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सावरकर पर लगाये गये आक्षेप बेबुनियाद: नितिन गडकरी

16/03/2020

सावरकर पर लगाये गये आक्षेप बेबुनियाद: नितिन गडकरी

संतोष कुमार राय

अगर हम सावरकर को भूले तो भारत का भविष्य अच्छा नहीं रहेगा।1947 वाले हालात फिर से आ सकते हैं।’’ ये बातें केंद्रीय मंत्री और पूर्व भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने नई दिल्ली के आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर के सभागार में समापन सत्र में कही। उन्होंने सावरकर को लेकर सबसे बड़ी समस्या की ओर संकेत करते हुए कहा कि उनके बारे में किया गया दुष्प्रचार, सच्चाई से परे हैे। वे सामाजिक समरसता के ध्वजवाहक थे। अब आवश्यकता है उनके बारे में फैलाए गए दुष्प्रचार को रोकने और उनका सही चित्र देश और समाज के सामने प्रस्तुत करने की। सावरकर दर्शन प्रतिष्ठान की ओर से आयोजित इस राष्ट्रीय परिचर्चा में कई वक्ताओं ने कहा कि एक ऐसा वर्ग है जो लगातार सावरकर के ऊपर बेबुनियाद और आधारहीन आक्षेप लगाता रहा है। देश भर से पधारे वक्ताओं ने इन आक्षेपों की वास्तविकता पर गहन विचार-विमर्श किया। सम्मलेन में इस बात पर चर्चा हुई कि आखिर सावरकर को हमेशा अपमान ही क्यों सहना पड़ा? उनके बारे में जो धारणाएं बनाईं गईं उनका वास्तविकता से क्या संबंध है? इन दो दिनी बैठक का निचोड़ यह था कि समाज में इस तरह के प्रवाद इसलिए फैलाये गए ताकि सावरकर का राष्ट्रीय चिंतन लोगों के सामने न आये। यह एक तरह से उन्हें बदनाम करने की गहरी साजिश थी।

सावरकर दर्शन प्रतिष्ठान की ओर से नई दिल्ली के आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में 26-27 फरवरी को दो दिवसीय राष्ट्रीय परिचर्चा का भव्य आयोजन किया गया। इस आयोजन में सावरकर के जीवन और उनकी वैचारिकता के विविध पहलुओं पर विस्तृत परिचर्चा हुई।

लेकिन अब सच सबके सामने आ चुका है। हम सभी को पता है कि सावरकर प्रखर राष्ट्र भक्त एवं राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन के सिपाही थे। भारत की आजादी में उनकी भी उतनी ही भूमिका थी जितनी किसी स्वतंत्रता सेनानी की। हमें उनके दर्शन को पढ़ना और समझना चाहिए। इस दो दिवसीय राष्ट्रीय परिचर्चा में जो महत्वपूर्ण बात निकलकर आयी वह यह कि हमें सावरकर के सामाजिक समरसता और राष्ट्रवाद के विचारों का न सिर्फ अनुसरण करना चाहिए, बल्कि उसके विस्तृत आलोक में सावरकर का मूल्यांकान होना चाहिए। सावरकर के दर्शन में हमें अखंड भारत की संकल्पना मिलती है। अत: यह वर्तमान भारत के युवाओं की जिम्मेदारी बनती है कि वे सावरकर के विचारों की प्रासंगिकता के बारे में समझें और उनके राष्ट्र निर्माण में योगदान पर पुन: विचार करें। वहीं कार्यक्रम के समापन सत्र के मुख्य अतिथि गृह मंत्री अमित शाह का सन्देश पढ़कर सुनाया गया। उन्होंने सावरकर के अद्वितीय व्यक्तित्व की प्रशंसा की और सामाजिक समरसता एवं साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान को याद किया।

भाजपा नेता और सांसद डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी ने सावरकर को भारत रत्न देने की मांग करते हुए कहा कि इससे भारत रत्न की गरिमा बढ़ेगी। सावरकर को भारत रत्न देने की मांग लंबे समय से चली आ रही है। डॉ. स्वामी ने अपने स्वभाव के अनुसार, उसे एक बार फिर से जीवित कर दिया। गुजरात और मध्य प्रदेश के पूर्व राज्यपाल ओम प्रकाश कोहली ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में वीर सावरकर के क्रांतिकारी, संगठनात्मक, वैचारिक और भविष्यद्रष्टा के रूप में दिए गए योगदान को पुन: स्मरण कराया। इससे पूर्व आयोजन समिति के सह सचिव संजीव तिवारी ने वक्ताओं के सामने कार्यक्रम की रूपरेखा रखी और कहा कि सावरकर की प्रासंगिकता वर्तमान भारत में कई गुना बढ़ गयी है। आवश्यकता है सावरकर के विचारों को पढ़ने, समझने और आम जनता तक पहुंचाने की। आयोजन समिति के सचिव रविंद्र साठे ने कार्यक्रम का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। और बताया कि सावरकर दर्शन प्रतिष्ठान का उद्देश्य है कि सावरकर को लेकर देश भर में इसी तरह की चर्चा हो ताकि भारत के लोग उनके विचार और दर्शन को समझ सके।


 
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