरानी फिल्में और गीत आदि सोशल मीडिया में उपलब्ध हो रहे हैं। बहुत से मंचों ने तो यह सब नि:शुल्क दे दिया है। लॉकडाउन में इनका आनंद भी लिया जाए और इनसे प्रेरित होकर अपनी कला का भी प्रदर्शन किया जाए।


 
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